बाबूजी की तेज चाल से बढ़ी उलझने, प्रमोशन की राह में रोड़ा बनीं करतूतें
छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों खूब हलचल मची हुई है। हम आपको बताएंगे कि किस तरह साहब लोग ज्यादा ही तेज चलने के चक्कर में उलझन में पड़ गए। मीडिया से संतुलन बैठाने के लिए एक साहब की नई पोस्टिंग हुई। वैसे तो साहब सौम्य स्वभाव के हैं लेकिन उनकी कैंची ने उनको मुश्किल में डाल दिया और उलझा दिया लोगों से।
वहीं कुछ अधिकारियों की करतूतें उनके आईएएस बनने में रोड़ा बन गईं। बनना उनको था आईएएस और बन दूसरे लोग गए। उनकी करतूतों का ग्रहण ऐसे समय पर लगा जब कि प्रमोशन की पूर्णिमासी आने वाली थी। प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की ऐसी ही अनसुनी खबरों के लिए पढ़िए द सूत्र का साप्ताहिक कॉलम सिंहासन छत्तीसी।
छत्तीसगढ़ के 777 बस्तियों में पहली बार बनेगी सड़क, केंद्र से मिली मंजूरी
10वीं के छात्र हुए हादसे का शिकार, 1 की मौत, दूसरा गंभीर
कलेक्टरी की राह में रोड़ा बनी करतूतें
हाल ही में राज्य प्रशासनिक सेवा के 14 अफसरों की डीपीसी हुई और वे आईएएस बन गए। इनमें से कुछ ऐसे अफसर भी प्रमोट हो गए जिनके बारे में कहा जाता है कि काम के न काज के दुश्मन अनाज के। इनमें से कई ऐसे हैं जिन्होंने अवैध जमीन के धंधे में खूब पैसा कमाया है। लेकिन हम बात उनकी नहीं कर रहे।
हम बात कर रहे हैं ऐसे अधिकारियों की जिनकी राह में उनकी करतूतें ही रोड़ा बन गईं। यदि इन्होंने ऐसे कर्म नहीं किए होते तो ये भी आज आईएएस बन गए होते। इनमें एक महिला अधिकारी ऐसी हैं जो जेल में बंद हैं। इन्होंने राज्य प्रशासनिक सेवा की अफसर रहते हुए ही सारे आईएएस को अपनी उंगलियों पर नचा दिया। अब कर्मों का फल भुगत रही हैं। दूसरी भी ऐसी महिला अफसर हैं जो ऐन मौके पर पीएससी घोटाले में फंस गईं।
और तीसरे ऐसे साहब हैं जिन पर जमीन घोटाले का आरोप लगा था। डीपीसी के चक्कर में इन्होंने ऐसा चक्कर चलाया कि सरकार से उनको क्लीन चिट मिल गई। लेकिन अदालती चक्कर के कारण इनकी डीपीसी नहीं हो पाई। अब भाई ये तो कर्मों का खेल है, जैसे करम करेगा वैसा ही फल मिलेगा। ये तो गीता का ज्ञान है फिर झूठा कैसे होगा।
रानू साहू को करोड़ों रुपए देने वाले द्विवेदी को ED ने किया गिरफ्तार
मुख्य सचिव के नाम पर हलचल
इन दिनों में मंत्रालय में नए मुख्य सचिव को लेकर हलचल शुरु हो गई है। नए मुख्य सचिव के लिए जो नाम आ रहा है उससे मंत्रालय के अधिकारियों की धड़कने बढ़ने लगी हैं। हालांकि अभी इस बात को समय है क्योंकि अभी वर्तमान मुख्य सचिव के कार्यकाल पूरा होने में छह महीने का वक्त है।
मुख्य सचिव को लेकर भारत सरकार में पोस्टेड अफसर के नाम की चर्चा है। हालांकि उनसे सीनियर दो अफसर प्रदेश में ही हैं लेकिन चर्चा दिल्ली के अफसर की है। इनके नाम को लेकर अधिकारियों में इसलिए डर है क्योंकि ये तेज तर्रार और अनुशासित कार्यशैली के अफसर माने जाते हैं। यदि ये प्रदेश में आ गए तो यहां के अधिकारियों की मनमर्जी और लेट लतीफी की आदत को सुधारना पड़ेगा। अब ऐसे में कौन चाहेगा कि उनके आराम में खलल पड़े।
पुलिस कैंप पर नक्सलियों का हमला, 3 जवान घायल.. कैंप में बीजापुर SP भी