व्हाट्सएप पर भेजा फर्जी जॉइनिंग लेटर, मंत्रालय पहुंचते ही खुली पोल, 23 लाख में सरकारी नौकरी

Arun Tiwari | May 07, 2026, 13:30 IST
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रायपुर में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 23 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। आरोपी दंपती ने खुद को मंत्रालय और बड़े अधिकारियों से जुड़ा बताकर पीड़ित और उनके परिवार को भरोसे में लिया।

Raipur. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। राजधानी के एक कारोबारी से मंत्रालय में नौकरी लगाने का झांसा देकर 23 लाख रुपए ऐंठ लिए गए। पति-पत्नी ने खुद को मंत्रालय और बड़े अधिकारियों से जुड़ा बताते हुए पीड़ित को भरोसे में लिया और बाद में फर्जी नियुक्ति पत्र तथा इम्प्लॉय आईडी भेजकर ठगी को अंजाम दिया। मामले की शिकायत मिलने के बाद डीडी नगर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।



क्या है पूरा मामला:

पुलिस के मुताबिक आरोपी दंपती की पहचान विश्वनाथ गुप्ता उर्फ विष्णु गुप्ता और उसकी पत्नी चंदा गुप्ता के रूप में हुई है। दोनों पर सरकारी विभागों में नौकरी लगवाने के नाम पर रकम वसूलने का आरोप है। पुलिस अब आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।



बंटी बबली का कारोबारी को चूना:

आकाश साहू रायपुरा स्थित शिवोम विहार कॉलोनी का रहने वाला है और वाहन खरीदी-बिक्री का कारोबार करता है। आकाश ने पुलिस को बताया कि करीब दो साल पहले उसकी पहचान उसके परिचित जितेंद्र बघेल के माध्यम से विश्वनाथ गुप्ता से हुई थी। बातचीत के दौरान आरोपी खुद को प्रभावशाली लोगों और मंत्रालय के अधिकारियों का करीबी बताता था। इसी भरोसे के आधार पर दोनों के बीच संपर्क बढ़ता गया।



जल संसाधन विभाग में जॉब:

आकाश साहू के अनुसार अगस्त 2024 में विश्वनाथ गुप्ता ने उसे नवा रायपुर स्थित मंत्रालय बुलाया। वहां उसकी मुलाकात आरोपी की पत्नी चंदा गुप्ता से भी कराई गई। दोनों ने दावा किया कि मंत्रालय और जल संसाधन विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर सहित कई पद खाली हैं और वे अपने संपर्कों के जरिए आसानी से नौकरी लगवा सकते हैं। आरोपियों की बातों में आकर आकाश साहू ने अपनी पत्नी रेशमी साहू के अलावा रिश्तेदार शेषनारायण साहू और रविशंकर साहू के लिए भी आवेदन प्रक्रिया पूरी करवाई। आरोप है कि इसके बाद दंपती ने अलग-अलग किश्तों में फोन-पे, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और नकद के माध्यम से कुल 23 लाख रुपए ले लिए। हर बार आरोपियों ने नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ने और दस्तावेज तैयार होने का भरोसा दिलाया।



नियुक्ति पत्र भी भेजा:

पीड़ित ने पुलिस को बताया कि दिसंबर 2024 में आरोपियों ने मोबाइल पर कथित नियुक्ति पत्र भेजे। इसके बाद जनवरी 2025 में व्हाट्सएप के जरिए इम्प्लॉय आईडी भी भेजी गई। नियुक्ति पत्र और आईडी मिलने के बाद परिवार को भरोसा हो गया कि नौकरी लग गई है। इसी विश्वास में आकाश साहू अपनी पत्नी और रिश्तेदारों को लेकर मंत्रालय पहुंचा, ताकि आगे की जॉइनिंग प्रक्रिया पूरी की जा सके।



मंत्रालय पहुंचा तो खुली पोल:

मंत्रालय पहुंचने पर उन्हें बड़ा झटका लगा। वहां अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच (job fraud) के बाद बताया कि नियुक्ति पत्र और इम्प्लॉय आईडी पूरी तरह फर्जी हैं। इसके बाद पीड़ित ने आरोपियों से संपर्क किया तो उन्होंने मंत्रालय में “रेड” पड़ने और प्रक्रिया रुकने का बहाना बनाकर कुछ महीनों तक इंतजार करने को कहा। समय बीतने के साथ आरोपियों ने फोन उठाना बंद कर दिया और मोबाइल भी स्विच ऑफ आने लगा।



परेशान होकर पीड़ित आरोपी के पत्थलगांव स्थित घर पहुंचा, जहां उसकी पत्नी चंदा गुप्ता मिली। उसने जल्द ही पूरी रकम लौटाने का आश्वासन दिया, लेकिन तय समय गुजरने के बाद भी पैसे वापस नहीं किए गए। लगातार टालमटोल से परेशान होकर आखिरकार आकाश साहू ने डीडी नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर लिया है।



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