जनवरी से नए रूप में आरएसएस, रायपुर-बिलासपुर में बंटेगा छत्तीसगढ़ प्रांत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) छत्तीसगढ़ में अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। जनवरी 2027 से प्रदेश में संघ की नई संरचना लागू होगी। इसके तहत मौजूदा छत्तीसगढ़ प्रांत की जगह रायपुर और बिलासपुर संभाग के रूप में संगठन का पुनर्गठन किया जाएगा।
इसी के साथ राजधानी रायपुर में करीब 300 नए स्थानों पर संघ की शाखाएं शुरू करने की तैयारी है।संघ की ओर से संगठन के विस्तार और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए यह बदलाव किया जा रहा है। इसके तहत नए स्थानों पर शाखाएं शुरू करने के साथ स्वयंसेवकों की संख्या बढ़ाने और सामाजिक संपर्क अभियानों को गति देने पर भी जोर रहेगा।
जनवरी से नया रूप:
संघ के छत्तीसगढ़ प्रांत के संगठनात्मक ढांचे में यह बदलाव लंबे समय बाद किया जा रहा है। जनवरी से लागू होने वाली नई व्यवस्था के तहत संघ के कामकाज और निर्णय प्रक्रिया को अधिक विकेंद्रीकृत करने की योजना है। इसके लिए प्रदेश को दो हिस्सों में बांटकर रायपुर और बिलासपुर संभाग बनाए जाएंगे।
34 जिलों में 2188 स्थानों पर शाखाएं:
संघ की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक वर्तमान में प्रदेश के 34 जिलों में 1643 स्थानों पर 2188 शाखाएं संचालित हो रही हैं। इनमें विद्यार्थी स्वयंसेवकों की 1246 शाखाएं, महाविद्यालयीन स्तर की 124 शाखाएं, तरुण व्यवसायियों की 482 शाखाएं और प्रौढ़ व्यवसायियों की 192 शाखाएं शामिल हैं।इसके अलावा बाल शाखाओं की संख्या 144 है।
संघ की ओर से 133 साप्ताहिक मिलन भी संचालित किए जा रहे हैं। वरिष्ठ स्वयंसेवकों के लिए 155 मिलन और संघ मंडलियों की संख्या 632 बताई गई है।संघ के सेवा कार्यों से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 193 शाखायुक्त सेवा बस्तियां, 1053 शाखायुक्त मंडल, 55 शाखायुक्त नगर और 55 न्यूनतम दो शाखाओं वाले नगर हैं।
रायपुर में संगठन विस्तार पर विशेष फोकस:
नई व्यवस्था के तहत राजधानी रायपुर में संघ की गतिविधियों के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। करीब 300 नए स्थानों पर शाखाएं शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को संगठन की गतिविधियों से जोड़ने और नियमित संपर्क बढ़ाने की योजना है।
संघ के नए संगठनात्मक ढांचे में सामाजिक समरसता और संपर्क अभियान, संगठन विस्तार, नई शाखाओं की संख्या बढ़ाना, डिजिटल माध्यमों से लोगों को जोड़ना तथा सेवा और सामाजिक गतिविधियों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। सामाजिक चुनौतियों पर वैचारिक मंथन को भी संगठन की गतिविधियों में शामिल किया जाएगा।
10 अक्टूबर को शताब्दी समारोह का समापन:
RSS अपने शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के तहत प्रदेश में विभिन्न गतिविधियां चला रहा है। संघ के शताब्दी वर्ष समारोह का समापन 10 अक्टूबर को प्रस्तावित है। इससे पहले 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक राजधानी रायपुर में 300 नए स्थानों पर शाखाएं शुरू करने की तैयारी की गई है।संघ के अनुसार प्रदेश में सामाजिक संपर्क अभियान के तहत बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने घर-घर संपर्क भी किया है। अभियान के दौरान संघ की 100 वर्ष की यात्रा, भारत माता का चित्र, समाज परिवर्तन से जुड़ी पुस्तिकाएं और अन्य सामग्री लोगों तक पहुंचाई गई।
नए ढांचे में बढ़ेगा विकेंद्रीकरण:
संघ के संगठनात्मक बदलाव के पीछे कार्य विस्तार और निर्णय प्रक्रिया का विकेंद्रीकरण प्रमुख उद्देश्य बताया गया है। नई व्यवस्था में स्थानीय स्तर पर संगठन की गतिविधियों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने की कोशिश होगी। नई संरचना के लागू होने के बाद अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में छत्तीसगढ़ से प्रतिनिधित्व का स्वरूप भी बदलेगा। रिपोर्ट के मुताबिक अब प्रदेश से प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ेगी। संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संगठन देशभर में अपनी शाखाओं, सामाजिक संपर्क और सेवा गतिविधियों के विस्तार पर जोर दे रहा है।
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