एमपी,सीजी और राजस्थान की सड़कों के पास बनेंगे आरोग्य वन, नेशनल हाइवे के किनारे लगेंगे आंवला, इमली और जामुन के पेड़
अब जब भी आप मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़ और राजस्थान के नेशनल हाइवे से गुजरेंगे तो आपको इमली,आवंला,बेर और जामुन की खट्टी,मीठी सी खुशबू आएगी। इससे आपका सफर और खूबसूरत हो जाएगा। सड़कों को खूबसूरत बनाने के लिए हरित हाईवे का प्लान बनाया गया है। इन राज्यों के नेशनल हाइवे के किनारे औषधीय पौधे लगाए जाएंगे।
मानसून के मौसम में इस तरह के आयुर्वेद वाले पौधे लगाने का प्लान तैयार किया गया है। यह प्लान पर्यावरण को भी औषधी प्रदान करेगा। इसका पूरा खाका एनएचआई ने तैयार किया है।
हरित हाइवे प्लान :
छत्तीसगढ़,एमपी और राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक सौंदर्य बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राज्यों के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे पौधे लगाने का प्लान (Green Highway Plan) तैयार किया है।
इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ में रायपुर से होकर गुजरने वाले हाईवे और रायपुर-बिलासपुर मार्ग समेत अन्य नेशनल हाइवे को हरित गलियारों में बदला जाएगा। इसके अलावा मध्यप्रदेश और राजस्थान की भी प्रमुख सड़कों को चुना गया है।
एनएचएआई द्वारा जारी इस योजना में देश के 11 राज्यों को पहले चरण में शामिल किया गया है, जिनमें एमपी,राजस्थान और छत्तीसगढ़ भी प्रमुख रूप से शामिल है। योजना के अनुसार आगामी मानसून सीजन में बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा। इसके लिए पहले ही संभावित स्थलों की पहचान कर ली गई है और विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा चुकी है।
पर्यावरण को मिलेगी औषधी :
इस पहल का मकसद सिर्फ हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि हाईवे किनारे खाली पड़ी जमीन का बेहतर उपयोग करना और पर्यावरण संतुलन को मजबूत करना भी है। एनएचएआई ने आरोग्य वन विकसित करने के प्लान के तहत काम शुरू किया है। जिसके तहत औषधीय पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे न केवल हरित आवरण बढ़ेगा, बल्कि आयुर्वेदिक महत्व की वनस्पतियों का संरक्षण भी संभव होगा।
इन राज्यों में लगेंगे पौधे :
पहले चरण में देशभर में करीब 62.8 हेक्टेयर क्षेत्र में 17 भूखंड चिन्हित किए गए हैं, जहां पौधारोपण किया जाएगा। इसके तहत लगभग 67,462 औषधीय और उपयोगी पौधे लगाए जाने की योजना है। छत्तीसगढ़ के अलावा इस योजना में मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्य भी शामिल हैं।
ये पौधे लगेंगे सड़क किनारे :
पौधारोपण के लिए जिन प्रजातियों का चयन किया गया है, उनमें नीम, आंवला, इमली, जामुन, नींबू, गूलर और मौलसरी सहित कुल 36 प्रकार के पौधे शामिल हैं। इन प्रजातियों का चयन राज्यों की जलवायु, मिट्टी की स्थिति और उपलब्ध भूमि के आधार पर किया गया है।
इन पौधों से न केवल पर्यावरण को लाभ होगा, बल्कि पक्षियों और अन्य जीवों को भी प्राकृतिक आश्रय मिलेगा, जिससे जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा।प्राधिकरण का मानना है कि यह पहल देश में हरित गलियारों का नेटवर्क विकसित करने में अहम भूमिका निभाएगी।
साथ ही यह आयुर्वेदिक परंपरा को बढ़ावा देने और स्वदेशी औषधीय पौधों को संरक्षित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
यहां लगेंगे पौधे :
छत्तीसगढ़ में इस अभियान के तहत टोल प्लाजा, इंटरचेंज, क्लोवरलीफ जंक्शन और सड़क किनारे स्थित बड़े खाली भूखंडों को प्राथमिकता दी गई है। इन स्थानों पर पौधारोपण कर हरित पट्टी विकसित की जाएगी, जिससे यात्रियों को भी सुखद अनुभव मिलेगा और धूल-प्रदूषण में कमी आएगी।
NHAI ने अपने व्यापक प्लान में कुल 188 हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल किया है, जिसमें से बड़े हिस्से में पौधारोपण और उसके संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहकर, उनकी देखभाल और संरक्षण की भी ठोस व्यवस्था की जाएगी, ताकि अधिकतम पौधे जीवित रह सकें।
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