जशपुर रेप केस : मूक-बधिर पीड़िता की मौत, मजिस्ट्रियल जांच के आदेश
Aishwarya Dwivedi | Jun 02, 2026, 22:21 IST
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जशपुर में डॉक्टरों और सखी सेंटर की घोर लापरवाही से मूक-बधिर दुष्कर्म पीड़िता की मौत हो गई। पोस्टमार्टम में आंतरिक अंग से सेफ्टी पिन मिलने के बाद कलेक्टर ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं।
छत्तीसगढ़ के जशपुर (कुनकुरी) में एक मूक-बधिर दुष्कर्म पीड़िता की मौत ने सिस्टम और डॉक्टरों की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहशी दरिंदे की हैवानियत का शिकार हुई इस बेबस बच्ची को अंततः सिस्टम की घोर लापरवाही के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पीड़िता के गुप्तांग से सेफ्टी पिन मिलने के बाद प्रशासनिक और स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। संक्रमण (इंफेक्शन) के फैलने को ही मौत की मुख्य वजह माना जा रहा है।
यह दर्दनाक मामला 3 अप्रैल का है, जब कुनकुरी इलाके में मूक-बधिर बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, लेकिन पीड़िता के परिजनों का पता न चलने पर उसे जशपुर स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर भेज दिया गया। यहीं से डॉक्टरों और महिला बाल विकास विभाग की घोर लापरवाही का सिलसिला शुरू हुआ।
स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी : कुनकुरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों ने पीड़िता के मूक-बधिर होने के बावजूद उसका गहन चिकित्सकीय परीक्षण नहीं किया। खानापूर्ति वाली जांच कर पल्ला झाड़ लिया गया। यदि शुरुआत में ही सही ढंग से मेडिकल टेस्ट होता, तो आंतरिक अंगों में फंसी वस्तु को निकालकर उसकी जान बचाई जा सकती थी।
सखी सेंटर की मनमानी : नियमों के मुताबिक सखी सेंटर में किसी पीड़िता को अधिकतम 5 दिन और कलेक्टर की विशेष अनुमति से 15 दिन ही रखा जा सकता है। इसके बाद कोर्ट या चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की अनुमति अनिवार्य है। लेकिन यहां नियमों को ताक पर रखकर बिना किसी इजाजत के पीड़िता को महीने भर से ज्यादा वक्त तक रखा गया।
19 मई को जब पीड़िता के पेट में असहनीय दर्द हुआ, तब उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मौत के बाद डॉक्टरों ने मामले को दबाने की कोशिश की, लेकिन जब विसरा जांच के लिए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया, तब मामला उजागर हुआ। पोस्टमार्टम में पीड़िता के आंतरिक अंगों से सेफ्टी पिन बरामद हुई, जिससे गंभीर इंफेक्शन फैल चुका था। हालांकि, एसएसपी लाल उमेद सिंह के अनुसार डॉक्टरों से चर्चा में केवल सेफ्टी पिन मिलने की पुष्टि हुई है, बोतल के कार्क जैसी कोई बात सामने नहीं आई है।
VVIP जिला होने के बावजूद इस तरह की अमानवीय लापरवाही पर अब चौतरफा सवाल उठ रहे हैं। मामले की गंभीरता और मीडिया में खबरें आने के बाद जिला प्रशासन ने इस पूरे घटनाक्रम की दंडाधिकारी (मजिस्ट्रियल) जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी डॉक्टरों और सखी सेंटर के प्रबंधन पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जशपुर की यह घटना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है, जहाँ रक्षक ही भक्षक साबित हुए। यदि डॉक्टरों और सखी सेंटर ने समय रहते अपनी जिम्मेदारी निभाई होती, तो इस मूक-बधिर बच्ची की जान बचाई जा सकती थी। अब निष्पक्ष मजिस्ट्रियल जांच और दोषियों को सख्त सजा से ही पीड़िता को सच्चा न्याय मिल सकेगा।
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लापरवाही का पूरा घटनाक्रम
स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी : कुनकुरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों ने पीड़िता के मूक-बधिर होने के बावजूद उसका गहन चिकित्सकीय परीक्षण नहीं किया। खानापूर्ति वाली जांच कर पल्ला झाड़ लिया गया। यदि शुरुआत में ही सही ढंग से मेडिकल टेस्ट होता, तो आंतरिक अंगों में फंसी वस्तु को निकालकर उसकी जान बचाई जा सकती थी।
सखी सेंटर की मनमानी : नियमों के मुताबिक सखी सेंटर में किसी पीड़िता को अधिकतम 5 दिन और कलेक्टर की विशेष अनुमति से 15 दिन ही रखा जा सकता है। इसके बाद कोर्ट या चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की अनुमति अनिवार्य है। लेकिन यहां नियमों को ताक पर रखकर बिना किसी इजाजत के पीड़िता को महीने भर से ज्यादा वक्त तक रखा गया।
पोस्टमार्टम में बड़ा खुलासा
मजिस्ट्रियल जांच के आदेश
TIMELINE
- 3 अप्रैल 2026 (दुष्कर्म): कुनकुरी में मूक-बधिर बच्ची से दुष्कर्म। आरोपी गिरफ्तार; पीड़िता को 'सखी वन स्टॉप सेंटर' भेजा गया।
- अप्रैल (लापरवाही): कुनकुरी अस्पताल के डॉक्टरों ने सामान्य जांच कर खानापूर्ति की, आंतरिक अंगों की गहन जांच नहीं की।
- अप्रैल - मई (अवैध ठहराव): नियमों को ताक पर रखकर सखी सेंटर में पीड़िता को बिना अनुमति एक महीने से अधिक रखा गया।
- 19 मई 2026 (मौत): पेट दर्द के बाद जिला अस्पताल में इलाज के दौरान पीड़िता की मौत।
- पोस्टमार्टम (खुलासा): आंतरिक अंग से सेफ्टी पिन बरामद; गंभीर इंफेक्शन ही मौत की मुख्य वजह।
- वर्तमान (कार्रवाई): मीडिया में मामला आने के बाद जिला प्रशासन द्वारा मजिस्ट्रियल (दंडाधिकारी) जांच के आदेश जारी।
निष्कर्ष
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