रायपुर में कई जोन क्रिटिकल पॉल्यूडेट एरिया घोषित, हवा साफ करने भेजे करोड़ों, निगमों ने बना दी सड़कें
छत्तीसगढ़ की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है। रायपुर, दुर्ग-भिलाई और कोरबा जैसे औद्योगिक शहरों में सांस लेना मुश्किल हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अफसरों की प्राथमिकता प्रदूषण कम करना नहीं, बल्कि फाइलों में विकास दिखाना बन गया है। केंद्र सरकार ने जिन पैसों को हवा शुद्ध करने के लिए भेजा, उन्हें नगर निगमों ने सड़क निर्माण, पैचवर्क, झाड़ू अभियान, गार्डन और जागरूकता कार्यक्रमों के नाम से उड़ा दिए।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर हवा साफ करने के नाम पर आए 301 करोड़ 69 लाख रुपए का इस्तेमाल सड़क और पैचवर्क में कैसे हो गया? और उससे भी बड़ा सवाल यह कि इसकी मंजूरी किसने दी?
उरला-सिलतरा बने क्रिटिकल पॉल्यूटेड एरिया
केंद्र सरकार की रिपोर्ट ने छत्तीसगढ़ की पोल खोल दी है। रायपुर के उरला और सिलतरा इलाके को क्रिटिकल पॉल्यूटेड एरिया घोषित किया गया है। ये वही इलाके हैं जहां भारी उद्योग धड़ल्ले से चल रहे हैं और प्रदूषण नियंत्रण के नियम सिर्फ कागजों में नजर आते हैं। स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि केंद्र सरकार को अलग से फंड जारी करना पड़ा। अकेले रायपुर को 151 करोड़ 59 लाख रुपए मिले, ताकि प्रदूषण नियंत्रण, एयर क्वालिटी सुधार और धूल-धुएं पर लगाम लगाई जा सके।
लेकिन कहीं सड़कें बन गईं, कहीं पैचवर्क हो गया, कहीं गार्डन बना दिए गए, कहीं अवेयरनेस के नाम पर खर्च दिखा दिया गया, कहीं ईवी चार्जिंग स्टेशन को एयर पॉल्यूशन कंट्रोल बता दिया गया। यानी हवा साफ करने का पैसा विकास कार्यों के नाम पर पचा लिया गया।
बढ़ते Pm10 पार्टिकल्स ने बढ़ाई चिंता
रिपोर्ट बताती है कि रायपुर और कोरबा में Pm10 पार्टिकल्स लगातार बढ़ रहे हैं। यह सीधे तौर पर खराब हवा और बढ़ते प्रदूषण (Air Pollution) का संकेत है। विशेषज्ञों के मुताबिक 50 तक Pm10 सामान्य माना जाता है। 100 तक संतोषजनक..100 से ऊपर गंभीर और चिंताजनक माना जाता है। लेकिन छत्तीसगढ़ में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं।
रायपुर में Pm10 की सालाना वृद्धि
* 2022-23 में 11.42% वृद्धि
* 2023-24 में 8.45% वृद्धि
* 2024-25 में 7.14% और उछाल
कोरबा में और भयावह हाल
* 2022-23 में 22.80% सालाना वृद्धि
* 2023-24 में 7.01% सालाना वृद्धि
* 2024-25 में 26.31% की भारी सालाना बढ़ोतरी
यानी उद्योग बढ़े, प्रदूषण बढ़ा, लेकिन नियंत्रण सिर्फ बैठकों और फाइलों में चलता रहा।
आखिर क्या होते हैं पीएम10 पार्टिकल्स?
पीएम10 यानी हवा में मौजूद बेहद सूक्ष्म धूल और धुएं के कण। इनका आकार 10 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। ये सांस के जरिए सीधे फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं और दमा, सांस लेने में तकलीफ, फेफड़ों में संक्रमण, हार्ट संबंधी गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। सबसे ज्यादा पीएम10 औद्योगिक कचरे, कोयला परिवहन, धूल और वाहनों के धुएं से निकलते हैं। रायपुर, कोरबा और भिलाई में यही सबसे बड़ा संकट बन चुका है।
दुर्ग-भिलाई में आंकड़ों का खेल?
दुर्ग भिलाई मे आंकड़े कम लेकिन संतोषप्रद ही नगर निगम के अनुसार दुर्ग भिलाई में हवा में पीएम10 पार्टिकल्स की मांत्रा कम होनी बताई जा रही है। हमने जब इनके प्रयासों और तरीकों के बारे में जाना तो पता चला कि आंकड़ों में कमी बताई जा रही है। हालांकि केंद्रीय मानको के अनुसार संतोषप्रद श्रेणी में ही है। इधर केंद्र से आए पैसे का यहंा भी खूद दुरुपयोग हो रहा है। यहां भी सड़क निर्माण पैच वर्क, सड़कों पर झाड़ू, अवेयनेस प्रोग्राम के नाम से करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं, सवाल यह कि क्या सड़क पर झाड़ू लगाने से हवा शुद्ध हो जाएगी?
पर्यावरण मंडल की औचक जांच भी तय तारीख पर
छत्तीसगढ़ पर्यावरण मंडलकी कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। विपक्ष कई बार विधानसभा में सवाल उठा चुका है कि आखिर उद्योगों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? लेकिन हर बार जवाब आता है- स्थिति नियंत्रण में है, निरीक्षण जारी है, बेहतर काम हो रहा है।
हकीकत यह है कि:
* औचक निरीक्षण पहले से तय रहते हैं
* उद्योगों को पहले ही सूचना मिल जाती है
* जांच सिर्फ कागजी खानापूर्ति बनकर रह गई है
* प्रदूषण फैलाने वाले प्लांट्स पर सख्त कार्रवाई नहीं होती
यही वजह है कि उद्योग अपनी मनमानी कर रहे हैं और जनता जहरीली हवा में जीने को मजबूर है।
हवा शुद्धि के नाम पर सिस्टम शुद्ध
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हवा साफ करने के लिए मिले पैसों के उपयोग पर मुख्यालय स्तर से मंजूरी भी दी जाती रही। यानी यह सिर्फ स्थानीय स्तर का खेल नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक चेन की मिलीभगत की आशंका पैदा करता है।
अगर केंद्र सरकार ने एयर क्वालिटी सुधारने के लिए पैसा भेजा था, तो फिर:
- कितने एयर मॉनिटरिंग सिस्टम लगे?
- कितने प्रदूषणकारी उद्योगों पर कार्रवाई हुई?
- कितनी डस्ट कंट्रोल मशीनें खरीदी गईं?
- कितने ग्रीन बैरियर तैयार हुए?
- कितनी इंडस्ट्रीज को नोटिस जारी हुए?
जहरीली हवा पर राजनीति, कार्रवाई गायब
छत्तीसगढ़ में उद्योगों के विस्तार को विकास का मॉडल बताया जा रहा है, लेकिन उसी विकास की कीमत अब लोग अपनी सांसों से चुका रहे हैं। रायपुर, कोरबा और भिलाई में लगातार बढ़ता प्रदूषण आने वाले समय में बड़ा स्वास्थ्य संकट बन सकता है। लेकिन सिस्टम की संवेदनहीनता देखिए, हवा जहरीली हो रही है और अफसर फाइलों में संतोषप्रद लिख रहे हैं।
केंद्र का पैसा आया था जनता को साफ हवा देने के लिए, लेकिन सिस्टम ने उसे डामर, पैचवर्क और प्रचार में दबा दिया। अब सबसे बड़ा सवाल यही है, क्या छत्तीसगढ़ में हवा साफ होगी, या सिर्फ घोटालों की धूल उड़ती रहेगी?
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