हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 120 दिनों में करना होगा बकाया एरियर का भुगतान
News In Short
- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पेंशनरों को बड़ी राहत दी।
- छठा और सातवां वेतनमान का बकाया एरियर भुगतान करने का आदेश।
- 12 अगस्त 2021 को दायर याचिका के आधार पर फैसला।
- कर्मचारियों को 32 माह और 27 माह का एरियर मिलेगा।
- आदेश से लाखों पेंशनरों को वित्तीय राहत और अधिकारों की सुरक्षा होगी।
News In Details
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के पेंशनरों के लिए बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने सरकार को छठा और सातवां वेतनमान का बकाया एरियर 120 दिनों के भीतर भुगतान करने का आदेश दिया है। यह आदेश मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम-2000 की धारा 49 के तहत दिया गया है।
याचिका का इतिहास
यह मामला छत्तीसगढ़ पेंशनर्स समाज के प्रांताध्यक्ष चेतन भारती द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। उन्होंने 12 अगस्त 2021 को यह याचिका दाखिल की थी। चेतन भारती ने लंबे समय तक मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ शासन के मुख्यमंत्रियों और मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर पेंशनरों की समस्याओं से अवगत कराया। शासन स्तर पर समाधान नहीं मिलने के बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए पेंशनरों के हक को संरक्षित किया।
कोर्ट का निर्णय
हाईकोर्ट (CG High Court) ने मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम-2000 की धारा 49(6) की व्याख्या करते हुए कहा कि राज्यों के बीच वित्तीय भुगतान की सहमति की अनिवार्यता पेंशनरों के अधिकारों में बाधा नहीं बन सकती। कोर्ट ने डॉ. सुरेंद्र नारायण गुप्ता के मामले का हवाला देते हुए यह स्पष्ट किया कि छठे और सातवें वेतनमान का बकाया भुगतान पेंशनरों को मिलना चाहिए।
बकाया एरियर का विवरण
1 जनवरी 2006 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को 32 महीने का एरियर मिलेगा।
अवधि: 1 जनवरी 2006 से 31 अगस्त 2008
1 जनवरी 2016 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को 27 महीने का एरियर मिलेगा।
अवधि: 1 जनवरी 2016 से 31 मार्च 2018
इस आदेश से राज्य के लाखों पेंशनरों को वित्तीय राहत मिलने की उम्मीद है।
पेंशनरों की प्रतिक्रिया
छत्तीसगढ़ पेंशनर्स समाज के प्रांताध्यक्ष चेतन भारती ने इस फैसले को पेंशनरों के अधिकारों की जीत बताया। उनका कहना है कि लंबे समय से पेंशनरों की मेहनत का मूल्यांकन नहीं हो रहा था और यह आदेश उनके हक को सुनिश्चित करता है। पेंशनर्स का मानना है कि अब राज्य सरकार को जल्द से जल्द 120 दिनों के भीतर एरियर का भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह फैसला पेंशनरों के लिए वित्तीय सुरक्षा और अधिकारों की दिशा में बड़ा कदम है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि कानूनी अधिकारों की रक्षा में राज्य सरकार की अनदेखी पेंशनरों के हितों में बाधा नहीं बन सकती। अब यह देखना होगा कि सरकार कितनी तेजी से पेंशनरों के बकाया एरियर का भुगतान सुनिश्चित करती है।
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