हसदेव नदी रेत टेंडर रद्द : बिना फाइनल DSR नीलामी पर हाईकोर्ट की रोक, सरकार को झटका

VINAY VERMA | May 20, 2026, 17:13 IST
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए हसदेव नदी में प्रस्तावित रेत खदान के टेंडर को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना अंतिम और स्वीकृत जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट (DSR) के नीलामी अवैध है।

BILASPUR : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जांजगीर चांपा जिले की हसदेव नदी में प्रस्तावित रेत खदान के टेंडर पर बड़ा फैसला सुनाते हुए पूरी नीलामी प्रक्रिया को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि बिना अंतिम और विधिवत स्वीकृत जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट (DSR) के रेत खदानों की नीलामी नहीं की जा सकती। सिर्फ ड्राफ्ट रिपोर्ट के आधार पर टेंडर जारी करना नियमों के खिलाफ है।



यह मामला जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम पंचायत हथनेवरा से जुड़ा है, जहां प्रशासन ने हसदेव नदी में रेत खनन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। पंचायत ने आरोप लगाया कि जिस जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर खदान का टेंडर निकाला गया, उसकी वैधता पहले ही खत्म हो चुकी थी। इसके बावजूद प्रशासन ने 30 मार्च को नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी और सफल बोलीदाता का चयन भी कर लिया गया।



सरपंच पहुंचे हाईकोर्ट, उठाए गंभीर सवाल

ग्राम पंचायत हथनेवरा के सरपंच ने इस पूरी प्रक्रिया को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। पंचायत की ओर से कहा गया कि जिले में कोई नई और विधिवत स्वीकृत DSR रिपोर्ट मौजूद नहीं है। ऐसे में रेत खदान का टेंडर जारी करना सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।



याचिका में यह भी कहा गया कि जिला प्रशासन पांच साल पुरानी रिपोर्ट के सहारे खनन प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा था, जबकि नियमों के मुताबिक नई रिपोर्ट तैयार कर उसे सार्वजनिक आपत्तियों और अनुमोदन की प्रक्रिया से गुजरना जरूरी है।



कोर्ट ने कहा- वेबसाइट पर अपलोड करना ही पर्याप्त नहीं

मामले की सुनवाई रमेश सिन्हा और रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार की प्रक्रिया पर गंभीर टिप्पणी की।



कोर्ट ने कहा कि सिर्फ ड्राफ्ट रिपोर्ट को वेबसाइट पर अपलोड कर देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। नियमों के तहत रिपोर्ट पर आम जनता से आपत्तियां आमंत्रित करना जरूरी है। इसके बाद कलेक्टर की मंजूरी मिलने पर ही उसे अंतिम जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट माना जाएगा।



बेंच ने स्पष्ट किया कि जब तक DSR अंतिम रूप से स्वीकृत नहीं हो जाती, तब तक उसके आधार पर खदान आवंटन या नीलामी प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती।



सरकार ने कहा- राजस्व का नुकसान होगा

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट में दलील दी कि वर्ष 2025 की नई रिपोर्ट तैयार कर 27 नवंबर 2025 को ऑनलाइन अपलोड कर दी गई थी और टेंडर प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी थी। सरकार ने कहा कि इस स्तर पर रोक लगाने से सरकारी राजस्व को नुकसान होगा।



हालांकि कोर्ट ने सरकार की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने माना कि सरकार जिस रिपोर्ट का हवाला दे रही है, वह केवल ड्राफ्ट रिपोर्ट थी और उसे अंतिम मंजूरी नहीं मिली थी।



दोबारा होगी पूरी प्रक्रिया

सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने रेत खदान का टेंडर रद्द कर दिया। साथ ही राज्य सरकार को यह छूट दी कि वह नियमों के अनुसार नई और स्वीकृत DSR रिपोर्ट तैयार कराकर दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू कर सकती है।



हाईकोर्ट के इस फैसले को प्रदेश में रेत खनन और खदान आवंटन प्रक्रियाओं के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है। माना जा रहा है कि अब बिना वैधानिक प्रक्रिया पूरी किए खनन टेंडर जारी करना सरकार और प्रशासन के लिए आसान नहीं होगा।



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