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News in Short
- 19 जनवरी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की याचिका।
- याचिका में समान काम के लिए समान वेतन और तृतीय श्रेणी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग।
- राज्य शासन द्वारा कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी मानने और सुविधाएं देने की मांग।
- याचिका में कहा गया है कार्यकर्ताओं से अतिरिक्त काम कराया जा रहा है जो कि सेवा शर्तों के विपरीत है।
- जस्टिस विशाल धगट ने राज्य शासन को नोटिस जारी किया और चार सप्ताह में जवाब मांगा।
News in Detail
एक के बाद एक कर्मचारी सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं। मामले हाईकोर्ट पहुंच रहे हैं और सरकार की परेशानी भी बढ़ती जा रही है। प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने सरकार से समान काम के बदले समान वेतन और तृतीय श्रेणी कर्मचारी का दर्जा मांगा।
सोमवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की याचिका पर जस्टिस विशाल धगट की कोर्ट में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब तलब किया।
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संगीता श्रीवास्तव की याचिका पर सुनवाई
जबलपुर हाईकोर्ट में 19 जनवरी को संगीता श्रीवास्तव की याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका मध्यप्रदेश आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संघ की महासचिव द्वारा पेश की गई थी। समान काम के लिए समान वेतन और तृतीय श्रेणी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग पर याचिका पेश की गई। इसके समर्थन में एडवोकेट मोहम्मद अली और अमित रायजादा ने तर्क दिए।
एडवोकेट ने कहा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सरकारी कर्मचारी की तरह उनसे काम कराया जा रहा है। उनसे बीएलओ के दायित्व भी सौंपे जाते हैं। उनकी सेवा शर्तों के बाहर काम तो कराया जाता है। लेकिन सरकार उन्हें सरकारी कर्मचारियों की तरह सुविधाएं और वेतन नहीं दे रही है। जबकि उन्हें भी नियमित वेतन, वेतनवृद्धि, अवकाश सुविधाएं, टीए, डीए, एचआरए मिलना चाहिए। सरकार ने भी इन सुविधाओं के संबंध में आश्वासन दिया है।
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चार सप्ताह में पेश करना है जवाब
हाईकोर्ट जस्टिस विशाल धगट ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई के बाद को नोटिस जारी किया है। याचिका में सरकार से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नियमित कैडर में शामिल न करने, अतिरिक्त काम कराने और नियमित सेवा जैसी सुविधाएं न देने पर जवाब तलब किया गया है। सरकार को अपना जवाब चार सप्ताह में हाईकोर्ट में पेश करना होगा।
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