छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट : सिर्फ आर्य समाज के प्रमाणपत्र से साबित नहीं होगी शादी

Umeshwari Baghel | Jul 01, 2026, 18:02 IST
Share
आर्य समाज के प्रमाणपत्र से साबित नहीं होगी शादी
आर्य समाज के प्रमाणपत्र से साबित नहीं होगी शादी

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महिला की भरण-पोषण याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि केवल आर्य समाज मंदिर का विवाह प्रमाणपत्र वैध शादी साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

बिलासपुर।छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अंतरधार्मिक विवाह और भरण-पोषण से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि केवल आर्य समाज मंदिर से जारी विवाह प्रमाणपत्र और शुद्धि प्रमाणपत्र के आधार पर किसी महिला को कानूनी पत्नी नहीं माना जा सकता। विवाह की वैधता साबित करने के लिए कानून के अनुसार पर्याप्त दस्तावेज और विश्वसनीय साक्ष्य पेश करना जरूरी है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की एकलपीठ ने मनेंद्रगढ़ फैमिली कोर्ट के आदेश को सही माना है। हाईकोर्ट ने कैंसर से पीड़ित शायना परवीन उर्फ राधिका सुमन की क्रिमिनल रिवीजन याचिका खारिज कर दी। महिला ने घनश्याम सुमन को अपना पति बताते हुए हर महीने 30 हजार रुपए भरण-पोषण देने की मांग की थी।

अदालत ने माना कि महिला अपनी आजीविका चलाने में असमर्थ हो सकती है। गंभीर बीमारी के कारण उसे आर्थिक परेशानी भी हो सकती है। इसके बावजूद भरण-पोषण पाने के लिए सबसे पहले वैध वैवाहिक संबंध साबित करना जरूरी है। महिला उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों से यह साबित नहीं कर सकी कि घनश्याम सुमन उसका कानूनी पति है।

वर्ष 2017 में विवाह होने का दावा

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के खोंगापानी की रहने वाली शायना परवीन ने अदालत में दावा किया था कि उसने 15 जून 2017 को घनश्याम सुमन से विवाह किया था। कथित विवाह रायपुर के बैजनाथपारा स्थित आर्य समाज मंदिर में हुआ था।

महिला के अनुसार वह जन्म से मुस्लिम थी। विवाह से पहले उसने आर्य समाज मंदिर में शुद्धि संस्कार कराया था। इसके बाद उसने वैदिक धर्म अपनाया और हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार घनश्याम सुमन से शादी की। अपने दावे के समर्थन में उसने आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र और शुद्धि से जुड़े दस्तावेज अदालत में पेश किए थे।

महिला ने कहा कि शादी के बाद दोनों कई वर्षों तक पति-पत्नी की तरह साथ रहे। वर्ष 2020 के आसपास वह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हो गई। इलाज पर बड़ी रकम खर्च होने लगी। महिला का आरोप था कि इलाज की जिम्मेदारी से बचने के लिए घनश्याम ने उसे मायके भेज दिया। इसके बाद उसने महिला से दूरी बना ली।

शायना ने यह भी आरोप लगाया कि घनश्याम सुमन ने बाद में कविता नाम की महिला से दूसरी शादी कर ली। महिला के अनुसार घनश्याम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जैजैपुर में सहायक ग्रेड-3 के पद पर कार्यरत है। उसकी मासिक आय लगभग 80 हजार रुपए है। इसी आधार पर महिला ने अपने इलाज और जीवनयापन के लिए हर महीने 30 हजार रुपए मांगे थे।

घनश्याम ने महिला को पत्नी मानने से किया इनकार

घनश्याम सुमन ने अदालत के सामने विवाह की बात से साफ इनकार कर दिया। उसने कहा कि महिला से उसका कोई वैध विवाह नहीं हुआ था। वह हिंदू है और महिला मुस्लिम थी। दोनों के बीच विवाह के लिए जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।

घनश्याम का कहना था कि उसकी पहचान महिला से सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी। दोनों के बीच केवल दोस्ती थी। महिला और उसके परिवार की बीमारी तथा आर्थिक स्थिति देखकर उसने मानवीय आधार पर मदद की थी।

उसने अदालत को बताया कि अप्रैल 2021 से सितंबर 2025 के बीच उसने ऑनलाइन माध्यम से महिला को 9 लाख 7 हजार 900 रुपए दिए थे। इसके अलावा करीब 3 लाख रुपए नकद देने का भी दावा किया गया। घनश्याम ने कहा कि यह रकम इलाज और दूसरी जरूरतों के लिए सहायता के रूप में दी गई थी।

घनश्याम ने महिला पर ब्लैकमेल करने का आरोप भी लगाया। उसने दावा किया कि आर्थिक सहायता की रकम वापस न करनी पड़े इसलिए महिला स्वयं को उसकी पत्नी बता रही है। उसने महिला के चिकित्सा दस्तावेजों और दूसरे रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया। उसका कहना था कि इन दस्तावेजों में महिला का नाम अब भी शायना परवीन दर्ज है।

फैमिली कोर्ट से भी नहीं मिली थी राहत

महिला ने सबसे पहले मनेंद्रगढ़ फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण के लिए आवेदन लगाया था। फैमिली कोर्ट ने 19 मई 2026 को इस मामले में आदेश दिया था। अदालत ने माना था कि बीमारी और कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण महिला अपना खर्च उठाने में सक्षम नहीं है।

फैमिली कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या महिला घनश्याम सुमन की कानूनी पत्नी है। अदालत ने आर्य समाज मंदिर के प्रमाणपत्रों और दोनों पक्षों की ओर से पेश दस्तावेजों की जांच की। उपलब्ध साक्ष्यों से वैध विवाह स्थापित नहीं होने पर महिला का आवेदन खारिज कर दिया गया।

फैमिली कोर्ट ने अपने आदेश में आशीष मौर्य बनाम अनामिका धीमान मामले में दिए गए न्यायिक सिद्धांत का उल्लेख किया था। अदालत के अनुसार आर्य समाज संस्था की ओर से दिया गया प्रमाणपत्र अकेले विवाह की वैधानिकता साबित नहीं करता। विवाह संबंधित कानूनों की शर्तें पूरी हुई हैं या नहीं, यह देखना भी आवश्यक है।

फैमिली कोर्ट के इसी आदेश को चुनौती देते हुए महिला ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन याचिका दाखिल की थी।

लंबे समय तक साथ रहने की दी गई दलील

हाईकोर्ट में महिला की ओर से अधिवक्ता अली अफजाल मिर्जा ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि महिला और घनश्याम वर्ष 2017 से 2022 तक पति-पत्नी की तरह साथ रहे थे। लंबे समय तक साथ रहने के कारण उनके बीच विवाह होने की कानूनी धारणा बनाई जानी चाहिए।

महिला की ओर से सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का उल्लेख भी किया गया। दलील दी गई कि भरण-पोषण से जुड़े मामलों में विवाह की वैधता की जांच आपराधिक मुकदमे जैसी कठोरता से नहीं होनी चाहिए। ऐसे मामलों में आर्थिक रूप से कमजोर महिला को राहत देने के उद्देश्य को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

घनश्याम की ओर से इन तर्कों का विरोध किया गया। उसकी ओर से कहा गया कि साथ रहने का दावा भी पर्याप्त साक्ष्यों से साबित नहीं किया गया है। आर्य समाज मंदिर का प्रमाणपत्र वैध विवाह का निर्णायक प्रमाण नहीं हो सकता। पक्षकारों के अलग-अलग धर्मों से होने के कारण विवाह से पहले सभी कानूनी शर्तों का पालन किया जाना जरूरी था।

हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही माना

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैमिली कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि निचली अदालत ने दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों का उचित मूल्यांकन किया है। आदेश में ऐसी कोई गंभीर कानूनी गलती नजर नहीं आती जिसके कारण उसे बदला जाए।

अदालत ने स्पष्ट किया कि भरण-पोषण की मांग करने वाली महिला को पति-पत्नी का संबंध साबित करना होगा। केवल आर्थिक सहायता मिलने या कुछ समय तक साथ रहने के दावे से वैध विवाह अपने आप स्थापित नहीं हो जाता। आर्य समाज के दस्तावेजों के साथ विवाह से जुड़ी आवश्यक कानूनी शर्तों का पालन साबित करना भी जरूरी है।

हाईकोर्ट का फैसला इस विशेष मामले के तथ्यों और पेश किए गए साक्ष्यों पर आधारित है। इसे सभी अंतरधार्मिक विवाहों पर लागू होने वाला सामान्य प्रतिबंध नहीं माना जाना चाहिए। भारत में अलग-अलग धर्मों के दो वयस्क विशेष विवाह अधिनियम सहित लागू कानूनों के अनुसार विवाह कर सकते हैं। विवाद की स्थिति में विवाह का पंजीकरण और कानूनी प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज महत्वपूर्ण प्रमाण बनते हैं।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के इस फैसले का मुख्य आधार महिला की बीमारी या आर्थिक स्थिति नहीं बल्कि विवाह की कानूनी वैधता थी। अदालत ने माना कि महिला आर्थिक रूप से कमजोर है और अपना भरण-पोषण करने में कठिनाई का सामना कर रही है। इसके बावजूद वह घनश्याम सुमन के साथ वैध विवाह साबित नहीं कर सकी।

इस मामले से यह बात सामने आती है कि केवल धार्मिक संस्था से मिला विवाह प्रमाणपत्र हर परिस्थिति में पर्याप्त नहीं होता। अंतरधार्मिक विवाह करने वाले जोड़ों को संबंधित कानून की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। विवाह का सरकारी पंजीकरण भी कराना चाहिए। भविष्य में वैवाहिक अधिकारों भरण-पोषण विरासत और अन्य कानूनी दावों के लिए यही दस्तावेज सबसे महत्वपूर्ण प्रमाण बन सकते हैं।

FAQ

  1. हाईकोर्ट ने महिला की भरण-पोषण याचिका क्यों खारिज की?
    हाईकोर्ट ने कहा कि महिला घनश्याम सुमन के साथ वैध विवाह साबित नहीं कर सकी। इसलिए उसे कानूनी पत्नी मानकर भरण-पोषण नहीं दिया जा सकता।
  2. क्या आर्य समाज का विवाह प्रमाणपत्र शादी साबित करने के लिए पर्याप्त है?
    कोर्ट के अनुसार केवल आर्य समाज का विवाह प्रमाणपत्र और शुद्धि प्रमाणपत्र पर्याप्त नहीं है। विवाह की वैधता दूसरे कानूनी दस्तावेजों और साक्ष्यों से भी साबित करनी होती है।
  3. महिला ने कितने रुपए भरण-पोषण की मांग की थी?
    महिला ने इलाज और जीवनयापन के लिए हर महीने 30 हजार रुपए भरण-पोषण की मांग की थी।

यह खबरें भी पढ़े...

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में नया रोस्टर लागू , बित मामलों के निपटारे पर जोर

मनेंद्रगढ़ में CMO और लेखापाल रंगे हाथों गिरफ्तार, 53 हजार की डील में फंसे अफसर!

जिम ट्रेनर के प्यार में पड़ी अरबपति की पत्नी, ब्लैकमेल कर ऐंठे पैसे

मनेंद्रगढ़ न्यूज : BJP के पूर्व विधायक श्याम बिहारी ने SDM और तहसीलदार को कहा- अंग्रेजों की औलाद, तू नौकर, जानें क्या है पूरा मामला

Tags:
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
  • मनेंद्रगढ़ न्यूज
  • याचिका
  • फैमिली कोर्ट
  • अंतरधार्मिक विवाह
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग