रायपुर में बिजली संकट होगा दूर; कम जगह में ज्यादा करंट दौड़ाएंगे 'मोनो पोल', टावरों की तुलना में 95% जमीन की बचत
NEWS IN SHORT
- रायपुर में मोनो पोल से पारेषण लाइनों का विस्तार, जमीन की बचत होगी
- छत्तीसगढ़ में पहली बार मोनो पोल तकनीक का इस्तेमाल
- 132/33 केवी लाइन में बदलाव पारेषण नेटवर्क को मिलेगा नया आकार
- हाईटेंशन टावरों की तुलना में बहुत कम जमीन की होगी आवश्यकता
- मेटल पार्क में 132/33 केवी सब-स्टेशन से नई लाइन खींची गई
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (CSPTCL) ने राजधानी रायपुर में जमीन की कमी को ध्यान में रखते हुए पारेषण लाइनों के विस्तार के लिए एक नई तकनीक का उपयोग शुरू किया है। इस तकनीक के तहत अब मोनो पोल का इस्तेमाल किया जाएगा, जो भूमि की खपत को काफी कम करता है और देखने में भी अधिक सुंदर होता है। मोनो पोल के माध्यम से अतिउच्च दाब (EHT) लाइनों के केबल लगाए जाएंगे, जिससे शहरों में सीमित स्थान में पारेषण लाइनों का विस्तार संभव हो सकेगा।
मेटल पार्क में मोनो पोल का पहला प्रोजेक्ट
रायपुर के मेटल पार्क में 250 मीटर लंबी नई 132/33 केवी लाइन में मोनो पोल लगाए गए हैं। यह कदम राजधानी के बढ़ते हुए पारेषण नेटवर्क की जरूरतों को पूरा करने के लिए उठाया गया है।
इन पोलों का मुख्य उद्देश्य उच्च दाब लाइनों के लिए जगह की कमी को पूरा करना है। इसके साथ ही मोनो पोल के उपयोग से टावर की तुलना में कम जगह की आवश्यकता होती है, जिससे शहरी इलाकों में जमीन की समस्या का समाधान होगा।
मोनो पोल के फायदे
मोनो पोल तकनीक की खासियत यह है कि इसमें हाईटेंशन टावरों की तुलना में बहुत कम जमीन की आवश्यकता होती है। जहां पुराने टावरों के लिए प्रति यूनिट भूमि की आवश्यकता लगभग एक से दो हजार वर्गफीट होती थी, वहीं मोनो पोल के लिए केवल 50 वर्गफीट जमीन की जरूरत पड़ती है।
इसके अलावा, मोनो पोल का डिजाइन अधिक आकर्षक और सुरक्षित होता है। इसमें सामान्य लोग चढ़ नहीं सकते, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना भी कम होती है। इस प्रकार, मोनो पोल का इस्तेमाल करने से पारेषण लाइनों की सुरक्षा भी बढ़ जाती है और इनकी देखभाल करना भी आसान हो जाता है।
उरला-सिलतरा में भी हुआ विस्तार
इसके अलावा, छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी ने उरला-सिलतरा के औद्योगिक क्षेत्र में भी मोनो पोल के जरिए पारेषण लाइनों का विस्तार किया है। मेटल पार्क स्थित 132/33 केवी सब-स्टेशन से नई लाइन खींची गई है, जिसमें मोनो पोल का उपयोग किया गया है। यह पोल लगभग 100 फीट ऊंचा है और इसके माध्यम से ईएचटी लाइन का विस्तार किया गया है।
इस परियोजना पर 8 करोड़ रुपए की लागत आई है और इसे कैपिटल इंवेस्टमेंट प्लान के तहत वित्तीय प्रबंधन से पूरा किया गया है। अब इस परियोजना के अंतर्गत, विद्युत आपूर्ति मेटल पार्क सिलतरा तक पहुंच चुकी है।
नवीनता और सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण कदम
राजधानी रायपुर में मोनो पोल का उपयोग एक महत्वपूर्ण कदम है जो शहरी विकास और पारेषण लाइनों के विस्तार को बेहतर बनाने की दिशा में उठाया गया है। इसके साथ ही, यह परियोजना छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी की तरफ से एक स्मार्ट और सुरक्षित समाधान पेश करती है।
मोनो पोल तकनीक न केवल भूमि के संरक्षण में मदद करेगी बल्कि शहरों के सौंदर्यीकरण में भी योगदान करेगी। कुल मिलाकर, मोनो पोल का यह नया प्रयोग पारेषण लाइनों के विस्तार के लिए एक प्रभावी और आधुनिक समाधान है जो राजधानी रायपुर और इसके आसपास के इलाकों में पारेषण नेटवर्क को मजबूत बनाने में सहायक साबित होगा।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में मोनो पोल तकनीक का उपयोग पारेषण लाइनों के विस्तार में एक नई दिशा प्रस्तुत कर रहा है। यह तकनीक सीमित भूमि में पारेषण लाइनों का विस्तार संभव बनाती है, जिससे शहरी क्षेत्रों में जमीन की समस्या का समाधान होगा। मोनो पोल की डिज़ाइन सुरक्षा और सौंदर्य के दृष्टिकोण से भी फायदेमंद है, और इसके माध्यम से पारेषण लाइनों की देखभाल करना भी आसान हो गया है। इस परियोजना से रायपुर और इसके आसपास के इलाकों में पारेषण नेटवर्क को मजबूती मिलेगी, जो भविष्य में विकास की गति को बढ़ावा देगा। बिजली संकट में भी राहत मिलेगी।
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