रायपुर में ITC घोटाला : DGGI की बड़ी कार्रवाई, यूपी से गिरफ्तारी
NEWS IN SHORT
- रायपुर DGGI ने यूपी से मुख्य आरोपी कुलदीप को दबोचा।
- बोगस फर्मों से 12 करोड़ 5 लाख का फर्जी ITC हासिल किया।
- बेटियों के नाम पर बनाई थीं फर्जी स्क्रैप फर्में।
- आरोपी के घर से दस्तावेज और मोबाइल फोन जब्त किए।
- नए ADG सुजीत मलिक के कार्यकाल की पहली बड़ी गिरफ्तारी।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ में फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) रायपुर की टीम ने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर से मुख्य आरोपी कुलदीप उर्फ अभिषेक पाठक को गिरफ्तार किया है।
आरोपी पर बोगस (फर्जी) फर्मों के जरिए करीब 12 करोड़ 5 लाख का फर्जी ITC हासिल करने और उसे आगे ट्रांसफर करने का गंभीर आरोप है। यह कार्रवाई रायपुर DGGI के नए प्रधान अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) सुजीत मलिक के 18 मई 2026 को पदभार ग्रहण करने के बाद पहली बड़ी सफलता मानी जा रही है, जिससे साफ संकेत हैं कि विभाग अब पूरी तरह से एक्शन मोड में है।
स्क्रैप कारोबार की आड़ में रची साजिश
जांच में सामने आया है कि आरोपी अभिषेक पाठक ने रायपुर के रहने वाले अमन सिंह के साथ मिलकर स्क्रैप (कबाड़) कारोबार से जुड़ी फर्में बनाई थीं। इन फर्मों के जरिए जमीन पर कोई वास्तविक व्यापार नहीं हो रहा था, बल्कि सिर्फ कागजों में करोड़ों रुपए का लेन-देन दिखाकर सरकार को चूना लगाया जा रहा था। आरोपी को DGGI ने कई बार समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन वह लगातार फरार चल रहा था। इसके बाद टीम ने यूपी के शाहजहांपुर जिले के अतिबरा गांव में दबिश देकर उसे दबोच लिया।
बेटियों के नाम पर बनाई बोगस फर्में
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी ने टैक्स चोरी के इस खेल में अपने परिवार को भी शामिल कर रखा था। उसने अपनी बेटियों के नाम पर समृद्धि ट्रेडिंग और ख्याति इंटरप्राइजेज जैसी फर्जी फर्में रजिस्टर्ड कराई थीं। इन्हीं कंपनियों के बैंक खातों और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपए की टैक्स क्रेडिट की हेराफेरी की गई। आरोपी के घर से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल फोन और डिजिटल सबूत जब्त किए गए हैं।
16 करोड़ से अधिक का नेटवर्क
DGGI अधिकारियों के मुताबिक, इस घोटाले का पूरा नेटवर्क 16 करोड़ रुपए से अधिक का हो सकता है, जिसके तार कई अन्य राज्यों से भी जुड़े होने की आशंका है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पिछले कुछ सालों में अभिषेक पाठक की जीवनशैली में अचानक बड़ा बदलाव आया था। गांव में आलीशान मकान, लग्जरी गाड़ियां और बेहिसाब संपत्ति देखकर ही जांच एजेंसियों का शक गहराया था।
आगे और होंगे बड़े खुलासे: DGGI सूत्रों का कहना है कि जब्त किए गए दस्तावेजों और मोबाइल डेटा की जांच की जा रही है। इस सिंडिकेट में शामिल कुछ और बड़े चेहरों के नाम सामने आए हैं, जिसके चलते आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां संभव हैं।
निष्कर्ष
इस कार्रवाई से साफ है कि बोगस फर्मों के जरिए टैक्स चोरी करने वालों पर जीएसटी इंटेलिजेंस सख्त है। रायपुर DGGI की यह मुस्तैदी फर्जी ITC नेटवर्क को तोड़ने में मददगार साबित होगी। आने वाले दिनों में डिजिटल सबूतों के आधार पर इस सिंडिकेट से जुड़े कई और बड़े खुलासे होने की पूरी उम्मीद है।
FAQ
- रायपुर में कौन सा बड़ा घोटाला सामने आया है?
Ans. रायपुर में बोगस (फर्जी) फर्मों के जरिए करीब 12 करोड़ 5 लाख रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) हासिल करने और उसे आगे ट्रांसफर करने का बड़ा घोटाला सामने आया है। - रायपुर DGGI के किस अधिकारी के नेतृत्व में यह कार्रवाई हुई?
Ans. यह कार्रवाई रायपुर DGGI के नए प्रधान अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) सुजीत मलिक के कार्यकाल की पहली बड़ी सफलता है। - भारत में GST कब और किस संवैधानिक संशोधन के तहत लागू किया गया था?
Ans. भारत में GST 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया था। इसे 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 के तहत देश में लाया गया। - इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्या होता है?
Ans. जब कोई व्यापारी अपने बिजनेस के लिए कच्चा माल या कोई सेवा खरीदता है, तो उस पर वह जो टैक्स (GST) चुकाता है, उसे 'इनपुट टैक्स' कहते हैं। बाद में जब वह तैयार माल बेचता है और ग्राहकों से टैक्स वसूलता है, तो वह टैक्स जमा करते समय अपने द्वारा पहले चुकाए गए 'इनपुट टैक्स' को घटा सकता है। इसी टैक्स छूट की प्रक्रिया को इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) कहा जाता है।
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