वर्क ऑर्डर से पहले ही उगाही मोड में हैदराबाद की GVK EMRI कंपनी, छत्तीसगढ़ के युवाओं से करोड़ों की वसूली

VINAY VERMA | Jan 27, 2026, 19:48 IST
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छत्तीसगढ़ में 108 एंबुलेंस सेवा के नए टेंडर को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। वर्क ऑर्डर जारी होने से पहले ही GVK EMRI ग्रीन हेल्थ सर्विसेस पर युवाओं से अवैध वसूली के आरोप लगे हैं। प्रोग्राम के नाम पर EMT, ड्राइवर और ERO से हजारों रूपए मांगे जा रहे हैं।

NEWS IN SHORT:

  • वर्क ऑर्डर से पहले GVK EMRI ग्रीन कंपनी की लूट
  • छग के युवाओं से 15 हजार रुपए तक की मांग
  • अपलिंकिंग प्रोग्राम के नाम पर EMT से 15000 रुपए की वसूली
  • ड्राईवर और ERO से 7500 रुपए मांग रही GVK कंपनी
  • अनुभवी ड्राइवर, EMT-ERO पर ट्रेनिंग का दबाव
  • 300 एंबुलेंस संभालने से पहले करोड़ों रुपए की उगाही

NEWS IN DETAIL:

छत्तीसगढ़ में 108 एंबुलेंस सेवा के नए टेंडर को लेकर विवाद सामने आ गया है। वर्क ऑर्डर जारी होने से पहले ही हैदराबाद की GVK EMRI ग्रीन हेल्थ सर्विसेस कंपनी पर गंभीर आरोप लगे हैं।



आरोप है कि कंपनी ने सेवा संभालने से पहले ही नौकरी की चाह रखने वाले युवाओं से अवैध वसूली शुरू कर दी है।



अपलिंकिंग प्रोग्राम के नाम पर EMT यानी इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन से 15 हजार रूपए तक, जबकि ड्राइवर और ERO यानी इमरजेंसी रिस्पॉन्स ऑफिसर से 7500 रूपए मांगे जा रहे हैं।



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L-1 आई है कंपनी

GVK EMRI ग्रीन हेल्थ सर्विसेज कंपनी 108 एंबुलेंस सेवा के टेंडर में L-1 आई है, यानी सबसे कम दर की बोली कंपनी ने लगाई है।



अभी तक कंपनी को औपचारिक रूप से वर्क ऑर्डर जारी नहीं हुआ है, इसके बावजूद भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और खुलेआम पैसे वसूले जा रहे हैं।



नियमों के अनुसार, वर्क ऑर्डर मिलने से पहले न तो भर्ती की जा सकती है और न ही किसी तरह का शुल्क लिया जा सकता है, लेकिन यहां नियमों को ताक पर रख दिया गया है।



अनुभवी को भी ट्रेनिंग

प्रदेश के युवाओं ने द सूत्र को दस्तावेजों सहित जानकारी दी कि नई एंबुलेंस संचालन कंपनी अपलिंकिंग प्रोग्राम में शामिल होने कहा जा रहा है।



जिसमें शामिल होने के लिए EMT से 15000 रुपए और ड्राइवर-ईआरओ से 7500 रूपए की मांग की जा रही है।



हैरानी की बात यह है कि यह वसूली केवल नए अभ्यर्थियों से ही नहीं, बल्कि पुराने और अनुभवी ड्राइवरों व ईएमटी से भी की जा रही है, जो पहले से ही 108 सेवा में काम कर चुके हैं।



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पैसे को प्राथमिकता?

युवाओं का आरोप है कि पैसे लेने के लिए कंपनी की तरफ से क्यूआर कोड भी जारी किया गया है। उन्हें यह कहकर पैसे जमा करने को मजबूर किया जा रहा है कि अगर अपलिंकिंग प्रोग्राम में शामिल नहीं हुए तो आगे नौकरी मिलने में दिक्कत हो सकती है।



कई युवाओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कंपनी के प्रतिनिधि खुले तौर पर कह रहे हैं कि “जो अभी पैसा देगा, उसी को प्राथमिकता मिलेगी।”



हैंडओवर प्रक्रिया जारी

बताया जा रहा है कि वर्तमान में 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन जय अंबे एंबुलेंस सर्विसेस द्वारा किया जा रहा है। नियमों के मुताबिक, अगले दो-तीन महीनों के भीतर यह सेवा जीवीके ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेस कंपनी को हैंडओवर की जानी है।



लेकिन उससे पहले ही भर्ती प्रक्रिया में पैसे की मांग से यह साफ होता है कि आने वाले समय में सेवा की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा हो सकता है।



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भरपाई कर्मचारियों से?

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब कंपनी ने टेंडर में सबसे कम दर पर काम करने की जिम्मेदारी ली है, तो फिर कर्मचारियों से इतनी भारी रकम क्यों वसूली जा रही है?



क्या लागत की भरपाई युवाओं की जेब से की जा रही है? यदि ऐसा है, तो यह न सिर्फ अनैतिक है, बल्कि सरकारी सेवा व्यवस्था के साथ सीधा धोखा भी है।



उच्च अधिकारियों को जानकारी देंगे

इस पूरे मामले पर एंबुलेंस सर्विसेस के प्रभारी अधिकारी और उपसंचालक डॉ. नेतराम बेक बता रहे हैं कि जानकारी के अनुसार अभी GVK EMRI ग्रीन हेल्थ सर्विसेस कंपनी को वर्क ऑर्डर जारी नहीं किया गया है।



फिलहाल एक कंपनी से दूसरी कंपनी को हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस विषय से संबंधित कोई साक्ष्य उपलब्ध कराए जाते हैं, तो उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी दी जाएगी



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निष्कर्ष

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या शासन-प्रशासन समय रहते इस मामले में हस्तक्षेप करेगा या फिर बेरोजगारी का फायदा उठाकर निजी कंपनियां यूं ही युवाओं से पैसे वसूलती रहेंगी।



108 एंबुलेंस सेवा से जुड़े इस कथित खेल ने एक बार फिर सरकारी निगरानी और पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा दिया है।



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