दुर्ग यूनिवर्सिटी में शुरू होगी कृषि विज्ञान की पढ़ाई, कार्यपरिषद ने दी मंजूरी, जानें सीटों का पूरा गणित
Harrison Masih | Oct 23, 2026, 10:52 IST
दुर्ग यूनिवर्सिटी में सत्र 2027-28 से कृषि विज्ञान की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी
छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नया विकल्प तैयार हो रहा है। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग में अब कृषि विज्ञान की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी है। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने कृषि विज्ञान अध्ययन केंद्र की स्थापना को मंजूरी दे दी है। प्रस्ताव के अनुसार, यहां कृषि विज्ञान से जुड़े पाठ्यक्रम इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के शैक्षणिक सहयोग से संचालित होंगे।
चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम सत्र 2027-28 से शुरू करने की योजना है। इससे कृषि क्षेत्र में पढ़ाई करने के इच्छुक विद्यार्थियों को एक और विकल्प मिल सकेगा।
प्रस्ताव में कृषि विज्ञान प्रमुख विषय वाले चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के लिए 40 सीटें रखी गई हैं। पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप तैयार करने की योजना है।
विद्यार्थियों को पढ़ाई के अलग-अलग चरणों में यूजी सर्टिफिकेट, यूजी डिप्लोमा, बीएससी और बीएससी ऑनर्स या ऑनर्स विद रिसर्च की उपाधि पाने का विकल्प मिलेगा। इसके लिए क्रमशः 44, 84, 120 और 160 क्रेडिट का प्रावधान बताया गया है।
इस व्यवस्था से विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई के चरण और आगे की शैक्षणिक योजना के अनुसार विकल्प मिल सकेंगे।
प्रस्ताव में कृषि विज्ञान के लिए 60 सीटें और आनुवंशिकी एवं प्लांट ब्रीडिंग के लिए 30 सीटें भी निर्धारित की गई हैं। इन विषयों में माइनर पाठ्यक्रम और ऑनर्स से जुड़े विकल्प भी रखे गए हैं।
हालांकि, ये सीटें अलग-अलग विषयों और पाठ्यक्रमों के लिए प्रस्तावित हैं। इसलिए इन्हें चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम की 40 सीटों से अलग समझना जरूरी है।
नई व्यवस्था में विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने की योजना नहीं है। प्रस्ताव में मधुमक्खी पालन, बीज उत्पादन तकनीक और टैक्सोनॉमी जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम शामिल हैं।
प्रत्येक व्यावसायिक विषय के लिए 12 क्रेडिट का प्रावधान है। इसके अलावा सात कौशल संवर्धन पाठ्यक्रम, तीन बहुविषयक पाठ्यक्रम और चार ग्रीष्मकालीन व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी प्रस्तावित हैं।
इन पाठ्यक्रमों के जरिए विद्यार्थियों को कृषि क्षेत्र की व्यावहारिक जानकारी देने का लक्ष्य है। इससे उन्हें कृषि आधारित काम और रोजगार के लिए जरूरी कौशल सीखने में मदद मिल सकती है।
स्नातक कार्यक्रम के अलावा कृषि विज्ञान में स्नातकोत्तर डिप्लोमा शुरू करने का प्रस्ताव भी पारित हुआ है। इसे सत्र 2028-29 से शुरू करने की योजना है। इसके लिए 30 सीटें निर्धारित की गई हैं।
यह पाठ्यक्रम 40 क्रेडिट का होगा। इससे कृषि विज्ञान में आगे पढ़ाई करने के इच्छुक विद्यार्थियों को अतिरिक्त विकल्प मिल सकेगा।
कृषि विज्ञान अध्ययन केंद्र की स्थापना पर कुल 1 करोड़ 20 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है। प्रस्ताव के अनुसार, पहले चरण में 63 लाख रुपए और दूसरे चरण में 57 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे।
केंद्र का वार्षिक आवर्ती खर्च पहले साल 49.4 लाख रुपए अनुमानित है। पूरी क्षमता से संचालन होने पर यह खर्च बढ़कर 88.4 लाख रुपए सालाना हो सकता है।
सभी सीटों पर प्रवेश होने की स्थिति में वार्षिक शुल्क आय 54.4 लाख रुपए आंकी गई है। ये आंकड़े प्रस्ताव में दिए गए अनुमान हैं।
हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजय तिवारी के मुताबिक, सभी पाठ्यक्रम इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के सहयोग से संचालित होंगे। कार्यपरिषद ने अध्ययन केंद्र की स्थापना को मंजूरी दे दी है।
कुलपति के अनुसार, विश्वविद्यालय इसके संचालन के लिए रोडमैप तैयार कर रहा है। अब पाठ्यक्रम शुरू करने की आगे की प्रक्रिया और तैयारियां महत्वपूर्ण होंगी।
विश्वविद्यालय अब कृषि विज्ञान अध्ययन केंद्र के संचालन का रोडमैप तैयार करेगा। इसके बाद पाठ्यक्रम, प्रवेश पात्रता और आवेदन प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी सामने आ सकती है। विद्यार्थियों को प्रवेश संबंधी आधिकारिक सूचना का इंतजार करना चाहिए।
चार वर्षीय कोर्स में 40 सीटें, कई डिग्री का विकल्प
विद्यार्थियों को पढ़ाई के अलग-अलग चरणों में यूजी सर्टिफिकेट, यूजी डिप्लोमा, बीएससी और बीएससी ऑनर्स या ऑनर्स विद रिसर्च की उपाधि पाने का विकल्प मिलेगा। इसके लिए क्रमशः 44, 84, 120 और 160 क्रेडिट का प्रावधान बताया गया है।
इस व्यवस्था से विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई के चरण और आगे की शैक्षणिक योजना के अनुसार विकल्प मिल सकेंगे।
कृषि विज्ञान और प्लांट ब्रीडिंग में भी पढ़ाई का मौका
हालांकि, ये सीटें अलग-अलग विषयों और पाठ्यक्रमों के लिए प्रस्तावित हैं। इसलिए इन्हें चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम की 40 सीटों से अलग समझना जरूरी है।
मधुमक्खी पालन से बीज उत्पादन तक सीखेंगे विद्यार्थी
प्रत्येक व्यावसायिक विषय के लिए 12 क्रेडिट का प्रावधान है। इसके अलावा सात कौशल संवर्धन पाठ्यक्रम, तीन बहुविषयक पाठ्यक्रम और चार ग्रीष्मकालीन व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी प्रस्तावित हैं।
इन पाठ्यक्रमों के जरिए विद्यार्थियों को कृषि क्षेत्र की व्यावहारिक जानकारी देने का लक्ष्य है। इससे उन्हें कृषि आधारित काम और रोजगार के लिए जरूरी कौशल सीखने में मदद मिल सकती है।
2028-29 से स्नातकोत्तर डिप्लोमा की तैयारी
यह पाठ्यक्रम 40 क्रेडिट का होगा। इससे कृषि विज्ञान में आगे पढ़ाई करने के इच्छुक विद्यार्थियों को अतिरिक्त विकल्प मिल सकेगा।
अध्ययन केंद्र पर 1 करोड़ 20 लाख रुपए होंगे खर्च
केंद्र का वार्षिक आवर्ती खर्च पहले साल 49.4 लाख रुपए अनुमानित है। पूरी क्षमता से संचालन होने पर यह खर्च बढ़कर 88.4 लाख रुपए सालाना हो सकता है।
सभी सीटों पर प्रवेश होने की स्थिति में वार्षिक शुल्क आय 54.4 लाख रुपए आंकी गई है। ये आंकड़े प्रस्ताव में दिए गए अनुमान हैं।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से चलेंगे कोर्स
कुलपति के अनुसार, विश्वविद्यालय इसके संचालन के लिए रोडमैप तैयार कर रहा है। अब पाठ्यक्रम शुरू करने की आगे की प्रक्रिया और तैयारियां महत्वपूर्ण होंगी।
आगे क्या?
- हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में
कृषि विज्ञान की पढ़ाई कब शुरू होगी?
चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम सत्र 2027-28 से शुरू करने की योजना है। दुर्ग यूनिवर्सिटी में कृषि विज्ञान की कितनी सीटें होंगी?
प्रस्ताव में कृषि विज्ञान प्रमुख विषय वाले चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के लिए 40 सीटें रखी गई हैं। कृषि विज्ञान के अलग पाठ्यक्रम के लिए 60 सीटें भी प्रस्तावित हैं।दुर्ग यूनिवर्सिटी कृषि विज्ञान कोर्स में एडमिशन कैसे मिलेगा?
प्रवेश प्रक्रिया, पात्रता, आवेदन की तारीख और चयन के नियमों की आधिकारिक घोषणा अभी प्रतीक्षित है। विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की आधिकारिक सूचना पर नजर रखनी चाहिए।
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