2010 से अब तक कांग्रेस से बने महापौर, इस बार मेयर के लिए 4 विकल्प
Municipal body and panchayat elections 2024-25 : छत्तीसगढ़ में जल्द ही नगरीय निकाय व पंचायत चुनाव होने वाले हैं। इसके लिए 20 दिसंबर के बाद चुनाव आचार संहिता लागू होने के आसार हैं। विधानसभा का शीतकालीन सत्र खत्म होने के तुरंत बाद आचार संहिता लागू हो जाएगी। इसके साथ ही राजधानी में चुनावी शोर शुरू हो जाएगा। परिसीमन की वजह से इस बार रायपुर मेयर समेत वार्डों का नए सिरे से आरक्षण होगा।
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मेयर बनने के लिए होंगे चार विकल्प
नगरीय निकाय व पंचायत चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण मेयर का रिजर्वेशन होगा। आरक्षण प्रक्रिया में राजधानी को अनारक्षित सामान्य, अनारक्षित महिला, ओबीसी और ओबीसी महिला के चार विकल्प मिलेंगे। चार विधानसभा क्षेत्रों से मिलकर बने रायपुर नगर निगम के मेयर का अलग रुतबा होता है। राजधानी होने के कारण भाजपा-कांग्रेस दोनों के लिए ये सीट खास मायने रखती है। पिछले तीन चुनाव से रायपुर में कांग्रेस का महापौर ही बैठ रहा है। इसलिए इस बार कांग्रेस के लिए ही अपना कब्जा बनाए रखना बड़ी चुनौती है।
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आरक्षण से तय होगा कि इस बार रायपुर निगम को किस वर्ग से महापौर मिलेगा। पिछली बार महापौर का चयन सामान्य अनारक्षित वर्ग से हुआ था। इस हिसाब से इस बार लॉटरी प्रक्रिया में सामान्य अनारक्षित वर्ग की पर्ची नहीं रखनी थी। इस बार परिसीमन हो रहा है, इसलिए रायपुर में नए सिरे से आरक्षण होगा।
बीजेपी-कांग्रेस में दर्जनों दावेदार
इसके लिए चारों विकल्प अनारक्षित सामान्य, अनारक्षित महिला, ओबीसी और ओबीसी महिला की पर्ची से लॉटरी निकाली जाएगी। यानी अनारक्षित सामान्य वर्ग के मेयर का चयन फिर हो सकता है। अनारक्षित सामान्य की लॉटरी निकलने पर रायपुर से चुनाव लड़ने वाले दावेदारों की संख्या बढ़ जाएगी। भाजपा-कांग्रेस दोनों ही पार्टियों से दर्जनों दावेदार चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं।
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FAQ
- छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव कब होने की संभावना है, और आचार संहिता कब लागू होगी?
छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव जल्द ही होने वाले हैं। इसके लिए 20 दिसंबर के बाद आचार संहिता लागू होने की संभावना है। विधानसभा का शीतकालीन सत्र खत्म होते ही आचार संहिता लागू हो जाएगी। - रायपुर नगर निगम के मेयर चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के लिए क्या चुनौती है?
रायपुर नगर निगम के मेयर चुनाव में कांग्रेस के लिए चुनौती है कि वह अपनी जीत की परंपरा को बनाए रखे, क्योंकि पिछले तीन चुनावों में कांग्रेस का महापौर चुना गया है। वहीं, भाजपा के लिए यह सीट महत्वपूर्ण है, और आरक्षण की प्रक्रिया के बाद दोनों पार्टियों से दर्जनों दावेदार तैयार हैं, जिससे मुकाबला कठिन होगा।
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