छत्तीसगढ़ का प्लेसमेंट मॉडल फ्लॉप : रोजगार मेलों में नहीं पहुंच रहे 90 फीसदी बेरोजगार, दो साल बीते सिर्फ इतनी नौकरी

छत्तीसगढ़ में दो साल में 556 प्लेसमेंट कैंप हुए, लेकिन केवल 9,463 युवाओं को नौकरी मिली है। अधिकतर युवाओं ने कम वेतन, सख्त शर्तों और दूरस्थ स्थानों के कारण इन अवसरों से दूरी बनाई है।

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Arun Tiwari
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News In short

  • छत्तीसगढ़ का प्लेसमेंट कैंप फ्लॉप शो बन गया है।
  • सरकार के प्लेसमेंट कैंपों में 90 फीसदी बेरोजगार नहीं पहुंच रहे हैं।
  • दो साल में 9000 को ही नौकरी मिली है।

News In Details

रायपुर. छत्तीसगढ़ में बेरोजगारों की संख्या 15 लाख तक पहुंच गई है। लेकिन सरकार के पास उनके रोजगार की कोई ठोस योजना नहीं है। सरकार का प्लेसमेंट मॉडल भी प्रभावी नजर नहीं आ रहा। सरकार के प्लेसमेंट कैंपों में 90 फीसदी पढ़े- लिखे बेरोजगार युवा ही नहीं पहुंच रहे हैं।

हाल ही में लगे मेगा प्लेसमेंट कैंप में महज तीन फीसदी लोग ही पहुंचे। दो साल में 500 से ज्यादा प्लेसमेंट शिविर में महज 9 हजार युवाओं को नौकरी मिल पाई। सवाल यही है कि क्या प्लेंसमेंट कैंप सिर्फ दिखावे की रस्म अदायगी ही है। 

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प्लेसमेंट कैंप बने फ्लॉप शो

छत्तीसगढ़ में बेरोजगारों की संख्या करीब 12 लाख है, लेकिन रोजगार मेलों और प्लेसमेंट कैंपों में 10 फीसदी उपस्थिति भी नहीं दिख रही है। हाल ही में छत्तीसगढ़ में अलग-अलग जिलों के लिए तीन दिनों तक लगाए गए हैं। इसमें प्लेसमेंट कैंपों में 97 फीसदी युवा नदारद रहे हैं।

सरकारी आंकड़ों के हिसाब से 63 हजार 666 अभ्यर्थियों ने प्लेसमेंट के लिए पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया था। जहां करीब 18 हजार अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था।

इनमें से केवल 2,004 ही इंटरव्यू देने पहुंचे। महासमुंद, धमतरी और सरगुजा समेत 11 जिलों के लगभग 15 हजार अभ्यर्थियों को आमंत्रित किया गया था। प्रशासनिक स्तर पर भारी भीड़ को मैनेज करने की तैयारी भी की गई थी। केवल 2,090 अभ्यर्थी ही पहुंचे, जो कुल बुलाए गए लोगों की संख्या का महज 3.33 फीसदी है। 

क्यों नहीं पहुंच रहे युवा

इससे ये माना जाए कि सरकार तो कोशिश कर रही है लेकिन रोजगार पाने की युवाओं में ही दिलचस्पी नहीं है। या फिर प्लेसमेंट कैंप रस्म अदायगी के लिए ही हैं। स्थिति यह रही कि हजारों पंजीयन होने के बावजूद इंटरव्यू के लिए बेहद कम युवा पहुंचे। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है,इस सवाल पर युवाओं का कहना है कि कंपनियां उनकी योग्यता के अनुरूप वेतन ऑफर नहीं कर रही हैं।

इसके अतिरिक्त, अधिकांश प्लेसमेंट दूर दराज के इलाकों में दिए जा रहे हैं, जिसके कारण अभ्यर्थी रुचि नहीं ले रहे हैं। नौकरी की शर्तें सख्त होने से युवा घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। वहीं अभ्यर्थियों का कहना है कि अधिकांश कंपनियां 12 से 14 घंटे ड्यूटी की बात कहती हैं। इसी वजह से युवा प्लेसमेंट कैंप की नौकरियों को ठुकरा रहे हैं। इन्हें रोजगार दिलाने के लिए प्रदेश में दो वर्षों में 556 प्लेसमेंट कैंप आयोजित किए गए, लेकिन इनमें मात्र 9 हजार 463 युवाओं को ही रोजगार मिल सका है। यह निराशाजनक स्थिति तब है, जब पंजीकरण कराने वाले युवाओं की संख्या लाखों में है।

यह है रोजगार की स्थिति

विवरणसाल 2024-25साल 2025-26
रोजगार मेला या प्लेसमेंट कैंप311245
इंटरव्यू में शामिल युवा30,90023,478
कुल चयन (Selections)5,3144,149

यह है बेरोजगारों की शिक्षा की स्थिति

शैक्षणिक योग्यता (Qualification)पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या
12वीं (Higher Secondary)4,80,049
तकनीकी एवं व्यवसायिक (Technical & Vocational)3,54,811
ग्रेजुएट (Graduate)2,61,412
पोस्ट ग्रेजुएट (Post Graduate)1,56,998
10वीं (High School)63,880
8वीं (Middle School)34,162
5वीं (Primary School)19,609

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अब आगे क्या

एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि सरकार और कंपनियां मिलकर स्थानीय स्तर पर बेहतर वेतन वाली नौकरियों का सृजन करें। कार्य समय को संतुलित रखें और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया अपनाएं, तो युवाओं की भागीदारी बढ़ सकती है। वरना रोजगार मेले केवल आंकड़ों तक सीमित रह जाएंगे और बेरोजगारी की समस्या जस की तस बनी रहेगी।

Sootr Knowledge

सरकार के सामने रोजगार देना सबसे बड़ी चुनौती है। सरकार का रोजगार मॉडल निवेश पर आधारित है। उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन कहते हैं कि छत्तीसगढ़ में नवंबर 2024 से अब तक 18 क्षेत्रों में 7.83 लाख करोड़ रूपए के 219 निवेश प्रस्ताव मिले है। जिनसे 1.5 लाख रोजगार सृजित होंगे। लेकिन सवाल यह है कि निवेश प्रस्ताव तो मिल रहे हैं लेकिन ये जमीन पर कब उतरेंगे। जब उद्योग लगेंगे तभी रोजगार हासिल होगा। 

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Sootr Important Points

दो सालों में 556 छत्तीसगढ़ में रोजगार मेला और प्लेसमेंट कैंप (CG placement camp) आयोजित किए गए। लेकिन इनमें से केवल 9 हजार 463 युवाओं को ही नौकरी मिल पाई है। जबकि बेरोजगारों की संख्या 11 लाख से अधिक है।

  • रोजगार मेलों में बुलाए गए युवाओं में से केवल 3 से 10% ही इंटरव्यू के लिए पहुंचे। एक मेले में तो करीब 97% युवाओं ने भाग नहीं लिया।

  • अधिकांश कंपनियां कम वेतन पर 12 से 14 घंटे काम की शर्त रख रही हैं, जिससे युवा इन नौकरियों को स्वीकार करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।

  • कई नौकरियां दूर-दराज के इलाकों में हैं, जहां रहने और आने-जाने की पर्याप्त सुविधाएं नहीं होतीं, इसलिए युवा ऐसे अवसरों से दूरी बना रहे हैं।

यह स्थिति बताती है कि सिर्फ रोजगार मेला लगाना पर्याप्त नहीं है। युवाओं की जरूरतों और अपेक्षाओं के अनुसार वेतन, कार्य परिस्थितियों और नौकरी की गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है।

निष्कर्ष

इस स्थिति ने छत्तीसगढ़ सरकार और रोजगार विभाग के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या केवल रोजगार मेले आयोजित कर देना ही काफी है? या फिर नौकरियों की गुणवत्ता, वेतन और कार्य शर्तों पर भी गंभीरता से विचार करने की जरूरत है? युवाओं का साफ कहना है कि वे काम करने से नहीं डरते, लेकिन मेहनत के हिसाब से सम्मानजनक वेतन और बेहतर कार्य परिस्थितियां चाहते हैं।

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