छत्तीसगढ़ नर्सिंग घोटाला : घपले के बीच मुख्य ऑडिट रिपोर्ट लापता

Aishwarya Dwivedi | Jul 05, 2026, 16:25 IST
नर्सिंग घोटाले की ऑडिट रिपोर्ट गायब
छत्तीसगढ़ नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल में वित्तीय गड़बड़ी और फर्जी कॉलेज मान्यताओं के घोटाले के बीच मुख्य ऑडिट रिपोर्ट गायब हो गई है। निलंबित रजिस्ट्रार सहित कई अधिकारियों पर FIR दर्ज की गई है।

समझें क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल में बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। जांच के दौरान अब सबसे महत्वपूर्ण ऑडिट रिपोर्ट ही गायब हो गई है। इस रिपोर्ट में अफसरों के वीआईपी भोज का पूरा हिसाब दर्ज था। मामले में कई जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। अब आरोपियों ने जांच करने वाले अफसरों पर ही पलटवार कर दिया है।



नर्सिंग काउंसिल में नया खेल

छत्तीसगढ़ नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल (CNRC) में इन दिनों भारी हड़कंप मचा हुआ है। फर्जी रजिस्ट्रेशन और दाखिले के बाद अब एक नया खेल शुरू हो गया है। इस पूरे घोटाले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी यानी ऑडिट रिपोर्ट गायब हो गई है।



यह रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग के संचालनालय से लापता हुई है। विभाग के आला अफसर कई बार इस रिपोर्ट को मांग चुके हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार लोग इसे पेश नहीं कर रहे हैं। इस बात को लेकर अब स्वास्थ्य विभाग में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।



वीआईपी भोज का था पूरा हिसाब

नर्सिंग काउंसिल में नियम-कायदों को ताक पर रखकर बेतहाशा खर्च किया गया था। इस खुलासे के बाद ही स्वास्थ्य विभाग ने यह ऑडिट करवाया था। जांच टीम ने करीब साढ़े तीन साल के खर्च का बारीकी से ऑडिट किया था।



यह ऑडिट साल 2022 से साल 2026 तक के कार्यकाल का था। इस रिपोर्ट में रोज के चाय-नाश्ते का ब्योरा था। इसमें अफसरों के दौरों, बैठकों और वीआईपी भोज का एक-एक हिसाब था।



नियमों का जमकर हुआ दुरुपयोग

काउंसिल के रजिस्ट्रार को आपातकालीन स्थिति के लिए एक विशेष लिमिट मिली थी। वह जरूरी कामों के लिए प्रतिदिन 25 हजार रुपए खर्च कर सकते थे। यह नियम इसलिए था ताकि काउंसिल का कोई जरूरी काम न रुके।



लेकिन जिम्मेदार अफसरों ने इस नियम का जमकर दुरुपयोग किया। काउंसिल में हर दिन न्यूनतम 25 हजार रुपए का खर्च दिखाया जाने लगा। अब जब जांच आगे बढ़ी, तो यह मुख्य रिपोर्ट ही गायब कर दी गई।



निजी कॉलेजों को बांटी मान्यता

यह पूरा घोटाला मुख्य रूप से साल 2022 से 2024 के बीच का है। काउंसिल ने नियमों को ताक पर रखकर काम किया। बिना मापदंड वाले कई निजी नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता दे दी गई। इसके साथ ही उनकी सीटें भी गलत तरीके से बढ़ाई गईं। बाहरी राज्यों से डिग्री लेकर आए छात्रों के पंजीयन में भारी धांधली की गई। पैसों के लेनदेन के चक्कर में रजिस्ट्रेशन में लेटलतीफी भी की गई।



नामजद एफआईआर दर्ज

लगातार मिल रही शिकायतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच बैठाई थी। विभाग की 425 पन्नों की रिपोर्ट के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की। पुलिस ने निलंबित रजिस्ट्रार दुर्गा उसारे के खिलाफ मामला दर्ज किया है।



इसके साथ ही सुरीला जैन, काजोल साहू, वसंता कुमार और मंजू एमएल पर भी नामजद एफआईआर (FIR - First Information Report) दर्ज हुई है। तथ्यों को छिपाने के आरोप में मैथ्यू फर्नाडिस और नरेंद्र देवांगन को भी आरोपी बनाया गया है।



अफसरों पर पलटवार से उलझा मामला

नर्सिंग घोटाला की जांच शुरू होने के बाद एक नया मोड़ आ गया है। मामले में फंस रहे आरोपियों ने अब जांच करने वाले अफसरों पर ही पलटवार किया है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई हैं।



आरोपियों का कहना है कि उन्हें एक सोची-समझी साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। इन शिकायतों ने अब इस पूरी प्रशासनिक लड़ाई को और ज्यादा उलझा दिया है।



FAQ

  1. छत्तीसगढ़ में हाल ही में चर्चा में रहा 'CNRC' का पूरा नाम क्या है?
    उत्तर: CNRC का पूरा नाम छत्तीसगढ़ नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल (Chhattisgarh Nurses Registration Council) है।
  2. नर्सिंग काउंसिल घोटाले की जांच में कौन सा महत्वपूर्ण दस्तावेज लापता (गायब) हो गया है?
    उत्तर: मुख्य ऑडिट रिपोर्ट (Audit Report) गायब हो गई है, जिसमें साल 2022 से 2026 तक के कार्यकाल के खर्चों और वीआईपी भोज का पूरा हिसाब दर्ज था।
  3. नर्सिंग काउंसिल के रजिस्ट्रार को आपातकालीन स्थिति में प्रतिदिन अधिकतम कितने रुपए खर्च करने का अधिकार (विशेष लिमिट) था?
    उत्तर: प्रतिदिन अधिकतम 25,000 रुपए खर्च करने का नियम था, जिसका दुरुपयोग कर हर दिन न्यूनतम इतना खर्च दिखाया जाने लगा।

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