आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सरकारी कर्मचारी नहीं, सावित्री ठाकुर के बयान पर भड़का संघ
समझें क्या है पूरा मामला
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने बिलासपुर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सरकारी कर्मचारी नहीं हैं। उन्होंने कहा ये समाज सेविकाएं हैं। इस बयान के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संघ ने कड़ी नाराजगी जताई। संघ ने मंत्री से बयान वापस लेने और मुद्दे पर पुनर्विचार करने की मांग की। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के नियमितीकरण और न्यूनतम वेतन की मांग पुरानी है।
मंत्री ने क्या कहा
बिलासपुर दौरे के दौरान सावित्री ठाकुर ने पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया। उन्होंने साफ कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका मूल रूप से समाज सेवा की है। मंत्री ने कहा कि वे सरकारी कर्मचारी नहीं हैं और यह बात शुरू से ही स्पष्ट रही है। वे केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग करती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई विभाग उनसे कार्य लेता है तो संबंधित विभाग की ओर से उसके एवज में भुगतान किया जाता है। मंत्री ने यह भी जोड़ा कि वर्तमान सरकार ने कार्यकर्ताओं के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि की है।
संघ ने क्यों जताई नाराजगी
मंत्री के इस बयान के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संघ ने कड़ा विरोध जताया। संघ के पदाधिकारियों ने सवाल उठाया कि यदि ये कार्यकर्ता वास्तव में समाज सेविकाएं हैं तो उनसे विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का दायित्व क्यों निभवाया जा रहा है।
प्रांतीय संयोजक देवेंद्र पटेल ने मंत्री से अपना बयान वापस लेने की मांग की। उन्होंने इस मुद्दे पर पुनर्विचार करने की भी अपील की।
नियमितीकरण की मांग कितनी पुरानी है
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकारी दर्जा देने और न्यूनतम वेतन लागू करने की मांग वर्षों पुरानी है। देशभर में लाखों आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इस मांग को लेकर कई बार प्रदर्शन कर चुकी हैं।
इन कार्यकर्ताओं को अभी मानदेय मिलता है जो न्यूनतम वेतन से बहुत कम है। सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिलने पर उन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सुविधाएं मिल सकती हैं।
काम क्या करती हैं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं पोषण, स्वास्थ्य और बच्चों की शिक्षा से जुड़ी केंद्र और राज्य सरकार की योजनाएं जमीन पर लागू करती हैं। टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल और कुपोषण जैसे मुद्दों पर इनकी भूमिका अहम होती है।
संघ का तर्क है कि इतना जरूरी सरकारी काम करने वाली महिलाओं को समाज सेविका कहना उनके योगदान को कम आंकना है।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा
केंद्रीय मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी बहस शुरू हो गई है। एक पक्ष इसे आंगनबाड़ी व्यवस्था की मूल संरचना से जोड़कर देख रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे कार्यकर्ताओं की वर्षों पुरानी मांगों की अनदेखी मान रहा है।
अब यह देखना होगा कि इस विवाद पर केंद्र सरकार या महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से कोई स्पष्टीकरण आता है या नहीं।
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