कोरबा में हसदेव तट निगल रहे भू-माफिया : नदी के भीतर खंभे ठोककर खड़े कर दिए 6,000 अवैध ठिकाने

Umeshwari Baghel | May 24, 2026, 16:31 IST
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हसदेव नदी तट पर गेरवाघाट, तुलसीनगर, सीतामढ़ी और पंपहाउस क्षेत्रों में 6 हजार से अधिक अवैध मकान बन चुके हैं। हर साल करीब 600 नए मकान तैयार हो रहे हैं।

NEWS IN SHORT

  • हसदेव नदी तट पर फैल रही अवैध बसाहट, मानसून में जान खतरे में
  • गेरवाघाट से सीतामढ़ी तक मकानों का अतिक्रमण लगातार बढ़ा
  • सस्ती जमीन का फायदा उठाकर भू-माफिया कर रहे कब्जा
  • रेत चोरी और कटाव से बस्तियों पर बढ़ा खतरा
  • लेबर सप्लायरों के कारण जोखिम वाले इलाकों में बढ़ती आबादी

NEWS IN DETAIL

Korba : हसदेव नदी तट पर बढ़ते अतिक्रमण की स्थिति चिंताजनक है। शहर के गेरवाघाट, तुलसीनगर, सीतामढ़ी और पंपहाउस क्षेत्र में अब तक छह हजार से अधिक अवैध मकान खड़े हो चुके हैं। हर साल करीब 600 नए घर बनते हैं, जो मानसून में लोगों की जान के लिए खतरा बन जाते हैं।

नदी तट पर अवैध बसाहट

नदी किनारे बने ये मकान ज्यादातर किराए पर दिए जाते हैं और खरीद-बिक्री के लिए इस्तेमाल होते हैं। प्रशासनिक रोकथाम न होने के कारण यह बसाहट लगातार फैल रही है। भू-माफिया सस्ती जमीन और आवास की कमी का फायदा उठाकर नदी तट पर कब्जा कर रहे हैं।

तट से नीचे निर्माण

गेरवाघाट से तुलसीनगर और सीतामढ़ी तक लोग सीधे नदी के रेतीले हिस्सों में मकान बना रहे हैं। यहां 70–80 हजार रुपये में मलबे सहित मकान उपलब्ध हैं। मानसून में जलस्तर बढ़ने पर इन बस्तियों के हजारों लोग जोखिम में रहते हैं। बांगो बांध के गेट खोलने पर पानी तेज बहाव के साथ बस्तियों में घुस जाता है।

बुनियादी सुविधाओं की कमी

अवैध बसाहट के बावजूद कुछ इलाकों में सामुदायिक भवन, बिजली के खंभे और सड़क जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। फिर भी बिजली, पेयजल और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं व्यवस्थित रूप से नहीं पहुंच पातीं। बारिश में घरों में पानी भर जाता है और जीवन कठिन बन जाता है।

व्यवसायिक उपयोग और खतरे

नदी तट पर केवल आवास नहीं, बल्कि गोदाम, खटाल और पैरा-भूसी भंडारण के लिए भी कब्जा हो रहा है। बारिश में कच्चे मकानों का ढहना आम है, इसलिए अब लोग खंभों पर टिके पक्के मकान बना रहे हैं।

लेबर सप्लायर और जोखिम

औद्योगिक प्रतिष्ठानों के ठेकेदार ग्रामीण मजदूरों को सस्ते में कोरबा लाकर सुविधाविहीन क्षेत्रों में बसाते हैं। टावर लाइन और श्मशान घाट जैसे स्थान भी अब सुरक्षित नहीं रहे।

रेत चोरी और कटाव

वैध रेत खदानों की कमी के कारण अवैध रेत उत्खनन तेजी से बढ़ा है। नदी किनारे मिट्टी कटाव हो रहा है, जिससे बस्तियों पर असर पड़ रहा है। दर्री बांध से पानी छोड़े जाने पर जलभराव की आशंका और बढ़ जाती है। इस प्रकार कोरबा में हसदेव नदी तट की अवैध बसाहट लगातार बढ़ रही है, जो मानसून में लोगों के जीवन के लिए गंभीर खतरा बन रही है।

FAQ

  1. हसदेव नदी किनारे अवैध बसाहट कितनी बड़ी है?
    गेरवाघाट, तुलसीनगर, सीतामढ़ी और पंपहाउस में लगभग 6 हजार से ज्यादा मकान बने हैं।
  2. हर साल कितने नए मकान बनते हैं?
    करीब 600 नए मकान हर साल नदी तट पर तैयार हो रहे हैं।
  3. बसाहट में रहने वाले लोगों के लिए खतरा क्या है?
    मानसून में जलस्तर बढ़ने से बस्तियों में बाढ़ और जान का खतरा रहता है।
  4. अतिक्रमण बढ़ने के पीछे मुख्य कारण क्या हैं?
    भू-माफिया, लेबर सप्लायर और सस्ती जमीन की कमी का फायदा उठाकर लोग जोखिम वाले क्षेत्रों में बसते हैं।

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