छत्तीसगढ़ में बाघों का शिकार : ऑन-डिमांड शिकार का बड़ा नेटवर्क उजागर

Aishwarya Dwivedi | Jul 10, 2026, 09:18 IST
इंद्रावती में बाघ के शिकार का मामला सामने आया
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में 'ऑन-डिमांड' बाघों के शिकार का बड़ा रैकेट उजागर हुआ है। महाराष्ट्र पुलिस का एक हेड कांस्टेबल दो साल से शिकारियों के संपर्क में था। लापरवाही बरतने के आरोप में तीन वन कर्मचारियों को निलंबित किया गया है।

समझें क्या है पूरा मामला

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में मांग पर बाघों के शिकार का नेटवर्क सामने आया है। महाराष्ट्र इंटेलीजेंस के एक हेड कांस्टेबल पर शिकारी गैंग चलाने का आरोप है, जो दो साल से शिकारियों के संपर्क में था। एक महीने पहले उसने मांग भेजी थी, जिसके बाद शिकारियों ने तीन बाघ मार डाले। जांच में यह भी सामने आया कि टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने शुरुआती अलर्ट को गंभीरता से नहीं लिया। मामले में तीन कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है।



कैसे शुरू हुआ यह खुलासा

जांच में सामने आया कि यह गैंग मार्च से अप्रैल 2026 के बीच सक्रिय हुई। नक्सल प्रभाव घटने के बाद यह इलाका शिकार करने वालों के लिए महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की सीमा पर एक आसान ठिकाना बन गया।



तीन आदिवासी सगे भाई, जो करीब दो दशकों से महाराष्ट्र के लिए नक्सल गतिविधियों की मुखबिरी करते थे, इस नेटवर्क से जुड़े मिले। इनमें से एक हेड कांस्टेबल पूर्व में छत्तीसगढ़ के गांव की सीमा में इंद्रावती टाइगर रिजर्व के नजदीक तैनात नक्सल विरोधी टीम के साथ रहा था।



इसी तैनाती के दौरान उसकी पहचान अपने ही गांव के मासा भज्जी और उनके बेटों संतोष व तुलसी से हुई। बाद में उसका तबादला महाराष्ट्र के गढ़चिरौली क्षेत्र के गांव येचली में हो गया।



शिकारियों के संपर्क में दो साल से हेड कांस्टेबल

जांच में सामने आया कि यह हेड कांस्टेबल करीब दो साल से शिकारियों के संपर्क में था। इस दौरान उसने वन्यजीवों को शिकार की ओर मोड़ने के लिए कई मुलाकातें कीं। उसने खुद स्वीकार किया कि मोटा माल यानी वन्यजीव का अंग और खाल मिलने का लालच दिया गया था। एक महीने पहले उसने डिमांड भेजी थी, जिसके बाद तीन बाघों का अलग-अलग तरीकों से शिकार किया गया। शिकार के बाद खाल उतारकर गैंग ने इसे कई तस्करों के संपर्क में भेजा। बाघ की खाल की मांग होते ही एक शिकारी ने खुद इसे भाई को भेजने की बात कही थी।



साहब बोले थे, बिकवा दूंगा

गोपनीय सूचना के आधार पर 30 जून की रात बांदे नामक इलाके से तस्करों को गिरफ्तार करने की कार्रवाई हुई। इस दौरान एक शिकारी ने बताया कि साहब ने उससे कहा था कि कोई भी बता दूंगा। उसने यह भी कहा कि इसके बाद हमने शिकार किया और साहब हमारे गांव भी आए थे। इस बयान से पूरे नेटवर्क की परतें खुलती नजर आईं।



टाइगर रिजर्व में इंटेलीजेंस की बड़ी चूक

पड़ताल में सामने आया कि एनटीसीए और डब्ल्यूसीएसबी (National Tiger Conservation Authority and Wildlife Crime Control Bureau) ने पहले ही अलर्ट जारी किया था, लेकिन इंद्रावती टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने इसे हल्के में लिया।



टाइगर रिजर्व में कोई ऑपरेशन नहीं चलाया गया। रेंजर, डिप्टी रेंजर फील्ड पर ही नहीं उतरे। उल्टा इंद्रावती का पैदल गार्ड कुंदन मंडावी शिकारी गैंग के साथ मिल गया था। जबकि नक्सल खात्मे के बाद पहली बार इंद्रावती टाइगर रिजर्व सक्रिय हुआ था। कैमरे में 12 बाघों के होने की पुष्टि भी हुई थी।



सूचना को गंभीरता से नहीं लिया गया

जांच में सामने आया कि सीआरपीएफ इंस्पेक्टर, डिप्टी रेंजर और पुलिसकर्मी भी इस मामले में शामिल पाए गए हैं। पुरानी घटनाओं पर नजर डालें तो 2019 में एनटीसीए रिपोर्ट में उदंती-सीतानदी में कुछ सीआरपीएएफ जवानों की वन्यजीव शिकार गतिविधियों का उल्लेख मिलता है। 2019 में ही कांकेर के चामरा क्षेत्र में टाइगर स्किन के साथ एक पुलिसकर्मी पकड़ा गया था।



2021 में दोरातेड़ा में बाघ शिकार और तस्करी के मामले में 14 गिरफ्तारी हुई थी, जिनमें एक एसआई और पांच आरक्षक भी शामिल थे। 2026 में बस्तर व भानुप्रतापपुर में तेंदुए के शिकार मामले में डिप्टी रेंजर समेत 10 आरोपी गिरफ्तार हुए। जून 2026 में भानुप्रतापपुर वनमंडल में दो महाराष्ट्र पुलिसकर्मी गिरफ्तार हुए। जून-जुलाई 2026 में महाराष्ट्र पुलिस का हेड कांस्टेबल, होमगार्ड जवान और वन विभाग से जुड़े लोग गिरफ्तार हुए हैं।



छत्तीसगढ़ में बाघों का शिकार


मामले में तीन अफसर सस्पेंड

तीन बाघों के शिकार और तस्करी के मामले में पीसीसीएफ अरुण पांडेय के निर्देश पर पहली कार्रवाई हुई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर रेंजर कमल सिंह कश्यप, डिप्टी रेंजर नरहरि सिंह बघेल और फॉरेस्ट गार्ड विश्वनाथ मांडी को सस्पेंड किया गया है। जानकारी के मुताबिक मांडी को पूरे घटनाक्रम की जानकारी थी। बहुत जल्द इंद्रावती के बड़े अफसरों को भी इस मामले से हटाया जा सकता है।



सबसे बड़ा सवाल, नेटवर्क तक जांच क्यों नहीं पहुंचती

लगातार बाघों की खाल बरामद हो रही है, शिकारी और बिचौलिए पकड़े जा रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद पीछे सक्रिय बड़े अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क तक जांच शायद ही पहुंच पाती है। जांच अक्सर शिकारियों और स्थानीय बिचौलियों तक सीमित रह जाती है। वन विभाग के कुछ अधिकारी भी पहली बार दबी जुबान में यह स्वीकार करते हैं कि कई मामलों में डिमांड आधारित शिकार की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।



जांच में कहां हो रही चूक

बीते कुछ सालों में छत्तीसगढ़ में लगातार बाघों का शिकार हो रहा है। खाल सबूत मिलने के बावजूद कानून का डर जरूरी है। एक और बात अभी तक किसी भी कार्रवाई में कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है। संभव है कि इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क हो न हो, यह इन्वेस्टिगेशन में कहां चूक हो रही है, यह समझना जरूरी है। बिल्कुल, बाघों की खाल का बिजनेस ऑन डिमांड होने के प्रमाण हैं। यह बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि पुलिसवाले भी इसमें शामिल पाए जा रहे हैं।



30 लाख के लालच में फंसा गैंडम

राज्य वन विभाग को इंटेलीजेंस के बाघ की खाल की सूचना मिली थी। जाल फैलाकर मोटी रकम यानी करीब 30 लाख से ज्यादा के झांसे में गैंडम को फंसाया गया। उसे और उसके साथी महाराष्ट्र के जवान बाबूराव मंडावी को बाद में गिरफ्तार किया गया। गैंडम पूर्व नक्सल ऑपरेशन फोर्स का हिस्सा था। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में दो राज्यों की करीब 100 किमी की सीमा लगती है। वहां पर खासा ध्यान देने की जरूरत है। वन विभाग के साथ समन्वय बढ़ाने और पेट्रोलिंग बढ़ाने की जरूरत बताई जा रही है। यह बहुत दुर्भाग्य की बात है कि पुलिसवाले भी इसमें शामिल हैं।



20 साल में 29 बाघ मारे जा चुके

आंकड़ों के मुताबिक बीते 20 साल में छत्तीसगढ़ में 29 बाघ मारे जा चुके हैं। 2014 की रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में 46 बाघ थे, जो 2022 तक घटकर 17 रह गए। इसकी सबसे बड़ी वजह शिकार बताई जा रही है। 2006 से 2026 के बीच 29 बाघों की खाल बरामद हुई है। यह आंकड़ा राज्य में बाघ संरक्षण की चुनौती को साफ दिखाता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस पूरे नेटवर्क की जड़ें कहां तक फैली हैं और आगे किन-किन बड़े नामों पर कार्रवाई होती है।



FAQ

  1. इंद्रावती टाइगर रिजर्व में क्या खुलासा हुआ है?
    उत्तर: यहां मांग पर बाघों के शिकार का संगठित नेटवर्क सामने आया है। महाराष्ट्र इंटेलीजेंस के एक हेड कांस्टेबल पर शिकारी गैंग चलाने का आरोप है।
  2. इंद्रावती टाइगर रिजर्व में कितने बाघ मारे गए हैं?
    उत्तर: जांच में सामने आया कि एक महीने के भीतर तीन बाघ मारे गए। बीते 20 साल में छत्तीसगढ़ में कुल 29 बाघ मारे जा चुके हैं।

यह खबरें भी पढ़ें...

सरिस्का से गूँजी बाघ संरक्षण की नई हुंकार: भूपेंद्र यादव ने किया राष्ट्रीय सम्मेलन का आगाज



बाघ संरक्षण में कान्हा नेशनल पार्क बना देश का नंबर वन टाइगर रिजर्व



महाकुंभ में बाघ संरक्षण पर चर्चा, पेंच के वन्यजीव अधिकारी डॉ. मिश्रा गंगा पुरस्कार से सम्मानित



पूर्व राष्ट्रपति ने पी थी 50 हजार की चाय, RTI से खुलासा, रामनाथ कोविंद की चाय के लिए बाघ संरक्षण कोष से लिया था लिया खर्च



Tags:
  • छत्तीसगढ़
  • वन विभाग
  • टाइगर रिजर्व
  • बाघ
  • बिजनेस