MBBS इंटर्नशिप के नए नियम लागू, अब सीटों से ज्यादा छात्रों को नहीं मिलेगी अनुमति
Harrison Masih | Jul 09, 2026, 12:35 IST
छत्तीसगढ़ में MBBS इंटर्नशिप के नियम 2026
छत्तीसगढ़ में MBBS इंटर्नशिप को नया नियम लागू किया गया है। अब प्रदेश के किसी भी सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज में उसकी स्वीकृत MBBS सीटों से अधिक छात्रों को इंटर्नशिप की अनुमति नहीं मिलेगी।
छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस इंटर्नशिप को लेकर लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। आयुष एवं हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी (AHSU) ने नया नियम लागू करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि, अब प्रदेश के किसी भी सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज में उसकी स्वीकृत MBBS सीटों से अधिक छात्रों को इंटर्नशिप की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन छात्रों पर पड़ेगा, जो दूसरे मेडिकल कॉलेजों से पढ़ाई करने के बाद इंटर्नशिप के लिए रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (JNMC) में ट्रांसफर कराने की कोशिश करते थे। अब ऐसे ट्रांसफर पर प्रभावी रोक लग जाएगी।
पिछले कुछ वर्षों से रायपुर मेडिकल कॉलेज में अन्य जिलों और निजी मेडिकल कॉलेजों के छात्रों के इंटर्नशिप ट्रांसफर के आवेदन लगातार बढ़ रहे थे। इससे कॉलेज की क्षमता पर अतिरिक्त दबाव पड़ता था और इंटर्नशिप प्रबंधन में कठिनाइयां आती थीं।
विश्वविद्यालय का मानना है कि प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में उतने ही इंटर्न होने चाहिए, जितनी वहां MBBS की स्वीकृत सीटें हैं। इससे सभी कॉलेजों में प्रशिक्षण का संतुलन बना रहेगा और संसाधनों पर अनावश्यक बोझ नहीं पड़ेगा।
कोई भी मेडिकल कॉलेज अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक इंटर्न नहीं रख सकेगा।
दूसरे सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेजों के छात्र आसानी से रायपुर मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप ट्रांसफर नहीं करा पाएंगे।
सभी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप का समान और व्यवस्थित वितरण होगा।
क्षमता से अधिक छात्रों के समायोजन को लेकर होने वाले विवादों पर रोक लगेगी।
एमबीबीएस की साढ़े चार साल की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रत्येक छात्र के लिए एक वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप करना जरूरी होता है। इस दौरान छात्रों को हर महीने 15 हजार रूपए से अधिक स्टाइपेंड दिया जाता है।
इंटर्नशिप पूरी होने के बाद डॉक्टरों को दो वर्ष की बांड सेवा करनी होती है। इस दौरान उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों, जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) या मेडिकल कॉलेजों में जूनियर रेजिडेंट के रूप में नियुक्त किया जाता है। बांड सेवा के दौरान लगभग 50 हजार रूपए प्रतिमाह मानदेय मिलता है।
यदि कोई डॉक्टर बांड सेवा का पालन नहीं करता या नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ 20 से 25 लाख रूपए तक की पेनाल्टी लगाने का प्रावधान है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियम से मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप का बेहतर प्रबंधन होगा। जिन कॉलेजों में छात्रों की संख्या अधिक होने से प्रशिक्षण प्रभावित होता था, वहां अब संसाधनों का संतुलित उपयोग हो सकेगा।
हालांकि, दूसरे कॉलेजों से रायपुर जैसे बड़े मेडिकल संस्थानों में इंटर्नशिप करने की उम्मीद रखने वाले छात्रों को अब अपने मूल कॉलेज में ही प्रशिक्षण पूरा करना होगा।
विश्वविद्यालय के इस फैसले से इंटर्नशिप ट्रांसफर को लेकर होने वाली पैरवी, अतिरिक्त समायोजन और प्रशासनिक विवादों में कमी आने की उम्मीद है। साथ ही मेडिकल कॉलेजों में प्रशिक्षण की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
5 मेडिकल कॉलेज रिजेक्ट, 250 एमबीबीएस सीटें गईं...जिम्मेदार कौन?
प्रदेश के 15 मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप का रास्ता साफ, फीस और सीटों का विवरण जारी
अब हर इंटर्नशिप का पूरा रिकॉर्ड रखेगी सरकार, जानें New Internship Rules 2026
छत्तीसगढ़ में अब सिर्फ ऑन-कॉल रहेंगे विशेषज्ञ डॉक्टर, आपातकालीन सेवाओं की कमान संभालेंगे एमबीबीएस चिकित्सा अधिकारी
इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन छात्रों पर पड़ेगा, जो दूसरे मेडिकल कॉलेजों से पढ़ाई करने के बाद इंटर्नशिप के लिए रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (JNMC) में ट्रांसफर कराने की कोशिश करते थे। अब ऐसे ट्रांसफर पर प्रभावी रोक लग जाएगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
विश्वविद्यालय का मानना है कि प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में उतने ही इंटर्न होने चाहिए, जितनी वहां MBBS की स्वीकृत सीटें हैं। इससे सभी कॉलेजों में प्रशिक्षण का संतुलन बना रहेगा और संसाधनों पर अनावश्यक बोझ नहीं पड़ेगा।
अब क्या बदलेगा?
नए नियम लागू होने के बाद-
दूसरे सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेजों के छात्र आसानी से रायपुर मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप ट्रांसफर नहीं करा पाएंगे।
सभी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप का समान और व्यवस्थित वितरण होगा।
क्षमता से अधिक छात्रों के समायोजन को लेकर होने वाले विवादों पर रोक लगेगी।
MBBS के बाद क्या होता है?
इंटर्नशिप पूरी होने के बाद डॉक्टरों को दो वर्ष की बांड सेवा करनी होती है। इस दौरान उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों, जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) या मेडिकल कॉलेजों में जूनियर रेजिडेंट के रूप में नियुक्त किया जाता है। बांड सेवा के दौरान लगभग 50 हजार रूपए प्रतिमाह मानदेय मिलता है।
बांड सेवा नहीं करने पर क्या होगा?
छात्रों और कॉलेजों पर क्या पड़ेगा असर?
हालांकि, दूसरे कॉलेजों से रायपुर जैसे बड़े मेडिकल संस्थानों में इंटर्नशिप करने की उम्मीद रखने वाले छात्रों को अब अपने मूल कॉलेज में ही प्रशिक्षण पूरा करना होगा।
विवादों पर लगेगी रोक
ये खबरें भी पढ़ें...
प्रदेश के 15 मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप का रास्ता साफ, फीस और सीटों का विवरण जारी
अब हर इंटर्नशिप का पूरा रिकॉर्ड रखेगी सरकार, जानें New Internship Rules 2026
छत्तीसगढ़ में अब सिर्फ ऑन-कॉल रहेंगे विशेषज्ञ डॉक्टर, आपातकालीन सेवाओं की कमान संभालेंगे एमबीबीएस चिकित्सा अधिकारी
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava