रायपुर स्टेशन पर चेकिंग का सच, पहनावा देखकर हो रही टिकट की जांच

Aishwarya Dwivedi | Jun 17, 2026, 12:22 IST
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रायपुर रेलवे स्टेशन पर टिकट जांच के नाम पर ग्रामीण और कम जानकारी रखने वाले यात्रियों को निशाना बनाने का मामला सामने आया है। चेकिंग स्टाफ पर टारगेट पूरा करने का दबाव रहता है। इसके कारण सीधे-साधे यात्रियों से फाइन वसूलने की कोशिश की जाती है।

समझें क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ के रायपुर रेलवे स्टेशन पर टिकट जांच का एक अनोखा नजारा देखा गया। यहां टीटी विशेष रूप से ग्रामीण और सीधे-साधे दिखने वाले यात्रियों को रोकते हैं। पूछताछ के बहाने यात्रियों से फाइन वसूलने की स्थिति बनाने की कोशिश होती है। रोज सफर करने वाले दैनिक यात्रियों के लिए यह दृश्य बिल्कुल आम हो चुका है। चेकिंग स्टाफ पर रेलवे प्रबंधन की तरफ से टारगेट पूरा करने का भारी दबाव रहता है।

टीटी का ध्यान ग्रामीणों पर

रायपुर रेलवे स्टेशन पर इन दिनों टिकट जांच को लेकर एक अलग ही खेल चल रहा है। स्टेशन के मुख्य हॉल में सुबह से ही टीटी सक्रिय हो जाते हैं। उनकी नजरें लगातार आने-जाने वाले मुसाफिरों पर टिकी रहती हैं। लेकिन इस जांच प्रक्रिया में एक अजीब बात सामने आई है। टिकट जांच करने वाली टीम का ध्यान सबसे ज्यादा ग्रामीण परिवेश के लोगों पर होता है।

पहनावे से यात्रियों की पहचान

स्टेशन के पूछताछ काउंटर के सामने सुबह करीब साढ़े दस बजे का वक्त था। वहां तीन महिला टीटी रसीद बुक लेकर खड़ी थीं। वह हॉल में आने-जाने वाले हर शख्स को गौर से देख रही थीं। तभी वहां एक परिवार सिर पर सामान रखे पहुंचता है। उनका पहनावा देखकर साफ लग रहा था कि वे ग्रामीण इलाके से हैं।

महिला टीटी तुरंत उस परिवार के पास पहुंच जाती हैं। उनसे पूछा जाता है कि उन्हें कहां जाना है। परिवार की महिला बताती है कि वे पुणे जा रहे हैं। इतने में दूसरी महिला टीटी भी वहां आ जाती हैं। वे ट्रेन में भारी भीड़ होने की बात कहने लगती हैं। इसके बाद टिकट और फाइन को लेकर बातचीत शुरू हो जाती है।

समझदारी से बचा परिवार

ग्रामीण परिवार रेलवे स्टेशन के इस माहौल को भांप जाता है। वे तुरंत अपनी बात को सुधारते हैं। वे बताते हैं कि उन्हें पुणे नहीं बल्कि शिरडी जाना है। शिरडी का नाम सुनते ही टीटी के तेवर बदल जाते हैं। इसके बाद बातचीत का रुख पूरी तरह बदल जाता है। टीटी उन्हें पहले काउंटर से टिकट लेने की सलाह देती हैं। फिर उन्हें वहां से आगे जाने के लिए कह दिया जाता है।

युवकों को रोकने की कोशिश

टीटी की नजरें पूरे हॉल में लगातार घूमती रहती हैं। कुछ देर बाद एक युवती ट्रॉली बैग लेकर वहां से गुजरती है। वह आधुनिक पहनावे में थी। टीटी उससे टिकट मांगती हैं। युवती तुरंत अपना टिकट दिखा देती है। टिकट देखने के बाद उसे बिना किसी अतिरिक्त पूछताछ के जाने दिया जाता है।

इसके तुरंत बाद दो युवक वहां आते हैं। उनके गले में पारंपरिक गमछा पड़ा हुआ था। वे प्लेटफार्म की तरफ बढ़ रहे थे। महिला टीटी उन्हें बीच में ही रोक लेती हैं। युवकों से टिकट दिखाने के लिए कहा जाता है। युवक अपना टिकट दिखा देते हैं। इसके बावजूद उनसे पूछताछ जारी रहती है। उनके साथ फाइन काटने की स्थिति बनाने का प्रयास किया जाता है।

टारगेट पूरा करने का दबाव

रायपुर स्टेशन पर रोज सफर करने वाले लोग इस स्थिति से वाकिफ हैं। उनके लिए यह कोई नया नजारा नहीं है। आम यात्री अपनी भागदौड़ में इस पर ध्यान नहीं देते हैं। लेकिन कई जागरूक यात्रियों ने इस पर अपनी चिंता जताई है। उनका कहना है कि कम पढ़े-लिखे लोग आसानी से डर जाते हैं।

यात्रियों के अनुसार ग्रामीण लोग नियमों से अनजान होते हैं। इसी वजह से वे चेकिंग स्टाफ के आसान निशाने पर आ जाते हैं। दरअसल रेलवे टिकट चेकिंग स्टाफ पर हर महीने निर्धारित लक्ष्य पूरा करने का दबाव रहता है। उन्हें एक निश्चित राशि फाइन के रूप में वसूलनी होती है। इसी दबाव के कारण ज्यादा फाइन वाले मामलों की तलाश की जाती है।

FAQ

  1. भारतीय रेलवे में टीटीई (TTE) का फुल फॉर्म क्या होता है और इनका मुख्य काम क्या है?
    उत्तर: रेलवे में टीटीई का फुल फॉर्म 'ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर' (Traveling Ticket Examiner) होता है। इनका मुख्य काम ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों के टिकट की जांच करना, पहचान पत्र देखना और बिना टिकट यात्रा करने वालों पर जुर्माना लगाना है।
  2. रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर टिकट जांचने वाले रेलकर्मी को क्या कहते हैं?
    उत्तर: रेलवे स्टेशन के प्रवेश द्वार, निकास द्वार या प्लेटफार्म पर टिकट जांच करने वाले रेलकर्मी को टीसी यानी 'टिकट कलेक्टर' (Ticket Collector - TC) कहा जाता है। टीटीई (TTE) चलती ट्रेन में टिकट चेक करते हैं, जबकि टीसी (TC) स्टेशन परिसर में तैनात रहते हैं।
  3. बिना टिकट यात्रा करने पर रेलवे नियमों के तहत न्यूनतम कितना जुर्माना देना पड़ता है?
    उत्तर: रेलवे एक्ट की धारा 138 के तहत, यदि कोई यात्री बिना टिकट या गलत टिकट पर यात्रा करते हुए पकड़ा जाता है, तो उससे तय दूरी का किराया और न्यूनतम ₹250 का जुर्माना (Fine) वसूला जाता है। जुर्माना न देने पर जेल या कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

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