शिक्षा विभाग का नया आदेश : अटैचमेंट खत्म होते ही प्रतिनियुक्ति का नया खेल

VINAY VERMA | Aug 07, 2026, 12:23 IST
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स्कूल शिक्षा विभाग ने अटैचमेंट खत्म होने के बाद कलेक्ट्रेट और कमिश्नर कार्यालयों में बाबुओं की नियुक्ति के लिए प्रतिनियुक्ति का नया रास्ता निकाला है, जिससे स्कूलों की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

RAIPUR : गुरुजी और कर्मचारियों के अटैचमेंट समाप्त करने के आदेश से स्कूल शिक्षा विभाग खुद पलट रहा है। हालांकि इस बार विभाग ने नई तरकीब लगाई है। विभाग के सचिव ने कलेक्टर और संभाग कमिश्नरों को पत्र लिखकर प्रतिनियुक्ति पर बाबू और प्यून मांगने की तरकीब सुझाई है। सचिव ने कहा है कि अटैचमेंट समाप्त होने से कलेक्टर और कमिश्नर ऑफिस का काम प्रभावित हो रहा है तो राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के जरिए प्रतिनियुक्ति पर बाबू और प्यून की मांग की जाए। लेकिन सवाल यही है कि क्या इससे स्कूल प्रभावित नहीं होंगे? या अटैचमेंट करने का यह दूसरा तरीका है।



अब प्रतिनियुक्ति का रास्ता

यहीं से कहानी में नया ट्विस्ट आता है। स्कूल शिक्षा विभाग ने गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति पर लेने का रास्ता खोल दिया है। यानी जिन कर्मचारियों को अटैचमेंट खत्म होने के बाद स्कूल लौटना था, उन्हें अब स्वीकृत सेटअप के रिक्त पदों के खिलाफ प्रतिनियुक्ति पर कलेक्ट्रेट या कमिश्नर कार्यालय में रखा जा सकता है।



सीधा प्रस्ताव नहीं, दूसरा दरवाजा

हालांकि इसके लिए सीधा स्कूल शिक्षा विभाग को प्रस्ताव नहीं भेजा जाएगा। कलेक्ट्रेट या संभागायुक्त कार्यालयों को अपना प्रस्ताव सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के माध्यम से स्कूल शिक्षा विभाग भेजना होगा। यानी अटैचमेंट का रास्ता बंद हुआ तो प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया सामने आ गई।



शिक्षा विभाग


स्कूल खाली हुआ तो फंसेंगे

विभाग ने इस व्यवस्था के साथ शर्त भी लगाई है। किसी कर्मचारी को प्रतिनियुक्ति पर भेजने से पहले यह देखना होगा कि उसकी मूल शैक्षणिक संस्था कर्मचारी विहीन न हो। सवाल यही है कि कागज पर लगी यह शर्त जमीन पर कितनी सख्ती से लागू होगी?



पुराना खेल, नया नाम?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अटैचमेंट खत्म होने के बाद प्रतिनियुक्ति के नाम पर वही पुरानी व्यवस्था लौटेगी? सालों तक स्कूलों के बाबू और भृत्य कलेक्ट्रेट में काम करते रहे। अब जरूरत के नाम पर उन्हें फिर दफ्तरों में रखने का रास्ता खुल रहा है।



सीधी भर्ती क्यों नहीं?

अगर कलेक्ट्रेट और कमिश्नर कार्यालयों में स्वीकृत पद खाली हैं तो नियमित भर्ती क्यों नहीं होती? प्रशासनिक काम चलाने के लिए हर बार स्कूल शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की तरफ क्यों देखा जाता है? यही सवाल इस पूरी व्यवस्था पर सबसे बड़ा निशान खड़ा करता है।



बाबू कलेक्ट्रेट में, स्कूल में कौन?

स्कूलों में लिपिक और भृत्य भी व्यवस्था का जरूरी हिस्सा हैं। रिकॉर्ड, छात्रवृत्ति, सेवा पुस्तिका, वेतन और दूसरे दफ्तरी काम इन्हीं के भरोसे चलते हैं। ऐसे में कर्मचारियों को लगातार मूल संस्था से हटाने का असर स्कूलों की व्यवस्था पर पड़ना तय है।



द सूत्र के सवाल

स्वीकृत पद खाली हैं तो भर्ती क्यों नहीं?


अटैचमेंट खत्म हुआ तो प्रतिनियुक्ति क्यों?


क्या चहेतों को नया रास्ता मिलेगा?


स्कूलों में स्टाफ की कमी कौन देखेगा?


कलेक्ट्रेट की कमी का बोझ स्कूल क्यों उठाएं?



FAQ

  1. क्या स्कूलों के बाबू अब फिर से कलेक्ट्रेट और कमिश्नर ऑफिस में काम करेंगे?
    A: हां, अटैचमेंट खत्म होने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रतिनियुक्ति के जरिए इन्हें दफ्तरों में रखने का नया रास्ता निकाल लिया है।
  2. कलेक्ट्रेट में खाली पदों के लिए सीधी भर्ती क्यों नहीं की जा रही है?
    A: नियमित भर्ती करने के बजाय हर बार प्रशासनिक काम चलाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग के कर्मचारियों पर ही निर्भरता दिखाई जा रही है, जिस पर सवाल उठ रहे हैं।
  3. क्या प्रतिनियुक्ति पर जाने से स्कूलों की पढ़ाई और काम पर असर पड़ेगा?
    A: बिल्कुल, स्कूलों से लिपिक और भृत्य हटने से छात्रवृत्ति, वेतन, सर्विस बुक और अन्य जरूरी दफ्तरी काम प्रभावित होना तय है।

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