हल्दी-अदरक बीज योजना के नाम पर 10 करोड़ का घोटाला, कृषि मंत्री ने दिए जांच के आदेश
Harrison Masih | Oct 15, 2026, 18:22 IST
हल्दी बीज वितरण योजना में घोटाला
छत्तीसगढ़ में मसाला विस्तार योजना के तहत हल्दी और अदरक के बीज वितरण में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद कृषि विभाग में हड़कंप मच गया है। किसानों को सब्सिडी पर बीज उपलब्ध कराने की इस योजना में करीब 10 करोड़ रूपए की कथित अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। कृषि मंत्री रामविचार नेताम के निर्देश पर अब मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
खुलासे के बाद उद्यानिकी संचालनालय ने जांच के लिए टीम गठित की है।
जांच में यह पता लगाया जाएगा कि किसानों को वास्तव में कितने बीज दिए गए, बीज की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप थी या नहीं और सब्सिडी की राशि किन हितग्राहियों को दी गई। इसके लिए जिलों से हितग्राहीवार जानकारी और संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं।
मसाला विस्तार योजना के तहत प्रदेश में करीब 25 करोड़ रूपए की लागत से 2,076 हेक्टेयर क्षेत्र में हल्दी और अदरक की खेती कराने का लक्ष्य रखा गया था। इसके लिए 10 एजेंसियों के माध्यम से किसानों को बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था बताई गई थी।
हालांकि, सामने आई शिकायतों के मुताबिक, बीरगांव की एक ही एजेंसी ने रायपुर से लेकर कोंडागांव, बीजापुर और जगदलपुर समेत कई जिलों में बीज की आपूर्ति की। इससे बीज की गुणवत्ता, कीमत और वितरण व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
मामले में बीज की कीमत को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की ओर से मानक हल्दी बीज की कीमत करीब 70 रूपए प्रति किलो बताई गई है, जबकि संबंधित एजेंसी ने कथित तौर पर 46 रूपए प्रति किलो की दर से बीज की आपूर्ति की।
शिकायतों में बीज की गुणवत्ता और उसके मानकों के अनुरूप होने पर संदेह जताया गया है। हालांकि, बीज की वास्तविक गुणवत्ता और आपूर्ति से संबंधित तथ्यों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
जांच के दौरान अधिकारियों को किसानों के खेतों में लगी हल्दी की फसल का डिजिटल क्रॉप सर्वे कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके जरिए यह पता लगाया जाएगा कि योजना के तहत जिन खेतों में हल्दी की खेती दिखायी गई है, वहां वास्तव में फसल लगाई गई है या नहीं।
बीज वितरण को लेकर मिल रही शिकायतों और सत्यापन की प्रक्रिया को देखते हुए हल्दी की खेती से संबंधित अनुदान भुगतान पर रोक लगा दी गई है। अब किसानों के खेतों में फसल की वास्तविक स्थिति और बीज वितरण के रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।
इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सब्सिडी का भुगतान वास्तविक हितग्राहियों को ही मिले। जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
मामले में शिकायतकर्ताओं ने बीज आपूर्ति से जुड़े कई गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि कुछ बीजों का वैधानिक पंजीयन नहीं था और आपूर्ति निर्धारित टेंडर शर्तों के अनुसार नहीं की गई।
शिकायतों में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित संस्था के पास बीज उत्पादन और प्रमाणीकरण की वैधानिक व्यवस्था नहीं थी। इसके अलावा हल्दी की 'रोमा' किस्म के बीज के लिए कथित तौर पर फर्जी लॉट नंबर इस्तेमाल करने और उपयोग की अवधि समाप्त होने के बाद बीज वितरित किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
कुछ जिलों के किसानों ने कथित तौर पर यह शिकायत भी की है कि उन्हें बीज नहीं मिला, इसके बावजूद उनका नाम लाभार्थियों की सूची में दर्ज कर दिया गया। इन सभी आरोपों की जांच की जा रही है।
मिली जानकारी के मुताबिक, जगदलपुर, कोंडागांव, धमतरी, राजनांदगांव, दुर्ग, बिलासपुर, अंबिकापुर, बलरामपुर, जशपुर और महासमुंद सहित कई जिलों में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं।
आरोप है कि कुछ स्थानों पर संबंधित अधिकारियों ने बीज की गुणवत्ता और आपूर्ति का पर्याप्त परीक्षण किए बिना भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। जांच टीम अब बीज आपूर्तिकर्ता संस्थाओं के रिकॉर्ड और अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल करेगी।
अधिकारियों का दावा- 1.38 करोड़ रूपए का हुआ भुगतान
विवाद के बीच विभागीय अधिकारियों की ओर से पहले गड़बड़ी के आरोपों से इनकार किया गया था। अधिकारियों के मुताबिक, 6.22 करोड़ रूपए के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 1.38 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया था।
वहीं, जनसंपर्क संचालनालय ने सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ खबरों को भ्रामक बताया था। अब कृषि मंत्री के निर्देश पर जांच शुरू होने के बाद मामले में वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
मसाला विस्तार योजना का उद्देश्य किसानों को बेहतर बीज उपलब्ध कराकर हल्दी और अदरक की खेती को बढ़ावा देना है। ऐसे में बीज वितरण में कथित गड़बड़ी के आरोपों ने सरकारी योजनाओं की निगरानी और किसानों तक लाभ पहुंचाने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल जांच टीम बीज की गुणवत्ता, वितरण, भुगतान और खेतों में फसल की वास्तविक स्थिति का सत्यापन कर रही है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि योजना में कितनी अनियमितता हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
जांच में यह पता लगाया जाएगा कि किसानों को वास्तव में कितने बीज दिए गए, बीज की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप थी या नहीं और सब्सिडी की राशि किन हितग्राहियों को दी गई। इसके लिए जिलों से हितग्राहीवार जानकारी और संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं।
25 करोड़ की योजना, 10 करोड़ की गड़बड़ी
हालांकि, सामने आई शिकायतों के मुताबिक, बीरगांव की एक ही एजेंसी ने रायपुर से लेकर कोंडागांव, बीजापुर और जगदलपुर समेत कई जिलों में बीज की आपूर्ति की। इससे बीज की गुणवत्ता, कीमत और वितरण व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
70 रूपए किलो के बीज की सप्लाई 46 रूपए में
शिकायतों में बीज की गुणवत्ता और उसके मानकों के अनुरूप होने पर संदेह जताया गया है। हालांकि, बीज की वास्तविक गुणवत्ता और आपूर्ति से संबंधित तथ्यों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
डिजिटल क्रॉप सर्वे से होगा खेतों का सत्यापन
इसके अलावा जांच टीम को कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी जुटाने को कहा गया है-
- किसानों को वितरित किए गए बीज की वास्तविक मात्रा।
- बीज की गुणवत्ता और संबंधित संस्थाओं के दस्तावेज।
- किसानों के खेतों में रोपित फसल और वास्तविक रकबे का सत्यापन।
- अनुदान राशि के भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड।
- खेतों के GPS आधारित फोटोग्राफ और भौतिक सत्यापन रिपोर्ट।
जांच पूरी होने तक अनुदान भुगतान पर रोक
इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सब्सिडी का भुगतान वास्तविक हितग्राहियों को ही मिले। जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
फर्जी लॉट नंबर और एक्सपायरी बीज के भी आरोप
शिकायतों में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित संस्था के पास बीज उत्पादन और प्रमाणीकरण की वैधानिक व्यवस्था नहीं थी। इसके अलावा हल्दी की 'रोमा' किस्म के बीज के लिए कथित तौर पर फर्जी लॉट नंबर इस्तेमाल करने और उपयोग की अवधि समाप्त होने के बाद बीज वितरित किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
कुछ जिलों के किसानों ने कथित तौर पर यह शिकायत भी की है कि उन्हें बीज नहीं मिला, इसके बावजूद उनका नाम लाभार्थियों की सूची में दर्ज कर दिया गया। इन सभी आरोपों की जांच की जा रही है।
इन जिलों में शिकायतें, अधिकारियों से मांगा गया जवाब
आरोप है कि कुछ स्थानों पर संबंधित अधिकारियों ने बीज की गुणवत्ता और आपूर्ति का पर्याप्त परीक्षण किए बिना भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। जांच टीम अब बीज आपूर्तिकर्ता संस्थाओं के रिकॉर्ड और अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल करेगी।
अधिकारियों का दावा- 1.38 करोड़ रूपए का हुआ भुगतान
विवाद के बीच विभागीय अधिकारियों की ओर से पहले गड़बड़ी के आरोपों से इनकार किया गया था। अधिकारियों के मुताबिक, 6.22 करोड़ रूपए के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 1.38 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया था।
वहीं, जनसंपर्क संचालनालय ने सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ खबरों को भ्रामक बताया था। अब कृषि मंत्री के निर्देश पर जांच शुरू होने के बाद मामले में वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
जांच रिपोर्ट के बाद तय होगी जिम्मेदारी
फिलहाल जांच टीम बीज की गुणवत्ता, वितरण, भुगतान और खेतों में फसल की वास्तविक स्थिति का सत्यापन कर रही है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि योजना में कितनी अनियमितता हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
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