छत्तीसगढ़ के शहरों में चांद निकलने का समय
Karwa Chauth 2026: जानिए आपके शहर में कितनी बजे निकलेगा चांद, व्रत खोलने से पहले जानें जरूरी बातें
Harrison Masih | Oct 29, 2026, 10:14 IST
छत्तीसगढ़ में करवा चौथ पर कब निकलेगा चांद
करवा चौथ का दिन महिलाओं के लिए खास होता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, परिवार की खुशहाली और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। सुबह सरगी खाने के बाद शुरू होने वाला यह व्रत रात में चांद देखने और पूजा करने के बाद पूरा होता है। ऐसे में महिलाओं को सबसे ज्यादा इंतजार चंद्रोदय का रहता है।
इस बार छत्तीसगढ़ में अलग-अलग शहरों में चांद निकलने के समय में कुछ मिनटों का अंतर रहने का अनुमान है। रायपुर में रात 8:18 बजे चांद निकलने की उम्मीद है। हालांकि, मौसम में बदलाव और बादलों के कारण चांद के दर्शन में देरी हो सकती है।
करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन करने के बाद ही व्रत खोलने की परंपरा है। इसलिए महिलाएं अपने शहर में चांद निकलने के समय का इंतजार करती हैं। अनुमानित समय के अनुसार, छत्तीसगढ़ में सबसे पहले बलरामपुर में रात 8:02 बजे चांद दिखाई देने की उम्मीद है।
इसके बाद अंबिकापुर में रात 8:03 बजे और कोरबा में रात 8:06 बजे चंद्रमा के दर्शन हो सकते हैं। राजधानी रायपुर में रात 8:18 बजे चांद निकलने का अनुमान है। वहीं, जगदलपुर में रात 8:17 बजे से 8:22 बजे के बीच चंद्रमा दिखाई दे सकता है।
![छत्तीसगढ़ के शहरों में चांद निकलने का समय]()
यह समय अनुमानित है। आसमान में बादल होने या स्थानीय मौसम की स्थिति के कारण चांद दिखाई देने में देरी हो सकती है।
इस बार चक्रवात अर्नब के असर से प्रदेश के कुछ हिस्सों में बादल छाए रहने की आशंका है। ऐसे में चांद निकलने के बाद भी उसके दर्शन तुरंत नहीं हो सकते। चंद्रमा क्षितिज से ऊपर आ जाने के बावजूद बादलों के पीछे छिपा रह सकता है।
इसके अलावा ऊंची इमारतें, पहाड़ियां और आसपास की भौगोलिक स्थिति भी चांद देखने में परेशानी पैदा कर सकती हैं। इन कारणों से चंद्रमा के दर्शन में 10 से 15 मिनट की देरी हो सकती है।
महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे चंद्रोदय के अनुमानित समय के आसपास आसमान पर नजर रखें। मौसम साफ होने पर चांद दिखाई देने के बाद पूजा की जा सकती है।
ज्योतिषाचार्य रितेश शास्त्री के अनुसार, चतुर्थी तिथि 28 अक्टूबर की रात 1:08 बजे शुरू हुई और 29 अक्टूबर की रात 10:11 बजे तक रहेगी।
करवा चौथ पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और घर में सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इस दिन पूजा-पाठ के साथ परिवार की खुशहाली और दांपत्य जीवन में प्रेम बनाए रखने की प्रार्थना भी की जाती है।
करवा चौथ की शुरुआत सुबह सूर्योदय से पहले सरगी खाने से होती है। परंपरा के अनुसार, सास अपनी बहू को सरगी देती हैं। इसमें फल, मिठाई, मेवे और फेनी जैसी चीजें शामिल होती हैं।
महिलाएं सुबह सरगी खाने के बाद व्रत शुरू करती हैं। इसके बाद दिनभर बिना भोजन और पानी के रहती हैं। इसे निर्जला व्रत कहा जाता है।
सरगी में पौष्टिक चीजें शामिल करना जरूरी माना जाता है, क्योंकि लंबे समय तक बिना पानी और भोजन के रहने से कमजोरी महसूस हो सकती है। इसलिए व्रत शुरू करने से पहले पर्याप्त पानी पीना और संतुलित भोजन करना फायदेमंद होता है।
करवा चौथ पर शाम के समय भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा चौथ माता की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान मिठाई, पूरी-सब्जी और अन्य पकवानों का भोग लगाया जाता है। महिलाएं इस दौरान करवा चौथ की कथा भी सुनती हैं।
पूजा में करवे का विशेष महत्व होता है। करवे में पानी भरकर रखा जाता है। परंपरा के अनुसार, इसमें साबुत चावल, सिक्का और फूल भी रखे जाते हैं। पूजा में रोली का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, पूजा की सामग्री अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराओं के अनुसार बदल सकती है।
रात में चांद निकलने के बाद महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं। इसके बाद छलनी से पहले चांद और फिर अपने पति का चेहरा देखने की परंपरा है। पूजा पूरी करने के बाद पति के हाथों पानी पीकर व्रत खोला जाता है।
कई बार मौसम खराब होने या बादल छाए रहने के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देता। ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए, इसे लेकर महिलाओं के मन में सवाल रहता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज शुक्ला के अनुसार, अगर करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन नहीं हो पा रहे हैं, तो महिलाएं भगवान शिव और गणेशजी के मंदिर जाकर मानसिक रूप से चंद्रमा के दर्शन कर सकती हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव की जटाओं में चंद्रदेव विराजमान हैं। इसलिए ऐसी स्थिति में भगवान शिव की पूजा करने का सुझाव दिया जाता है। चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बाद व्रत का पारण करने की परंपरा है।
ज्योतिषाचार्य रितेश शास्त्री के अनुसार, इस बार ग्रहों की स्थिति से शुक्रादित्य और बुधादित्य योग बन रहे हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं में इन योगों को शुभ माना जाता है।
शुक्र को प्रेम, वैवाहिक जीवन और दांपत्य सुख से जोड़कर देखा जाता है। वहीं, सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग बनने की मान्यता है। इन योगों के महत्व को ध्यान में रखते हुए महिलाएं पूजा-अर्चना कर पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।
हालांकि, ये ज्योतिषीय मान्यताएं हैं। इनका उल्लेख धार्मिक परंपराओं और ज्योतिष के संदर्भ में किया जाता है।
करवा चौथ पर लंबे समय तक बिना भोजन और पानी के रहने से कुछ महिलाओं को कमजोरी, थकान या चक्कर आने की समस्या हो सकती है। इसलिए व्रत से पहले खानपान का ध्यान रखना जरूरी है।
सरगी में फल, मेवे और अन्य पौष्टिक चीजें शामिल की जा सकती हैं। व्रत शुरू करने से पहले पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है। जिन महिलाओं को कोई बीमारी है या जो नियमित रूप से दवाएं लेती हैं, उन्हें निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
व्रत खोलते समय भी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। पहले धीरे-धीरे पानी पीना और फिर हल्का भोजन करना बेहतर रहता है।
इस तरह करवा चौथ पर पूजा, सरगी, मेहंदी और चंद्र दर्शन का विशेष महत्व है। छत्तीसगढ़ में महिलाएं अपने शहर के अनुमानित चंद्रोदय समय के अनुसार पूजा की तैयारी कर सकती हैं। हालांकि, बादलों और स्थानीय मौसम के कारण चांद दिखाई देने का वास्तविक समय अलग हो सकता है। इसलिए Moonrise Timing पर नजर रखने के साथ मौसम की स्थिति का ध्यान रखना भी जरूरी है।
छत्तीसगढ़ में कहां कितने बजे दिखेगा चांद?
इसके बाद अंबिकापुर में रात 8:03 बजे और कोरबा में रात 8:06 बजे चंद्रमा के दर्शन हो सकते हैं। राजधानी रायपुर में रात 8:18 बजे चांद निकलने का अनुमान है। वहीं, जगदलपुर में रात 8:17 बजे से 8:22 बजे के बीच चंद्रमा दिखाई दे सकता है।
यह समय अनुमानित है। आसमान में बादल होने या स्थानीय मौसम की स्थिति के कारण चांद दिखाई देने में देरी हो सकती है।
बादलों के कारण चांद देखने में हो सकती है देरी
इसके अलावा ऊंची इमारतें, पहाड़ियां और आसपास की भौगोलिक स्थिति भी चांद देखने में परेशानी पैदा कर सकती हैं। इन कारणों से चंद्रमा के दर्शन में 10 से 15 मिनट की देरी हो सकती है।
महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे चंद्रोदय के अनुमानित समय के आसपास आसमान पर नजर रखें। मौसम साफ होने पर चांद दिखाई देने के बाद पूजा की जा सकती है।
चतुर्थी तिथि रात 10:11 बजे तक रहेगी
करवा चौथ पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और घर में सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इस दिन पूजा-पाठ के साथ परिवार की खुशहाली और दांपत्य जीवन में प्रेम बनाए रखने की प्रार्थना भी की जाती है।
सुबह सरगी खाकर शुरू होता है व्रत
महिलाएं सुबह सरगी खाने के बाद व्रत शुरू करती हैं। इसके बाद दिनभर बिना भोजन और पानी के रहती हैं। इसे निर्जला व्रत कहा जाता है।
सरगी में पौष्टिक चीजें शामिल करना जरूरी माना जाता है, क्योंकि लंबे समय तक बिना पानी और भोजन के रहने से कमजोरी महसूस हो सकती है। इसलिए व्रत शुरू करने से पहले पर्याप्त पानी पीना और संतुलित भोजन करना फायदेमंद होता है।
शाम को शिव-पार्वती और गणेशजी की पूजा
पूजा में करवे का विशेष महत्व होता है। करवे में पानी भरकर रखा जाता है। परंपरा के अनुसार, इसमें साबुत चावल, सिक्का और फूल भी रखे जाते हैं। पूजा में रोली का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, पूजा की सामग्री अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराओं के अनुसार बदल सकती है।
रात में चांद निकलने के बाद महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं। इसके बाद छलनी से पहले चांद और फिर अपने पति का चेहरा देखने की परंपरा है। पूजा पूरी करने के बाद पति के हाथों पानी पीकर व्रत खोला जाता है।
चांद दिखाई न दे तो क्या करें?
ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज शुक्ला के अनुसार, अगर करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन नहीं हो पा रहे हैं, तो महिलाएं भगवान शिव और गणेशजी के मंदिर जाकर मानसिक रूप से चंद्रमा के दर्शन कर सकती हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव की जटाओं में चंद्रदेव विराजमान हैं। इसलिए ऐसी स्थिति में भगवान शिव की पूजा करने का सुझाव दिया जाता है। चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बाद व्रत का पारण करने की परंपरा है।
शुक्रादित्य और बुधादित्य योग की चर्चा
शुक्र को प्रेम, वैवाहिक जीवन और दांपत्य सुख से जोड़कर देखा जाता है। वहीं, सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग बनने की मान्यता है। इन योगों के महत्व को ध्यान में रखते हुए महिलाएं पूजा-अर्चना कर पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।
हालांकि, ये ज्योतिषीय मान्यताएं हैं। इनका उल्लेख धार्मिक परंपराओं और ज्योतिष के संदर्भ में किया जाता है।
निर्जला व्रत रखने से पहले सेहत का रखें ध्यान
सरगी में फल, मेवे और अन्य पौष्टिक चीजें शामिल की जा सकती हैं। व्रत शुरू करने से पहले पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है। जिन महिलाओं को कोई बीमारी है या जो नियमित रूप से दवाएं लेती हैं, उन्हें निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
व्रत खोलते समय भी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। पहले धीरे-धीरे पानी पीना और फिर हल्का भोजन करना बेहतर रहता है।
इस तरह करवा चौथ पर पूजा, सरगी, मेहंदी और चंद्र दर्शन का विशेष महत्व है। छत्तीसगढ़ में महिलाएं अपने शहर के अनुमानित चंद्रोदय समय के अनुसार पूजा की तैयारी कर सकती हैं। हालांकि, बादलों और स्थानीय मौसम के कारण चांद दिखाई देने का वास्तविक समय अलग हो सकता है। इसलिए Moonrise Timing पर नजर रखने के साथ मौसम की स्थिति का ध्यान रखना भी जरूरी है।
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