नर्मदा की सफाई और हरियाली पर सरकार का 10 हजार करोड़ का मास्टर प्लान

नर्मदा नदी को प्रदूषण से बचाने और हरियाली बढ़ाने के लिए राज्य सरकार 10 हजार करोड़ रुपए खर्च करेगी। योजना के तहत घाट विकास, अपशिष्ट प्रबंधन और पुनर्वास कार्य होंगे।

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Ten Thousand Crore Plan for Narmada Conservation in Madhya Pradesh
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News In Short

  • नर्मदा संरक्षण के लिए 10 हजार करोड़ रुपए की योजना
  • नमामि गंगे अभियान के तहत होगा काम
  • IIT इंदौर करेगा तकनीकी कंसल्टेंसी
  • शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में एक साथ काम
  • नदी में गंदा पानी मिलने से रोकने पर जोर
  • घाट, परिक्रमा मार्ग और धार्मिक स्थलों का विकास

News In Detail 

मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी को प्रदूषण से बचाने और हरियाली बढ़ाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। करीब 10 हजार करोड़ रुपए  की लागत से नर्मदा संरक्षण और विकास का डिटेल एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। यह पहली बार है, जब नर्मदा के लिए शहरों और गांवों में एक साथ योजनाबद्ध काम होंगे।

IIT इंदौर करेगा कंसल्टेंसी

इस योजना की तकनीकी कंसल्टेंसी IIT इंदौर द्वारा की जाएगी। योजना को नमामि गंगे अभियान के अंतर्गत लागू किया जाएगा। उद्देश्य नर्मदा को अविरल बनाए रखना और नदी के जल को प्रदूषित होने से रोकना है।

गंदगी रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था

योजना के तहत तरल और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की स्थायी व्यवस्था की जाएगी। घाटों पर बने शौचालय और स्नान कक्षों से निकलने वाला पानी सीधे नदी में न जाए, इसके लिए सीवेज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे। इन कार्यों की निगरानी पंचायत और नगरीय निकाय करेंगे।

कैचमेंट क्षेत्र में बढ़ेगी हरियाली

नर्मदा के किनारे और उसके कैचमेंट क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जाएगा। इसके लिए सैटेलाइट सर्वे कराया जाएगा, ताकि कम हरियाली वाले क्षेत्रों की पहचान हो सके। इससे जल संरक्षण के साथ मिट्टी के कटाव और नदी के तेज बहाव को कम करने में मदद मिलेगी। इस कार्य में किसान, वन, कृषि, पंचायत और उद्यानिकी विभाग मिलकर काम करेंगे।

बाढ़ प्रभावित बस्तियों का पुनर्वास

नर्मदा के बाढ़ क्षेत्र में आने वाली बस्तियों के लिए पुनर्वास की योजना बनाई जा रही है। कच्चे मकान, झुग्गियां और अस्थायी आवासों को पक्के घरों में बदला जाएगा। जो परिवार दूसरी जगह बसना चाहेंगे, उन्हें भी सहयोग दिया जाएगा।

घाटों और परिक्रमा मार्ग का विकास

नदी के घाटों पर पक्का निर्माण, सीढ़ियां, रेलिंग, प्रकाश व्यवस्था, पीने का पानी, रैन बसेरा और शौचालय की सुविधा विकसित की जाएगी। इसके साथ ही नर्मदा परिक्रमा मार्ग पर पगडंडियां, कच्ची सड़कें, ठहरने की व्यवस्था और धार्मिक महत्व के पौधे लगाए जाएंगे।

धार्मिक और पर्यटन स्थलों को मिलेगा नया रूप

नर्मदा किनारे स्थित धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन महत्व के मंदिरों, मठों और भवनों का विकास किया जाएगा। इन स्थलों तक पहुंच के लिए सड़क मार्ग बनाए जाएंगे और उनके महत्व को लेकर लोगों को जागरूक किया जाएगा।

पहले भी हो चुके हैं संरक्षण के प्रयास

नर्मदा नदी प्रदेश के 19 शहरों से होकर गुजरती है। इन शहरों के सीवेज को सीधे नदी में मिलने से रोकने के लिए सरकार पहले ही करीब 1400 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है।

इसके अलावा:

  • एक दिन में 6 करोड 67 लाख 50 हजार पौधे लगाए गए
  • शहरी क्षेत्र में एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत 30 लाख पौधे
  • 12 वन मंडलों में 124 करोड़ रुपए की लागत से पौधरोपण
  • 38 उद्योगों द्वारा 38 लाख पौधे लगाए गए

पांच साल में होगा समग्र विकास

नर्मदा को स्वच्छ और अविरल बनाए रखने के लिए पांच वर्षीय एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। इसके तहत पर्यटन, धार्मिक स्थल और घाटों का समग्र विकास किया जाएगा।

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