आरएसएस के संगठन में हो सकता है बदलाव, प्रांत की जगह प्रदेश प्रचारक पर विचार
Raipur. शताब्दी वर्ष में संघ का बड़ा संगठनात्मक बदलाव हो सकता है। सूत्रों की मानें तो आरएसएस प्रांत प्रचारक का पद खत्म कर राज्य प्रचारक बना सकता है। इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। प्रतिनिधि सभा की बैठक में इस फैसला संभव है।
संघ में हो सकता है बदलाव:
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपने शताब्दी वर्ष के दौरान संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव कर सकता है। सूत्रों की मानें तो अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में संघ के ढांचे में कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन प्रस्तावित हैं। जिन पर चर्चा के बाद अंतिम फैसला लिया जा सकता है। माना जा रहा है कि इन बदलावों के जरिए संघ अपने संगठन को अधिक प्रभावी और आधुनिक प्रशासनिक ढांचे के अनुरूप बनाना चाहता है।
प्रांत की जगह प्रदेश प्रचारक:
प्रस्तावित बदलावों में सबसे प्रमुख सुझाव प्रांत प्रचारक के पद को समाप्त कर उसकी जगह राज्य प्रचारक का पद सृजित करने का है। इसके साथ ही कमिश्नरी स्तर पर संभाग प्रचारक की नियुक्ति करने की योजना भी विचाराधीन है। संघ के सूत्रों के अनुसार इन बदलावों का उद्देश्य संगठन की कार्यप्रणाली को और अधिक व्यवस्थित करना और विभिन्न राज्यों में कार्य का बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है।
हरियाणा में बैठक:
हरियाणा के समालखा में 13 से 15 मार्च तक होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में इन प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा होगी। इस बैठक में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के अलावा उसके विभिन्न आनुषांगिक संगठनों के अध्यक्ष और संगठन मंत्री भी शामिल होंगे। संघ के संगठनात्मक ढांचे में किसी भी बड़े बदलाव के लिए यही मंच अंतिम निर्णय लेने का अधिकार रखता है।
बैठक में हो सकता है विचार:
संघ से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यदि प्रतिनिधि सभा में इन प्रस्तावों पर सर्वसम्मति बन जाती है तो शताब्दी वर्ष के दौरान ही इन परिवर्तनों को लागू किया जा सकता है। इससे संघ के विभिन्न स्तरों पर काम कर रहे प्रचारकों को नई जिम्मेदारियां भी मिल सकती हैं।
नितिन नबीन होंगे शामिल:
इस बार की बैठक का एक और खास पहलू यह होगा कि नितिन नवीन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में पहली बार इसमें शामिल होंगे। माना जा रहा है कि वे पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए संघ से अधिक प्रचारकों की मांग भी कर सकते हैं। बीजेपी में संगठन मंत्री का पद परंपरागत रूप से संघ के वरिष्ठ प्रचारकों को दिया जाता है, इसलिए संघ और बीजेपी के बीच इस मुद्दे पर चर्चा की संभावना भी जताई जा रही है।
राज्यों में संगठन मंत्री:
वर्तमान समय में कुछ राज्यों में बीजेपी के संगठन मंत्री के पद खाली बताए जा रहे हैं। प्रचारकों की सीमित संख्या के कारण इन पदों को भरने में कठिनाई हो रही है। यदि संघ अपने संगठनात्मक ढांचे में प्रस्तावित बदलाव करता है और बड़ी संख्या में नए दायित्व तय करता है, तो इससे बीजेपी समेत अन्य आनुषांगिक संगठनों को भी अनुभवी कार्यकर्ता मिल सकते हैं।
क्या कहते हैं जानकार:
संघ के जानकारों का मानना है कि प्रांत प्रचारक का पद समाप्त कर राज्य प्रचारक का पद बनाए जाने से संगठन की संरचना अधिक स्पष्ट और प्रशासनिक सीमाओं के अनुरूप हो जाएगी। इसके साथ ही कमिश्नरी स्तर पर संभाग प्रचारक की नियुक्ति से जमीनी स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियों को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।
इन संभावित बदलावों के बाद वर्तमान में कार्यरत कई प्रांत प्रचारकों को नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। कुछ को राज्य प्रचारक बनाया जा सकता है, जबकि अन्य को संघ के विभिन्न आनुषांगिक संगठनों में भेजा जा सकता है। इन संगठनों में बीजेपी के अलावा छात्र, श्रमिक और सामाजिक क्षेत्रों में काम करने वाले कई संगठन शामिल हैं।
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