जग्गी हत्याकांड हाईकोर्ट में रिओपन, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सुनवाई शुरू
NEWS IN SHORT
- जग्गी हत्याकांड हाईकोर्ट में फिर शुरू हुई सुनवाई
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर खुला जग्गी मर्डर केस
- अमित जोगी की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, 1 अप्रैल को पेशी
- 23 साल पुराना मर्डर केस फिर चर्चा में
- सीबीआई की अपील पर हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान
NEWS IN DETAIL
Raipur : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड केस को हाईकोर्ट में फिर ओपन किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले की सुनवाई आज बुधवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच में हुई, जिसमें सतीश जग्गी भी उपस्थित थे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 1 अप्रैल की तारीख तय की है।
क्या है जग्गी हत्याकांड?
यह हत्याकांड 4 जून 2003 को हुआ था, जब एनसीपी नेता रामावतार जग्गी को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 31 अभियुक्त बनाए गए थे, जिनमें से अमित जोगी को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। इसके बाद, रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेजते हुए उसकी मेरिट पर फिर से सुनवाई करने का आदेश दिया था।
सीबीआई जांच और आरोप
हत्याकांड के बाद शुरू में पुलिस की जांच में पक्षपात और असंतोष के आरोप लगे थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने मामला सीबीआई को सौंपा।सीबीआई की जांच में अमित जोगी समेत कई लोगों पर हत्या और साजिश का आरोप लगाया गया। सीबीआई ने आरोप लगाया कि हत्या की साजिश तत्कालीन राज्य सरकार के प्रभाव में रची गई थी, और सबूत मिटा दिए गए थे।
हाईकोर्ट में सुनवाई
इस हत्याकांड में दो साल पहले डिवीजन बेंच ने दोषियों की अपील को खारिज कर दिया था, और आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। लेकिन अब सीबीआई की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को फिर से हाईकोर्ट भेजा है। अदालत में अब 1 अप्रैल को मामले की सुनवाई होगी, और यह पता लगाया जाएगा कि मामले में और किन लोगों को दोषी ठहराया जा सकता है।
अमित जोगी को जमानत की आवश्यकता
कानूनी जानकारों के अनुसार, चूंकि अमित जोगी को पहले सीबीआई ने आरोपी माना था और वे जेल भी गए थे, अब मामले के रिओपन होने पर उन्हें जमानत के लिए आवेदन करना पड़ेगा। उन्होंने इस मामले पर अपना बयान साझा किया है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
रामावतार जग्गी की हत्या छत्तीसगढ़ के राजनीतिक माहौल से भी जुड़ी थी। 2003 में विधानसभा चुनावों से पहले, जब कांग्रेस से नाराज होकर विद्याचरण शुक्ल ने एनसीपी जॉइन किया था, तो यह घटनाक्रम और भी पेचीदा हो गया था। जग्गी की हत्या के कुछ दिन पहले ही एनसीपी की एक बड़ी रैली होनी थी, जिसमें शरद पवार समेत पार्टी के बड़े नेता शामिल होने वाले थे।
निष्कर्ष
यह हत्याकांड छत्तीसगढ़ के राजनीति और कानून व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े करता है। अब हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई से इस मामले में नया मोड़ आ सकता है। पुलिस और सीबीआई दोनों ने इस मामले में जांच की है, और अदालत अब यह तय करेगी कि सच्चाई क्या है।
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