हाईकोर्ट ने रेप पीड़िता को दी गर्भपात की अनुमति, DNA सुरक्षित रखने का आदेश
Harrison Masih | May 22, 2026, 18:45 IST
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रेप के बाद गर्भवती हुई 21 वर्षीय युवती को गर्भपात की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने कहा कि रेप पीड़िता को अपनी प्रेग्नेंसी को लेकर फैसला लेने का पूरा अधिकार है। मामले में भ्रूण का DNA सैंपल सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रेप के बाद गर्भवती हुई एक 21 वर्षीय युवती को बड़ा राहत देते हुए गर्भपात की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा कि रेप पीड़िता को यह तय करने का पूरा अधिकार है कि वह गर्भ जारी रखना चाहती है या नहीं। साथ ही अदालत ने भ्रूण का DNA सैंपल सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि भविष्य में केस की जांच और ट्रायल में उसका उपयोग किया जा सके।
मामले की सुनवाई जस्टिस एनके व्यास की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने युवती को तत्काल अस्पताल में भर्ती कर मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) की प्रक्रिया पूरी कराने के आदेश दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक बिलासपुर की रहने वाली 21 वर्षीय युवती ने अपने प्रेमी के खिलाफ रेप का केस दर्ज कराया था। युवती का आरोप है कि आरोपी युवक ने शादी का झांसा देकर उससे शारीरिक संबंध बनाए। बाद में जब युवती गर्भवती हो गई तो युवक शादी से मुकर गया।
पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि आरोपी ने उसकी इच्छा के विरुद्ध संबंध बनाए और शादी का भरोसा देकर उसका शोषण किया। अब वह इस गर्भ को नहीं रखना चाहती, क्योंकि इससे उसे मानसिक, सामाजिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
युवती ने अपनी याचिका में कहा कि वह उस व्यक्ति के बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती जिसने उसके साथ दुष्कर्म किया। उसने अदालत को बताया कि इस घटना के बाद उसे समाज में शर्मिंदगी और अपमान महसूस हो रहा है। कानूनी रूप से गर्भपात कराने के लिए युवती ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 19 मई को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) बिलासपुर को मेडिकल बोर्ड गठित कर युवती की जांच कराने के निर्देश दिए थे।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि युवती करीब 16 से 20 सप्ताह यानी लगभग 4 से 5 महीने की गर्भवती है।
मेडिकल रिपोर्ट और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने युवती की याचिका मंजूर कर ली। कोर्ट ने आदेश दिया कि पीड़िता को तत्काल सिम्स या जिला अस्पताल बिलासपुर में भर्ती कराया जाए।
इसके बाद विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम युवती और उसके परिजनों की सहमति से मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी की प्रक्रिया पूरी करेगी।
हाईकोर्ट (CG High Court) ने अपने आदेश में यह भी कहा कि भ्रूण का DNA सैंपल सुरक्षित रखा जाए, ताकि आगे पुलिस जांच और अदालत में ट्रायल के दौरान इसका इस्तेमाल किया जा सके।
कोर्ट का मानना है कि यह साक्ष्य मामले की सुनवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
पीड़िता की शिकायत पर बिलासपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में आरोपी युवक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। फिलहाल आरोपी के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि रेप पीड़िता को अपनी प्रेग्नेंसी को लेकर फैसला लेने की स्वतंत्रता और अधिकार मिलना चाहिए। अदालत ने माना कि बिना न्यायिक आदेश के डॉक्टर गर्भपात नहीं कर सकते थे, इसलिए मामले की गंभीरता और परिस्थितियों को देखते हुए याचिका स्वीकार की गई।
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मामले की सुनवाई जस्टिस एनके व्यास की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने युवती को तत्काल अस्पताल में भर्ती कर मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) की प्रक्रिया पूरी कराने के आदेश दिए हैं।
शादी का वादा कर बनाए संबंध, फिर मुकरा आरोपी
पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि आरोपी ने उसकी इच्छा के विरुद्ध संबंध बनाए और शादी का भरोसा देकर उसका शोषण किया। अब वह इस गर्भ को नहीं रखना चाहती, क्योंकि इससे उसे मानसिक, सामाजिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
समाज में अपमान और मानसिक पीड़ा की बात कही
मेडिकल रिपोर्ट में 16 से 20 सप्ताह की प्रेग्नेंसी
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि युवती करीब 16 से 20 सप्ताह यानी लगभग 4 से 5 महीने की गर्भवती है।
हाईकोर्ट ने दिए अस्पताल में भर्ती के निर्देश
इसके बाद विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम युवती और उसके परिजनों की सहमति से मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी की प्रक्रिया पूरी करेगी।
DNA सैंपल सुरक्षित रखने के निर्देश
कोर्ट का मानना है कि यह साक्ष्य मामले की सुनवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
आरोपी गिरफ्तार, मामला लंबित
हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
FAQ
- क्या रेप पीड़िता अबॉर्शन करा सकती है?
कुछ मामलों में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) कानून के तहत डॉक्टरों की अनुमति से गर्भपात कराया जा सकता है, लेकिन गर्भ ज्यादा समय का होने या संवेदनशील मामलों में कोर्ट की अनुमति जरूरी हो सकती है। - मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट क्या है?
मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट (MTP) भारत का कानून है, जो तय परिस्थितियों में कानूनी रूप से गर्भपात की अनुमति देता है। यह कानून महिला के स्वास्थ्य, रेप, भ्रूण में गंभीर विकार या अन्य विशेष परिस्थितियों में डॉक्टरों की सलाह पर सुरक्षित गर्भपात की प्रक्रिया को मान्यता देता है। - कितने सप्ताह तक कानूनी रूप से अबॉर्शन कराया जा सकता है?
भारत में MTP एक्ट के तहत सामान्य परिस्थितियों में 20 सप्ताह तक गर्भपात की अनुमति है। हालांकि रेप पीड़िता, नाबालिग या विशेष मामलों में मेडिकल बोर्ड और कोर्ट की अनुमति से 24 सप्ताह या उससे अधिक समय में भी गर्भपात कराया जा सकता है।
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