पुलिस और नेताओं की मिलीभगत से अब भी चल रहा महादेव एप, 10 साल में 94 हजार करोड़ रूपए की अवैध सट्टेबाजी
Arun Tiwari | Oct 19, 2026, 13:53 IST
महादेव एप में 94 हजार करोड़ की सट्टेबाजी
Raipur. ऑनलाइन सट्टेबाजी के चर्चित महादेव एप का नेटवर्क जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बावजूद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रायपुर की विशेष अदालत में दाखिल आरोपपत्र में दावा किया है कि महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी एप और उससे जुड़ी वेबसाइटों के माध्यम से पिछले करीब 10 वर्षों में 94000 करोड़ रूपए की अवैध सट्टेबाजी की गई।
जांच एजेंसी के मुताबिक इस नेटवर्क को संचालित करने में छत्तीसगढ़ के कुछ पुलिसकर्मियों और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत रही। मामले में अवैध कमाई, मनी लॉन्ड्रिंग और सट्टेबाजी के नेटवर्क से जुड़े कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक महादेव एप का मुख्य प्लेटफॉर्म और उससे संबंधित वेबसाइटें अलग-अलग माध्यमों से संचालित होती रहीं।
जांच में सामने आया कि ऑनलाइन सट्टेबाजी के इस कारोबार को व्यवस्थित तरीके से चलाया जा रहा था। इसके लिए कई वेबसाइट, पैनल और एजेंटों का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी का दावा है कि इस नेटवर्क के जरिए अर्जित रकम को विभिन्न माध्यमों से खपाया गया और उससे चल-अचल संपत्तियां खरीदी गईं।
ईडी ने अदालत में बताया कि महादेव एप से जुड़े नेटवर्क के माध्यम से बड़े पैमाने पर ऑनलाइन सट्टेबाजी कराई गई। इस कारोबार का दायरा क्रिकेट से लेकर दूसरे खेलों तक फैला हुआ था। सट्टेबाजी के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म और वेबसाइट का इस्तेमाल किया जाता था जिनके जरिए लोग ऑनलाइन दांव लगाते थे। जांच एजेंसी के मुताबिक महादेव एप के अलावा रेड्डीअन्ना, फेयरप्ले, लेजर365 और अन्य संबंधित प्लेटफॉर्म भी जांच के दायरे में आए हैं।
इन प्लेटफॉर्मों के माध्यम से हजारों करोड़ रूपए का कारोबार किया गया। ईडी ने अदालत में दाखिल आरोपपत्र में 42 लोगों और कंपनियों को आरोपी के रूप में नामजद किए जाने की जानकारी दी है। एजेंसी का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क में कई स्तरों पर लोगों की भूमिका रही। इसमें सट्टेबाजी के प्लेटफॉर्म चलाने वालों से लेकर रकम के लेन-देन और संपत्तियों के प्रबंधन से जुड़े लोग शामिल हैं।
महादेव एप मामले में कार्रवाई करते हुए ईडी अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। एजेंसी ने लगभग 2104 करोड़ रूपए की संपत्ति जब्त या कुर्क किए जाने की जानकारी भी दी है। यह कार्रवाई अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों और धन के प्रवाह का पता लगाने के उद्देश्य से की गई है। आरोपियों ने सट्टेबाजी से प्राप्त रकम का इस्तेमाल जमीन, मकान, सोना, कार और अन्य महंगी संपत्तियां खरीदने में किया।
जांच एजेंसी इस बात का पता लगाने में जुटी है कि अवैध कमाई किन-किन लोगों तक पहुंची और इसे वैध संपत्ति के रूप में दिखाने के लिए किन तरीकों का इस्तेमाल किया गया। जांच का दायरा केवल सट्टेबाजी के संचालन तक सीमित नहीं है। इसमें मनी लॉन्ड्रिंग, संपत्तियों की खरीद और धन के हस्तांतरण से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।
ईडी की जांच में पैनल संचालकों की भूमिका भी सामने आई है। एजेंसी के मुताबिक सट्टेबाजी के पैनल चलाने वाले कुछ लोगों ने 2.5 करोड़ रूपए से लेकर 60 करोड़ रूपए तक की कमाई की। इन पैनलों के जरिए लोगों को ऑनलाइन सट्टा लगाने की सुविधा दी जाती थी। जांच एजेंसी का दावा है कि इस नेटवर्क में काम करने वाले लोगों को उनकी भूमिका और कारोबार के आकार के आधार पर रकम मिलती थी।
पैनल संचालक सट्टेबाजी के कारोबार की अहम कड़ी थे। वे ग्राहकों को जोड़ने, दांव लगाने की व्यवस्था करने और लेन-देन को आगे बढ़ाने का काम करते थे। ईडी ने यह भी बताया कि महादेव एप मामले में अब तक 190 से अधिक स्थानों पर तलाशी ली जा चुकी है। इन कार्रवाइयों के दौरान दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और संपत्तियों से संबंधित जानकारी जुटाई गई।
मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत वांटेड आरोपी अभिषेक कुमार को दुबई से गिरफ्तार किया गया। उसे रायपुर की अदालत में पेश किया गया है। जांच एजेंसियां उसकी भूमिका और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के संबंधों की पड़ताल कर रही हैं।
अभिषेक कुमार को दुबई के राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि वह महादेव एप से जुड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी के कारोबार में शामिल था। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस नेटवर्क के माध्यम से अर्जित रकम से विदेशों में भी संपत्तियां खरीदी गईं। एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि विदेश में मौजूद संपत्तियों और बैंक खातों का इस अवैध कारोबार से क्या संबंध है।
ईडी महादेव एप के मुख्य प्रमोटरों को भारत लाने के प्रयास भी कर रही है। इसके लिए कानूनी प्रक्रिया के तहत संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि मुख्य प्रमोटरों से पूछताछ होने पर पूरे नेटवर्क, धन के लेन-देन और कथित अवैध कमाई से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। मामले में आरोपियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस और प्रत्यर्पण से जुड़ी प्रक्रियाओं सहित विभिन्न कानूनी कदम उठाए जाने की जानकारी दी गई है।
महादेव एप प्रकरण अब केवल ऑनलाइन सट्टेबाजी का मामला नहीं रह गया है। इसमें भ्रष्टाचार, प्रभावशाली लोगों से संबंध, मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशों में संपत्तियां बनाने जैसे पहलुओं की जांच की जा रही है। ईडी की कार्रवाई के बावजूद इस नेटवर्क के पूरी तरह समाप्त होने पर सवाल बने हुए हैं। अब जांच का प्रमुख केंद्र यह पता लगाना है कि अवैध कमाई का वास्तविक लाभ किन लोगों को मिला, नेटवर्क को संरक्षण कैसे मिला और इसके संचालन में शामिल अन्य लोगों तक कानून का शिकंजा कब पहुंचेगा।
जांच में सामने आया कि ऑनलाइन सट्टेबाजी के इस कारोबार को व्यवस्थित तरीके से चलाया जा रहा था। इसके लिए कई वेबसाइट, पैनल और एजेंटों का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी का दावा है कि इस नेटवर्क के जरिए अर्जित रकम को विभिन्न माध्यमों से खपाया गया और उससे चल-अचल संपत्तियां खरीदी गईं।
10 साल में 94 हजार करोड़ रूपए की सट्टेबाजी का दावा
इन प्लेटफॉर्मों के माध्यम से हजारों करोड़ रूपए का कारोबार किया गया। ईडी ने अदालत में दाखिल आरोपपत्र में 42 लोगों और कंपनियों को आरोपी के रूप में नामजद किए जाने की जानकारी दी है। एजेंसी का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क में कई स्तरों पर लोगों की भूमिका रही। इसमें सट्टेबाजी के प्लेटफॉर्म चलाने वालों से लेकर रकम के लेन-देन और संपत्तियों के प्रबंधन से जुड़े लोग शामिल हैं।
14 गिरफ्तार, 2104 करोड़ रूपए की संपत्ति जब्त
जांच एजेंसी इस बात का पता लगाने में जुटी है कि अवैध कमाई किन-किन लोगों तक पहुंची और इसे वैध संपत्ति के रूप में दिखाने के लिए किन तरीकों का इस्तेमाल किया गया। जांच का दायरा केवल सट्टेबाजी के संचालन तक सीमित नहीं है। इसमें मनी लॉन्ड्रिंग, संपत्तियों की खरीद और धन के हस्तांतरण से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।
पैनल संचालकों ने भी कमाए 60 करोड़ रूपए
पैनल संचालक सट्टेबाजी के कारोबार की अहम कड़ी थे। वे ग्राहकों को जोड़ने, दांव लगाने की व्यवस्था करने और लेन-देन को आगे बढ़ाने का काम करते थे। ईडी ने यह भी बताया कि महादेव एप मामले में अब तक 190 से अधिक स्थानों पर तलाशी ली जा चुकी है। इन कार्रवाइयों के दौरान दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और संपत्तियों से संबंधित जानकारी जुटाई गई।
दुबई से गिरफ्तार हुआ वांटेड आरोपी अभिषेक कुमार
अभिषेक कुमार को दुबई के राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि वह महादेव एप से जुड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी के कारोबार में शामिल था। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस नेटवर्क के माध्यम से अर्जित रकम से विदेशों में भी संपत्तियां खरीदी गईं। एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि विदेश में मौजूद संपत्तियों और बैंक खातों का इस अवैध कारोबार से क्या संबंध है।
मुख्य प्रमोटरों को भारत लाने की कोशिश
महादेव एप प्रकरण अब केवल ऑनलाइन सट्टेबाजी का मामला नहीं रह गया है। इसमें भ्रष्टाचार, प्रभावशाली लोगों से संबंध, मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशों में संपत्तियां बनाने जैसे पहलुओं की जांच की जा रही है। ईडी की कार्रवाई के बावजूद इस नेटवर्क के पूरी तरह समाप्त होने पर सवाल बने हुए हैं। अब जांच का प्रमुख केंद्र यह पता लगाना है कि अवैध कमाई का वास्तविक लाभ किन लोगों को मिला, नेटवर्क को संरक्षण कैसे मिला और इसके संचालन में शामिल अन्य लोगों तक कानून का शिकंजा कब पहुंचेगा।
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