सौरभ के बाद अब रवि उप्पल दुबई में गिरफ्तार, महादेव सट्टा ऐप के दूसरे मास्टरमाइंड पर शिकंजा
Arun Tiwari | Nov 04, 2026, 20:16 IST
महादेव सट्टा ऐप केस में सौरभ के बाद रवि उप्पल की दुबई में गिरफ्तारी
रायपुर: छत्तीसगढ़ से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैले महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप के साम्राज्य पर अब शिकंजा कसता नजर आ रहा है। इस मामले में जांच एजेंसियों को एक के बाद एक बड़ी सफलता मिल रही है। ओमान से महादेव सट्टा ऐप के मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर को भारत लाने के बाद अब उसके सहयोगी और ऐप के सह-संस्थापक रवि उप्पल को दुबई में गिरफ्तार किया गया है।
भारतीय जांच एजेंसियों को उसकी गिरफ्तारी की जानकारी मिली है। एजेंसियां अब औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर रवि उप्पल को भारत लाने की तैयारी में जुटी हैं। महादेव सट्टा ऐप मामले में यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल को इस पूरे नेटवर्क का प्रमुख संचालक माना जाता है। दोनों ने मिलकर दुबई से महादेव ऑनलाइन बुक का संचालन किया था।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, जहां सौरभ चंद्राकर ऐप के प्रचार-प्रसार और संचालन का काम देखता था, वहीं रवि उप्पल पूरे नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों, हवाला के जरिए पैसों के लेन-देन और सट्टे के कारोबार से जुड़े वित्तीय प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालता था। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के नेताओं और अधिकारियों से संपर्क बनाए रखने में भी उसकी अहम भूमिका बताई गई है।
महादेव सट्टा ऐप मामले में जांच एजेंसियों ने हाल ही में बड़ी कार्रवाई करते हुए सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत प्रत्यर्पित कराया था। उसे रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां सीबीआई को पूछताछ के लिए आठ दिन की हिरासत मिली है। एजेंसी उससे सट्टा कारोबार के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, आर्थिक लेन-देन और इस अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
सौरभ की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों का अगला निशाना रवि उप्पल था। अधिकारियों के मुताबिक, रवि पहले दुबई में रहकर कारोबार संचालित कर रहा था, लेकिन पिछले साल वह वहां से निकल गया था।
उसके वानुअतु में रहने की जानकारी भी सामने आई थी। हाल के दिनों में उसके दोबारा दुबई पहुंचने की सूचना मिली थी। इसके बाद भारतीय एजेंसियां यूएई के अधिकारियों के संपर्क में थीं। अब उसकी गिरफ्तारी की खबर ने इस मामले में नई उम्मीद जगा दी है।
सैकड़ों करोड़ के
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में रवि उप्पल की भूमिका बेहद अहम बताई गई है। एजेंसी के अधिकारियों के मुताबिक, वह सट्टे से होने वाली कमाई को हवाला के जरिए इधर से उधर पहुंचाने का काम संभालता था।
इस नेटवर्क के माध्यम से सैकड़ों करोड़ रुपये के लेन-देन का आरोप है। ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि महादेव ऐप का मुख्य कार्यालय दुबई में था, जहां से पूरे सिंडिकेट को संचालित किया जाता था।
महादेव ऑनलाइन बुक का नेटवर्क केवल एक ऐप तक सीमित नहीं था। इसके जरिए कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और वेबसाइटों पर सट्टेबाजी कराई जाती थी। देश के अलग-अलग हिस्सों में पैनल और ब्रांच के माध्यम से इसका विस्तार किया गया था।
स्थानीय स्तर पर एजेंटों और संचालकों का नेटवर्क तैयार किया गया था, जो ग्राहकों को आईडी उपलब्ध कराने से लेकर सट्टे का संचालन करने तक का काम करते थे। ईडी ने अपनी जांच में इस नेटवर्क को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ सिंडिकेट बताया है।
महादेव सट्टा ऐप का मामला छत्तीसगढ़ में राजनीतिक विवाद का बड़ा मुद्दा भी रहा है। विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान इस मामले ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। ईडी ने अपनी जांच में आरोप लगाया था कि सट्टे के कारोबार को निर्बाध रूप से चलाने के लिए कुछ अधिकारियों और राजनीतिक लोगों तक अवैध रकम पहुंचाई गई।
एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित कुछ लोगों से जुड़े आरोपों का उल्लेख किया है। हालांकि, भूपेश बघेल इन आरोपों को लगातार खारिज करते रहे हैं। इन आरोपों की जांच अभी जारी है और किसी भी आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों को न्यायिक रूप से सिद्ध मानना उचित नहीं होगा।
इस पूरे मामले में रकम का आकार भी चौंकाने वाला है। ईडी ने महादेव ऑनलाइन बुक और उससे जुड़े प्लेटफॉर्म के कारोबार को लेकर करीब 94 हजार करोड़ रुपये तक के लेन-देन का अनुमान जताया है। एजेंसी के मुताबिक, इस नेटवर्क से अर्जित कथित अपराध की कमाई को अलग-अलग बैंक खातों, हवाला और विदेशों में मौजूद संपत्तियों के जरिए खपाया गया। मार्च 2026 में ईडी ने दुबई और दिल्ली में करीब 1700 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को भी अस्थायी रूप से अटैच किया था।
अब सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल दोनों जांच एजेंसियों की गिरफ्त में आते हैं, तो महादेव सट्टा ऐप के पूरे आर्थिक और राजनीतिक नेटवर्क की परतें खुलने की संभावना है। एजेंसियों की नजर दुबई में मौजूद दूसरे आरोपियों पर भी है।
इनमें विकास छपरिया और शुभम सोनी जैसे नाम शामिल हैं। सवाल यह है कि इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट को किन लोगों का संरक्षण हासिल था, करोड़ों रुपये का लेन-देन किन रास्तों से हुआ और इस पूरे कारोबार से किस-किस को फायदा पहुंचा? रवि उप्पल से पूछताछ इन सवालों के जवाब तलाशने में अहम कड़ी साबित हो सकती है।
यह खबर इसलिए जरूरी है कि इससे महादेव सट्टा ऐप मामले में एक और अहम आरोपी के पकड़े जाने की संभावना बनती है। रवि उप्पल को सौरभ चंद्राकर के साथ इस नेटवर्क का प्रमुख संचालक माना जाता है।उस पर हवाला के जरिए सैकड़ों करोड़ रुपये के लेन-देन का आरोप है, इसलिए उससे पूछताछ से पैसों के रास्ते और इस कारोबार से जुड़े लोगों की जानकारी सामने आ सकती है। इसके अलावा मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति से भी जुड़ा है। ईडी ने चार्जशीट में कुछ अधिकारियों और राजनीतिक लोगों तक अवैध रकम पहुंचने के आरोप लगाए हैं। ये आरोप अभी जांच के विषय हैं, लेकिन इनसे जुड़ी जांच राज्य के प्रशासन और सार्वजनिक जीवन पर असर डाल सकती है।
सवाल 1: रवि उप्पल कौन है और उसकी भूमिका क्या बताई गई है?
जवाब: रवि उप्पल को महादेव सट्टा ऐप का सह-संस्थापक बताया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार वह सट्टे की आर्थिक गतिविधियों, हवाला के जरिए पैसों के लेन-देन और वित्तीय प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालता था।
सवाल 2: रवि उप्पल की गिरफ्तारी कहां से हुई है और अब आगे क्या होगा?
जवाब: उसे दुबई में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी मिली है। एजेंसियां औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर उसे भारत लाने की तैयारी में हैं।
सवाल 3: इस मामले में अब तक कितनी रकम के लेन-देन का अनुमान है?
जवाब: ईडी ने महादेव ऑनलाइन बुक और उससे जुड़े प्लेटफॉर्म के कारोबार को लेकर करीब 94 हजार करोड़ रुपये तक के लेन-देन का अनुमान जताया है। ये आरोप जांच का विषय हैं।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, जहां सौरभ चंद्राकर ऐप के प्रचार-प्रसार और संचालन का काम देखता था, वहीं रवि उप्पल पूरे नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों, हवाला के जरिए पैसों के लेन-देन और सट्टे के कारोबार से जुड़े वित्तीय प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालता था। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के नेताओं और अधिकारियों से संपर्क बनाए रखने में भी उसकी अहम भूमिका बताई गई है।
सौरभ के बाद रवि पर कार्रवाई
सौरभ की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों का अगला निशाना रवि उप्पल था। अधिकारियों के मुताबिक, रवि पहले दुबई में रहकर कारोबार संचालित कर रहा था, लेकिन पिछले साल वह वहां से निकल गया था।
उसके वानुअतु में रहने की जानकारी भी सामने आई थी। हाल के दिनों में उसके दोबारा दुबई पहुंचने की सूचना मिली थी। इसके बाद भारतीय एजेंसियां यूएई के अधिकारियों के संपर्क में थीं। अब उसकी गिरफ्तारी की खबर ने इस मामले में नई उम्मीद जगा दी है।
सैकड़ों करोड़ के हवाला नेटवर्क का जिम्मेदार
इस नेटवर्क के माध्यम से सैकड़ों करोड़ रुपये के लेन-देन का आरोप है। ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि महादेव ऐप का मुख्य कार्यालय दुबई में था, जहां से पूरे सिंडिकेट को संचालित किया जाता था।
महादेव ऑनलाइन बुक का नेटवर्क केवल एक ऐप तक सीमित नहीं था। इसके जरिए कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और वेबसाइटों पर सट्टेबाजी कराई जाती थी। देश के अलग-अलग हिस्सों में पैनल और ब्रांच के माध्यम से इसका विस्तार किया गया था।
स्थानीय स्तर पर एजेंटों और संचालकों का नेटवर्क तैयार किया गया था, जो ग्राहकों को आईडी उपलब्ध कराने से लेकर सट्टे का संचालन करने तक का काम करते थे। ईडी ने अपनी जांच में इस नेटवर्क को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ सिंडिकेट बताया है।
राजनीतिक और प्रशासनिक कनेक्शन की जांच
एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित कुछ लोगों से जुड़े आरोपों का उल्लेख किया है। हालांकि, भूपेश बघेल इन आरोपों को लगातार खारिज करते रहे हैं। इन आरोपों की जांच अभी जारी है और किसी भी आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों को न्यायिक रूप से सिद्ध मानना उचित नहीं होगा।
94 हजार करोड़ के कारोबार की जांच
अब सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल दोनों जांच एजेंसियों की गिरफ्त में आते हैं, तो महादेव सट्टा ऐप के पूरे आर्थिक और राजनीतिक नेटवर्क की परतें खुलने की संभावना है। एजेंसियों की नजर दुबई में मौजूद दूसरे आरोपियों पर भी है।
इनमें विकास छपरिया और शुभम सोनी जैसे नाम शामिल हैं। सवाल यह है कि इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट को किन लोगों का संरक्षण हासिल था, करोड़ों रुपये का लेन-देन किन रास्तों से हुआ और इस पूरे कारोबार से किस-किस को फायदा पहुंचा? रवि उप्पल से पूछताछ इन सवालों के जवाब तलाशने में अहम कड़ी साबित हो सकती है।
यह खबर क्यों जरुरी हैं
FAQs
जवाब: रवि उप्पल को महादेव सट्टा ऐप का सह-संस्थापक बताया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार वह सट्टे की आर्थिक गतिविधियों, हवाला के जरिए पैसों के लेन-देन और वित्तीय प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालता था।
सवाल 2: रवि उप्पल की गिरफ्तारी कहां से हुई है और अब आगे क्या होगा?
जवाब: उसे दुबई में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी मिली है। एजेंसियां औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर उसे भारत लाने की तैयारी में हैं।
सवाल 3: इस मामले में अब तक कितनी रकम के लेन-देन का अनुमान है?
जवाब: ईडी ने महादेव ऑनलाइन बुक और उससे जुड़े प्लेटफॉर्म के कारोबार को लेकर करीब 94 हजार करोड़ रुपये तक के लेन-देन का अनुमान जताया है। ये आरोप जांच का विषय हैं।
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