3 सफाईकर्मियों की मौत पर प्रशासन पड़ा ठंडा, राष्ट्रीय आयोग उपाध्यक्ष भी 2 मिनट का मौन रखकर वापस लौटे
Raipur. छत्तीसगढ़ में 3 सफाईकर्मियों की मौत पर प्रशासन मौन हो गया है। इस बात की जांच ठंडे बस्ते में डाल दी गई कि सफाईकर्मियों को टैंक के अंदर क्यों उताया गया? जबकि ऐसा करने वालों को कानून की कड़ी धाराओ के तहत गिरफ्तार करने का प्रावधान है। इधर राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष हरदीप सिंह गिल छत्तीसगढ़ पहुंचे। लेकिन अस्पताल निरीक्षण के बाद उनका भी रुख नर्म पड़ गया।
अस्पताल पहुंचकर जांच
घटना के बाद राष्ट्रीय सफाई आयोग के उपाध्यक्ष हरदीप सिंह गिल छत्तीसगढ़ पहुंचे। मृतक के परिजनों के साथ मिलने के बाद वे अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे। घटनास्थल का जायजा लिया। प्रबंधन से पूरी जानकारी मांगी। गैस रिसाव और सुरक्षा उपकरणों पर सवाल किए, जवाब से संतुष्ट भी हो गए। मैनुअल स्कैवेंजिंग पर सख्ती की बात दोहराई और मृतकों के लिए 2 मिनट का मौन रखा और चलते बने।
लेकिन एक्शन नहीं, सिर्फ चेतावनी
गिल के निरीक्षण के बाद रुख बदलता दिखा। उनके आने पर लोगो को उम्मीद थी कि कड़ी कार्रवाई होगी। गिल अस्पताल निरीक्षण के पहले मृतकों के परिजनों से भी मिलने गए थे। जहां कड़ी कार्रवाई का वादा किया था। लेकिन अस्पताल निरीक्षण के बाद उनके सुर बदल गए। इधर घटना के बाद हुई सरकार ने भी एक बैठक की। जिसके बाद जारी विज्ञप्ति में अस्पताल का नाम तक गायब था। रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल को निजी हॉस्पिटल के नाम से संबोधित किया गया।
मैला उठाने वालों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
2013 में हाथ से मैला उठाने पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिंबंध लगा दी थी। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों को विषय पर नियम बनाया। उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करना है। तय अधिनियम के अंतर्गत यह अपराध संज्ञेय एवं गैर-जमानती है। उसके बावजूद कार्रवाई के नाम पर अस्पताल के प्रति शासन का रुख नर्म है।
मुआवजा के बाद सबकुछ शांति
घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मुआवजे का आश्वासन दिया है। प्रशासन भी राहत पर फोकस करता दिखा। अन्य सुविधाओं के साथ तीनों मृतकों के परिजनोें को तीस-तीस लाख मुआवजा देने की घोषणा हुई है। उसके बाद मामला शॉर्ट आउट होता दिख रहा है। जबकि मामले में सुप्रीम कोर्ट की गाईडलाइन का स्पष्ट उल्लंघन हुआ।
बैठक में बड़े-बड़े निर्देश
रेडक्रॉस सभाकक्ष में बैठक हुई। सफाईकर्मियों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया गया। पीपीई किट अनिवार्य करने की बात हुई। हर 6 महीने में मेडिकल जांच की बात कही गई। न्यूनतम वेतन लागू करने के निर्देश दिए गए। जागरूकता कैंप चलाने पर जोर दिया गया।
कानून और गाइडलाइन का हवाला
बैठक के दौरान गिल ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का जिक्र किया। मैनुअल स्कैवेंजिंग को पूरी तरह प्रतिबंधित बताया। उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। नगर निगम को एनओसी व्यवस्था सख्त करने को कहा। रात में सफाई कार्य रोकने के निर्देश दिए।
पुलिस और प्रशासन को निर्देश
एफआईआर में एट्रोसिटी एक्ट जोड़ने की बात कही गई। मकानहीन परिवारों को पीएम आवास देने के निर्देश दिए। मुआवजे को लिखित में देने को कहा गया। सुरक्षा इंतजाम पुख्ता करने पर जोर दिया गया।
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