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पांच पॉइंट में समझें पूरा मामला...
मध्य प्रदेश में 'प्रांत प्रचारक' का पद समाप्त कर अब 'संभागीय प्रचारक' की नई व्यवस्था लागू की जाएगी।
इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य संगठन की जमीनी पकड़ को और अधिक प्रभावी और असरकारक बनाना है।
नई प्रणाली से संभागीय स्तर पर स्थानीय मुद्दों और समुदायों के साथ सीधा संवाद और समन्वय आसान होगा।
संघ अपनी पारंपरिक कार्यशैली बदलते हुए अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपनी सक्रियता और पहुंच बढ़ाएगा।
डॉ. मोहन भागवत के नेतृत्व में संघ अपनी सामाजिक गतिविधियों को पारदर्शी तरीके से जन-जन तक पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं। समय के साथ संघ अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव करने जा रहा है। मध्य प्रदेश में संघ का यह नया ढांचा आने वाले समय में संगठन की पहुंच को और मजबूत करेगा।
इस बदलाव के तहत प्रांत प्रचारक का पद समाप्त होगा और इसकी जगह संभागीय प्रचारक का पद बनाया जाएगा। यह बदलाव संघ की लंबे समय की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे संघ कार्य को और असरकारक बनाया जाएगा।
RSS संगठन में बदलाव, मध्य प्रदेश में नई व्यवस्था
RSS ने अपने 100 वर्षों के अनुभव को देखते हुए मध्यप्रदेश में अपने संगठनात्मक ढांचे में परिवर्तन का निर्णय लिया है। अब संघ के संगठन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रांत प्रचारक का पद समाप्त कर दिया जाएगा।
इसकी जगह संभागीय प्रचारक का पद बनाया जाएगा। इससे संघ की जमीनी पकड़ और भी मजबूत होगी, क्योंकि संभागीय प्रचारक स्थानीय मुद्दों पर अधिक प्रभावी रूप से काम कर सकेंगे।
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बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?
संघ के जानकारों का कहना है कि यह बदलाव अचानक नहीं हुआ है। इसके पीछे कई सालों की रिसर्च, आंतरिक मूल्यांकन और सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों का अध्ययन किया गया है।
संघ यह महसूस कर रहा है कि बढ़ती जनसंख्या और बदलते सामाजिक समीकरणों के बीच संगठन को और लचीला तथा सक्रिय बनाना जरूरी है। जब नेतृत्व को स्थानीय स्तर पर मजबूती मिलेगी, तो संगठन को बेहतर ढंग से चलाना और समाज से संवाद करना आसान होगा।
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स्थानीय समुदायों पर असर
संघ की यह नई प्रणाली स्थानीय समुदायों पर भी सकारात्मक असर डालने वाली है। बदलाव के बाद संघ के कार्यकर्ता सीधे स्थानीय नेताओं से जुड़कर कार्य करेंगे। इससे संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी भी आसान हो जाएगी। समाज सेवा, विचार प्रसार और संपर्क अभियानों को नई गति मिलेगी।
संघ का मानना है कि इस तरह से संगठन की जमीनी पकड़ मजबूत होगी, जिससे हर गांव और कस्बे तक संघ का प्रभाव बढ़ेगा। RSS संगठनात्मक बदलाव
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सोशल मीडिया पर RSS की नई रणनीति
संघ अपनी कार्यशैली में भी बदलाव लाने जा रहा है। अब तक RSS को एक ऐसे संगठन के रूप में जाना जाता था, जो बिना किसी प्रचार-प्रसार के समाज सेवा करता था। लेकिन अब संघ ने सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता बढ़ाने का निर्णय लिया है।
संघ प्रमुख मोहन भागवत देशभर में संघ की सामाजिक गतिविधियों को जनता के सामने लाने के लिए विभिन्न मंचों से संवाद कर रहे हैं। इसके अलावा, संघ अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का उपयोग भी करेगा ताकि उसके कार्य समाज के बड़े हिस्से तक पहुंच सकें।
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