जादू-टोना के संदेह में बाप-बेटे को अर्धनग्न घुमाया; HC ने लगाई पुलिस को फटकार

thesootr Desk | Mar 18, 2026, 15:55 IST
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Paraded Semi Naked Suspicion Witchcraft HC Reprimands
Paraded Semi Naked Suspicion Witchcraft HC Reprimands

छत्तीसगढ़: बिलासपुर जादू-टोना के संदेह में पिता और बेटों की भीड़ ने पिटाई की। तीनों को अर्धनग्न कर गांव में घुमाया और रात भर बंधक बनाया। पुलिस ने शिकायत दर्ज नहीं की तो पीड़ित HC पहुंचे।

NEWS IN SHORT

  • जादू-टोना के संदेह में पिता-पुत्रों की पिटाई
  • हाईकोर्ट ने पुलिस की लापरवाही पर जताई गंभीर चिंता
  • भीड़ हिंसा में अर्धनग्न कर घुमाया गया परिवार,
  • HC ने दिया दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच का आदेश
  • पुलिस की निष्पक्ष जांच न करने की कार्रवाई रखी लंबित

NEWS IN DETAIL

Bilaspur: छत्तीसगढ़ के अभनपुर थाना क्षेत्र में 13 मार्च 2025 को जादू-टोना के संदेह में ग्रामीणों द्वारा तिलक साहू और उनके परिवार पर हुए हमले को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने गंभीरता से लिया है। पीड़ित पिता अमर सिंह साहू और उनके बेटे नरेश साहू के साथ हुई इस घटना में तीनों को पिटाई कर अर्धनग्न करके पूरे गांव में घुमाया गया, मुंह में कालिख लगाई गई और जूते की माला पहनाकर रात भर बंधक बनाया गया।

पुलिस की लापरवाही आई सामने

घटना के अगले दिन सुबह पीड़ितों ने डायल 112 के माध्यम से पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन पीड़ितों से एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराया जिसमें कहा गया कि वे कोई शिकायत नहीं करेंगे, और उन्हें गांव के बाहर छोड़ दिया गया।

पीड़ितों की उच्च न्यायालय में याचिका दायर

शिकायत न दर्ज करने और उचित कार्रवाई न करने पर पीड़ित पक्ष ने न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आवेदन किया। अदालत ने मामले को संज्ञान में लेते हुए आरोपियों के खिलाफ टोनही प्रताड़ना अधिनियम एवं अन्य संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर चालान पेश करने का आदेश दिया। हालांकि, पुलिस ने 21 आरोपियों के खिलाफ जमानती धारा में अपराध पंजीबद्ध किया, जिससे पीड़ितों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने मॉब लिंचिंग की इस घटना और पुलिस की निष्पक्ष जांच न करने की स्थिति को गंभीरता से लिया।

डीजीपी ने पेश किया शपथपत्र

कोर्ट ने इस मामले में एसपी रायपुर, आईजी रायपुर और डीजीपी छत्तीसगढ़ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। पिछली सुनवाई में डीजीपी ने शपथपत्र पेश कर बताया कि मामले की प्रारंभिक जांच में पुलिस अधिकारियों की गलतियों और लापरवाही की पुष्टि की गई। इसके आधार पर तत्कालीन एसएचओ अभनपुर, इंस्पेक्टर सिद्धेश्वर प्रताप सिंह और सब-इंस्पेक्टर नरसिंह साहू के खिलाफ विभागीय जांच कर चार्जशीट दी गई है।

दोषीयों पर चल रही विभागीय कार्रवाई लंबित - HC

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा कि पीड़ित पक्ष को अपनी समस्त शिकायतें विचारण न्यायालय में उठाने का अधिकार है और अभियुक्तों के खिलाफ उचित सामग्री प्रस्तुत कर सकती है। न्यायालय विधि के अनुसार विचार कर उचित आदेश पारित करेगा।

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की शिकायत का निपटारा करते हुए कहा कि दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई को लंबित रखा जाएगा। कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया कि भीड़ द्वारा हिंसा, सार्वजनिक अपमान और पुलिस की कथित चूक की गंभीरता को देखते हुए यह प्रकरण लंबित रखना उचित है।

अगली सुनवाई 28 अप्रैल को

कोर्ट ने डीजीपी छत्तीसगढ़ को निर्देश दिया कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ शुरू की गई विभागीय जांच के परिणामों को नए शपथपत्र के रूप में अदालत में पेश किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

इस घटना ने छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार ने न्याय की मांग जारी रखी है, जबकि उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की भीड़ हिंसा या सरकारी अधिकारियों की लापरवाही गंभीर रूप से लिया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

निश्कर्ष

भीड़ ने पिता-पुत्रों पर क्रूर हमला किया और उन्हें अर्धनग्न कर गांव में घुमाया। पुलिस ने शिकायत दर्ज नहीं की, जिससे हाईकोर्ट ने लापरवाही गंभीरता से ली। दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच जारी, अगली सुनवाई 28 अप्रैल को।

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