छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल नियम पर भड़का जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन
Aishwarya Dwivedi | Jun 19, 2026, 11:44 IST
बाहरी डॉक्टरों के CGMC रजिस्ट्रेशन से जुड़ा विवाद
छत्तीसगढ़ में बाहरी डॉक्टरों को बिना स्थानीय पंजीकरण के प्रैक्टिस की छूट देने पर विवाद बढ़ गया है। जूनियर डॉक्टर और आईएमए रोजगार और सुरक्षा को लेकर इसका विरोध कर रहे हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
आदेश पर विवाद
इसके ठीक बाद 11 जून को स्वास्थ्य विभाग ने दूसरा आदेश जारी कर दिया। इस नए आदेश ने काउंसिल के पुराने नियम को पूरी तरह बदल दिया है। अब दूसरे राज्यों के डॉक्टरों को स्थानीय मंजूरी की जरूरत नहीं होगी।
नए नियमों का जमीनी असर क्या होगा
स्वास्थ्य विभाग का जारी आदेश
इस पूरे मामले को हम दो सीधे उदाहरणों से समझ सकते हैं। मान लीजिए कोई डॉक्टर मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड है। पहले उसे छत्तीसगढ़ में काम करने के लिए अलग प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। अब वह सीधे छत्तीसगढ़ के किसी भी अस्पताल में प्रैक्टिस शुरू कर सकता है।
इसी तरह यदि कोई नर्स महाराष्ट्र नर्सिंग काउंसिल में पंजीकृत है। पहले उसके स्थानीय पंजीयन को लेकर कई तरह के सवाल उठते थे। नए नियम के बाद वह बिना किसी रुकावट के छत्तीसगढ़ में काम कर पाएगी।
छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल का जारी आदेश
स्थानीय डॉक्टरों ने जताया कड़ा विरोध
छत्तीसगढ़ में मौजूदा समय में कुल 16 मेडिकल कॉलेज चल रहे हैं। यहां हर साल 2455 एमबीबीएस (MBBS) और 435 एमडी/एमएस (MD/MS) सीटें हैं। इन सीटों से हर साल सैकड़ों नए डॉक्टर पढ़कर निकल रहे हैं।
इसके बाद भी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के कई पद खाली पड़े हैं। सरकार इन पदों पर नियमित भर्ती नहीं कर रही है। ऐसे में बाहर के डॉक्टरों को सीधे छूट देना स्थानीय युवाओं के साथ अन्याय है।
स्वास्थ्य मंत्री ने दी सफाई
जब तक स्थानीय स्तर पर डॉक्टरों की कमी पूरी नहीं होती, यह नियम लागू रहेगा। इस व्यवस्था से अस्पतालों को विशेषज्ञ डॉक्टर आसानी से मिल सकेंगे। उन्होंने साफ किया कि डॉक्टरों के दस्तावेजों का सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाएगा।
डॉक्टरों की मुख्य चिंताएं क्या हैं
दूसरा बड़ा सवाल डॉक्टरों की जवाबदेही को लेकर खड़ा हो रहा है। यदि किसी बाहरी डॉक्टर के खिलाफ इलाज में लापरवाही की शिकायत मिलती है, तो कार्रवाई कौन करेगा? क्या छत्तीसगढ़ काउंसिल कार्रवाई करेगी या संबंधित राज्य की काउंसिल करेगी?
तीसरी चिंता निजी अस्पतालों में स्थानीय डॉक्टरों के शोषण को लेकर है। बड़े निजी अस्पताल अब बाहरी राज्यों से सस्ते में स्टाफ बुला सकते हैं। इससे स्थानीय डॉक्टरों को मिलने वाले वेतन और अवसरों पर सीधा असर पड़ेगा।
छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल नियम
आईएमए भी उतरा विरोध में
आईएमए का मानना है कि इस ढील से राज्य में फर्जी डॉक्टरों की संख्या बढ़ सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने यह आदेश नर्सिंग होम एक्ट के तहत जारी किया है। डॉक्टर अब इस आदेश की कानूनी वैधता पर भी सवाल उठा रहे हैं।
FAQ
- छत्तीसगढ़ में वर्तमान में कुल कितने सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेज संचालित हैं और इनमें MBBS की कितनी सीटें हैं?
उत्तर: छत्तीसगढ़ में वर्तमान में कुल 16 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। इन कॉलेजों में हर साल ग्रेजुएशन स्तर पर 2455 एमबीबीएस ($MBBS$) और पोस्ट-ग्रेजुएशन स्तर पर 435 एमडी/एमएस ($MD/MS$) सीटों पर डॉक्टरों को तैयार किया जाता है। - छत्तीसगढ़ में डॉक्टरों और चिकित्सा पेशेवरों के स्थानीय पंजीकरण और नियमन के लिए कौन सी संस्था जिम्मेदार है?
उत्तर: छत्तीसगढ़ में एलोपैथिक डॉक्टरों के पंजीकरण, क्रेडेंशियल वेरिफिकेशन और उनके नैतिक आचरण की निगरानी के लिए 'छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल' (CGMC) मुख्य नियामक संस्था है। हालांकि, राज्य सरकार ने हालिया आदेश नर्सिंग होम एक्ट के तहत जारी किया है। - छत्तीसगढ़ के वर्तमान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कौन हैं,
छत्तीसगढ़ के वर्तमान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल हैं।
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