130 मौतें भी नहीं जगा पा रहीं PHE विभाग को, 10 करोड़ रुपए को कम बता अधिकारी-ठेकेदार नहीं दे रहे ध्यान

VINAY VERMA | Jan 24, 2026, 17:58 IST
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गरियाबंद जिले के सुपेबेड़ा गांव में अशुद्ध और फ्लोराइडयुक्त पानी पीने से अब तक 130 लोगों की मौत हो चुकी है। तेल नदी से 45 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए शुद्ध पानी लाने की योजना को 10 करोड़ की मंजूरी मिलने के बावजूद चार साल से लागू नहीं किया गया।

NEWS IN SHORT

  • गरियाबंद के सुपेबेड़ा में अशुद्ध पानी से अब तक 130 लोगों की मौत हो चुकी है।
  • पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा से किडनी, लीवर और पेट की बीमारियां फैल रही हैं।
  • तेल नदी से 45 किमी पाइपलाइन की योजना बनी, 10 करोड़ रुपए भी स्वीकृत हुए।
  • चार साल बीतने के बावजूद पाइपलाइन के लिए अब तक टेंडर जारी नहीं हुए।
  • शुद्ध पानी न मिलने पर ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।

NEWS IN DETAIL

गरियाबंद के सुपेबेड़ा में अशुद्ध पानी (Contaminated water) पीने से 130 लोगों की जान जा चुकी है फिर भी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग व्यवस्था बनाने रुचि नहीं ले रहा। जबकि पिछली सरकार ने इसका एक समाधान खोज निकाला था। उपाय को पूरा करने के लिए 10 करोड़ रुपए की स्वीकृति भी दे दी गई थी। जिसके तहत पास के तेल नदी से सुपेबेड़ा तक पाइप लाइन बिछाना था। जिससे वहां का शुद्ध पानी सुपेबेड़ा लाया जा सके। लेकिन विभाग की चाल पुराने ढर्रे पर ही चल रही है। विभाग के मंत्री अरुण साव अभी अधिकारियों से जानकारी लेने की ही बात दोहरा रहे।



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अशुद्ध पानी ने ली 130 जानेें

सुपेबेड़ा में उपलब्ध पानी में फ्लोराइड और अन्य हानिकारक तत्वों की मात्रा अधिक बताई जाती है। इसी कारण गांव (Supebeda) में किडनी, लीवर और पेट से जुड़ी बीमारियां आम हो चुकी हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक हर घर में कोई न कोई सदस्य गंभीर बीमारी से पीड़ित है। इलाज पर भारी खर्च और बार-बार होने वाली मौतों ने गांव को भीतर से तोड़ दिया है।



130 मौत फिर भी प्रशासनिक संवेदनहीन

ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार मौतों की खबरें सामने आने के बावजूद प्रशासन ने अब तक ठोस कदम नहीं उठाए। कई बार अधिकारियों ने गांव का दौरा किया, पानी के सैंपल लिए गए और रिपोर्ट तैयार हुई, लेकिन उसके बाद फाइलें दफ्तरों में धूल खाती रहीं। सवाल यह है कि आखिर 130 मौतें भी सिस्टम को झकझोरने के लिए काफी क्यों नहीं रहीं।



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स्थायी समाधान 45 किमी पाइपलाइन

तकनीकी विशेषज्ञों और विभागीय रिपोर्टों के मुताबिक सुपेबेड़ा की जल समस्या का स्थायी समाधान नजदीक के तेल नदी से 45 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाना है। इसके जरिए गांव तक शुद्ध पेयजल पहुंचाया जा सकता है। हालांकि यह योजना 4 साल से प्रस्तावित है, 10 करोड़ रुपए स्वीकृत भी हो चुके हैं, लेकिन आज तक धरातल पर उतर नहीं सकी।



टेंडर प्रक्रिया में लापरवाही

योजना और राशि स्वीकृति के बाद ग्रामीणों शुद्ध पानी पाने की आस जगी थी। लेकिन ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि अधिकारियों ने टेंडर जारी करने में गंभीरता नहीं दिखाई। जबकि सारा ध्यान सुपेबेड़ा में आरो लगवाने, नए हेंडपंप लगवाने में है। इसमें करीब 25 करोड़ रुपए खर्च किया जा चुका है। लेकिन तेल नदी से पाइपलाइन बिछाने के लिए आजतक टेंडर नहीं जारी किए गए।



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कम बजट के कारण ठेकेदार नहीं ले रहे रुचि

इस संबंध में विभाग के मंत्री अरुण साव से बात की उन्होंने बताया कि इस विषय पर अधिकारियों से बात करेंगे लेकिन जहां तक याद आ रहा कि 45 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के लिए 10 करोड़ रुपए की राशि बेहद कम है। इस बजट में काम पूरा करना ठेकेदारों के लिए घाटे का सौदा मान रहे हैं। यही वजह है कि टेंडरों में कोई भी ठेकेदार रुचि नहीं ले रहा। जबकि इससे अधिक पैसे सरकार केवल वैल्कपिक व्यवस्था में लगा चुकी है।



ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी

लगातार हो रही मौतों और पानी की समस्या से परेशान सुपेबेड़ा के ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। उनका साफ कहना है कि अब आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस काम चाहिए।



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सरकार और प्रशासन के सामने बड़ा सवाल

सुपेबेड़ा में 130 लोगों की मौत के बाद भी जल संकट का समाधान न होना सरकार और प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या आने वाले समय में सुपेबेड़ा को शुद्ध पानी मिल पाएगा या यह गांव यूं ही सरकारी लापरवाही की कीमत चुकाता रहेगा।



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