छत्तीसगढ़ में इस दिन होगी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल, कहा मांग पूरी नहीं हुई तो घेराव करेंगे

छत्तीसगढ़ की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं बहुत कम मानदेय पर काम कर रही हैं। उन्हें कोई पेंशन या अन्य लाभ नहीं मिल रहा है। इसे लेकर 26 और 27 फरवरी हड़ताल होगी। इसके बाद भी मांगें पूरी नहीं हुईं तो विधानसभा का घेराव किया जाएगा।

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Aman Vaishnav
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छत्तीसगढ़ की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अपनी समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रही हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें अन्य विभागों के काम भी करने के लिए मजबूर किया जाता है। कई बार तो उन्हें सिर्फ भीड़ बढ़ाने के लिए सरकारी और राजनीतिक कार्यक्रमों में बुलाया जाता है। इसके अलावा अधिकारी उन्हें धमकी देते हैं कि वे अपनी समस्याएं उठाएंगे तो नौकरी से निकाल दिया जाएगा।

क्या है पूरा मामला? 

बता दें कि केंद्र सरकार सहायिका को सिर्फ 2250 रुपए और कार्यकर्ता को 4500 रुपए को देती है। बाकी रकम राज्य सरकार देती है। यानी कार्यकर्ताओं को कुल 10 हजार रुपए और सहायिकाओं को 5 हजार रुपए ही मिलते हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार की तरफ से कोई पेंशन, ग्रेच्युटी या समूह बीमा भी नहीं है।

किसी कर्मचारी के बेटे-बेटी की शादी हो, या फिर खुद की लंबी बीमारी हो। परिवार के किसी सदस्य को कोई बीमारी हो। उसकी देखभाल करनी हो तो ऐसे में कोई भी छुट्टी की सुविधा नहीं मिलती है।

भीड़ बढ़ाने के लिए बुलाते हैं

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं का कहना है की हमारी नियुक्ति आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए होती है। साथ ही महिला बाल विकास विभाग के कामों के लिए होती है। अब हमसे बहुत से अन्य विभागों के काम भी करवाए जाते हैं। हैरानी की बात तो ये है कि हमें सभाओं में भीड़ बढ़ाने के लिए भी बुलाया जाता है। इसके अलावा हमारा मानदेय भी कम कर दिया गया है।

छत्तीसगढ़ की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं काम के बोझ और अफसरों की गुलामी से परेशान हैं। इन्होंने एक बार फिर से एकजुट होकर सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रही हैं।

संगठन पदाधिकारी की राय क्या है? 

कई संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि काम की बात आती है तो सरकार हमें शासकीय कर्मचारियों से भी ज्यादा जिम्मेदार मानती है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को अब एक बहुउद्देशीय कार्यकर्ता बना दिया गया है। अब हमारे ऊपर हर विभाग के अधिकारियों का नियंत्रण थोप दिया गया है। हम भी इंसान हैं एक समय में इतना सारा काम कैसे करें?

जिसका काम नहीं होता वही आंख दिखाने लगता है। कार्रवाई कि अनुसंशा कर देता है। विभागीय अधिकारी भी हमें सपोर्ट नहीं करते हैं। छोटी-छोटी बातों पर मानदेय काटने की धमकियां दी जाती हैं। जब हम आवाज उठाते हैं तो नौकरी से निकालने की धमकी देते हैं।

दो दिन तक प्रदर्शन और रैली

पहले चरण में 26 और 27 फरवरी को सभी जिला मुख्यालयों में काम बंद रहेगा। साथ ही हड़ताल, धरना, रैली और प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद कलेक्टर के जरिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा। फिर भी मांगें पूरी नहीं हुईं तो 9 मार्च को राजधानी रायपुर में एक बड़ी प्रांतीय धरना रैली होगी। साथ ही विधान सभा का घेराव किया जाएगा। यह जानकारी छत्तीसगढ़ आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ के संस्थापक और प्रांतीय संयोजक ने दी है।

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