इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड दोगुना करने की तैयारी, कमेटी ने भेजी सिफारिश
Harrison Masih | Aug 15, 2026, 18:00 IST
इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड
छत्तीसगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS इंटर्न का स्टाइपेंड 15,900 से बढ़ाकर 30,000 रुपये करने की सिफारिश की गई है। प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा गया है।
छत्तीसगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड को बढ़ाने की तैयारी है। राज्य शासन की ओर से गठित कमेटी ने वर्तमान 15,900 रूपए मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30,000 रूपए करने की अनुशंसा की है। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन (CME) कार्यालय को भेजी थी। इसके बाद कमिश्नर कार्यालय ने भी कमेटी की अनुशंसा को राज्य शासन के पास भेज दिया है।
अब स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर अंतिम फैसला राज्य शासन को करना है। शासन की ओर से आदेश जारी होने के बाद ही बढ़ा हुआ स्टाइपेंड लागू होगा। ऐसे में मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न छात्रों की नजर अब शासन के फैसले पर है।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस इंटर्न छात्रों को फिलहाल हर महीने 15,900 रूपए स्टाइपेंड मिलता है। स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर छात्रों की ओर से लगातार आवाज उठाई जा रही थी।
इसी मांग पर कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन कार्यालय ने मेडिसिन विभाग की एचओडी डॉ. देवप्रिया लकड़ा की अध्यक्षता में कमेटी गठित की थी। कमेटी को दूसरे राज्यों में इंटर्न डॉक्टरों को दिए जा रहे स्टाइपेंड का अध्ययन करने और उसके आधार पर छत्तीसगढ़ में स्टाइपेंड तय करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
कमेटी ने अलग-अलग राज्यों में मिलने वाले स्टाइपेंड की तुलना के बाद इंटर्न छात्रों का मासिक स्टाइपेंड 30 हजार रूपए करने की अनुशंसा की है।
कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन कार्यालय ने इसकी अनुशंसा राज्य शासन को भेज दी है। यानी अब स्टाइपेंड बढ़ाने के संबंध में अंतिम निर्णय शासन के स्तर पर होना है।
कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन रितेश अग्रवाल के अनुसार, इंटर्न छात्रों का स्टाइपेंड 30 हजार रूपए प्रति माह करने की अनुशंसा राज्य शासन को भेजी जा चुकी है। स्टाइपेंड बढ़ाने का फैसला अब शासन के हाथ में है।
शासन की मंजूरी मिलने और आदेश जारी होने के बाद ही छात्रों को बढ़े हुए स्टाइपेंड का लाभ मिल सकेगा।
स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदेश के कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न छात्र पिछले करीब 10 दिनों से हड़ताल पर हैं। राजनांदगांव, रायगढ़ समेत कई मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न डॉक्टरों ने आंदोलन किया है।
हालांकि रायपुर मेडिकल कॉलेज में इंटर्न छात्रों की हड़ताल नहीं चल रही है। छात्रों की प्रमुख मांग स्टाइपेंड को बढ़ाकर दूसरे राज्यों के स्तर के करीब लाना है।
गुरुवार को इंटर्न छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन से मिलने पहुंचा था। प्रतिनिधिमंडल में शामिल छात्रों ने आरोप लगाया कि कमिश्नर ने उनके साथ उचित तरीके से बातचीत नहीं की।
छात्रों ने बातचीत के दौरान कही गई कुछ बातों को लेकर भी आपत्ति जताई। उनके अनुसार, फीस बढ़ाने और कॉलेज के हॉस्टल बजट से जुड़े सवाल बातचीत के दौरान उठाए गए थे। इस बातचीत से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ इंटर्न छात्र कमिश्नर की आलोचना करते दिखाई दे रहे हैं।
हालांकि कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन ने बातचीत को लेकर छात्रों की ओर से लगाए गए आरोपों से इनकार किया है।
इंटर्न डॉक्टरों के बाद अब मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टर यानी पीजी छात्रों की ओर से भी स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग तेज हो सकती है। जूनियर डॉक्टरों ने सितंबर से हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है।
पीजी छात्रों की मांग है कि उनका मासिक स्टाइपेंड एक लाख रूपए से अधिक किया जाए। फिलहाल अलग-अलग वर्ष के पीजी छात्रों को करीब 67 हजार से 75 हजार रूपए प्रति माह स्टाइपेंड मिल रहा है।
जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि दूसरे राज्यों की तुलना में उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड कम है। उनका दावा है कि वे अस्पतालों में लंबे समय तक काम करते हैं और मरीजों के इलाज की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इंटर्न छात्रों के मामले में कमेटी की अनुशंसा राज्य शासन तक पहुंच चुकी है। अब 15,900 रूपए के मौजूदा स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30 हजार रूपए करने पर शासन की मंजूरी और आदेश का इंतजार है।
कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन ने इंटर्न छात्रों से हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटने की अपील की है। वहीं छात्रों की नजर स्टाइपेंड बढ़ाने के संबंध में शासन की ओर से जारी होने वाले आदेश पर बनी हुई है।
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अब स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर अंतिम फैसला राज्य शासन को करना है। शासन की ओर से आदेश जारी होने के बाद ही बढ़ा हुआ स्टाइपेंड लागू होगा। ऐसे में मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न छात्रों की नजर अब शासन के फैसले पर है।
15,900 से बढ़ाकर 30 हजार करने की सिफारिश
इसी मांग पर कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन कार्यालय ने मेडिसिन विभाग की एचओडी डॉ. देवप्रिया लकड़ा की अध्यक्षता में कमेटी गठित की थी। कमेटी को दूसरे राज्यों में इंटर्न डॉक्टरों को दिए जा रहे स्टाइपेंड का अध्ययन करने और उसके आधार पर छत्तीसगढ़ में स्टाइपेंड तय करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
कमेटी ने अलग-अलग राज्यों में मिलने वाले स्टाइपेंड की तुलना के बाद इंटर्न छात्रों का मासिक स्टाइपेंड 30 हजार रूपए करने की अनुशंसा की है।
CME कार्यालय ने शासन को भेजी अनुशंसा
कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन रितेश अग्रवाल के अनुसार, इंटर्न छात्रों का स्टाइपेंड 30 हजार रूपए प्रति माह करने की अनुशंसा राज्य शासन को भेजी जा चुकी है। स्टाइपेंड बढ़ाने का फैसला अब शासन के हाथ में है।
शासन की मंजूरी मिलने और आदेश जारी होने के बाद ही छात्रों को बढ़े हुए स्टाइपेंड का लाभ मिल सकेगा।
स्टाइपेंड की मांग को लेकर इंटर्न छात्रों की हड़ताल
हालांकि रायपुर मेडिकल कॉलेज में इंटर्न छात्रों की हड़ताल नहीं चल रही है। छात्रों की प्रमुख मांग स्टाइपेंड को बढ़ाकर दूसरे राज्यों के स्तर के करीब लाना है।
कमिश्नर से मुलाकात के बाद विवाद
छात्रों ने बातचीत के दौरान कही गई कुछ बातों को लेकर भी आपत्ति जताई। उनके अनुसार, फीस बढ़ाने और कॉलेज के हॉस्टल बजट से जुड़े सवाल बातचीत के दौरान उठाए गए थे। इस बातचीत से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ इंटर्न छात्र कमिश्नर की आलोचना करते दिखाई दे रहे हैं।
हालांकि कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन ने बातचीत को लेकर छात्रों की ओर से लगाए गए आरोपों से इनकार किया है।
सितंबर से जूनियर डॉक्टर भी कर सकते हैं हड़ताल
पीजी छात्रों की मांग है कि उनका मासिक स्टाइपेंड एक लाख रूपए से अधिक किया जाए। फिलहाल अलग-अलग वर्ष के पीजी छात्रों को करीब 67 हजार से 75 हजार रूपए प्रति माह स्टाइपेंड मिल रहा है।
जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि दूसरे राज्यों की तुलना में उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड कम है। उनका दावा है कि वे अस्पतालों में लंबे समय तक काम करते हैं और मरीजों के इलाज की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शासन के आदेश पर टिकी नजर
कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन ने इंटर्न छात्रों से हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटने की अपील की है। वहीं छात्रों की नजर स्टाइपेंड बढ़ाने के संबंध में शासन की ओर से जारी होने वाले आदेश पर बनी हुई है।
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