एमपी में जहरीला नलजल: इंदौर से उठी त्रासदी, पूरे प्रदेश तक फैला खतरा

इंदौर में दूषित नलजल से 16 लोगों की मौत हुई, एमपी में पानी की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। कई शहरों में गटर का पानी पीने को मजबूर लोग, पाइपलाइन की हालत चिंताजनक है।

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Ramanand Tiwari
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Poisonous tap water in MP, Tragedy arose from Indore, danger spread to the entire state

Photograph: (the sootr)

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BHOPAL. इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में सरकारी नल से सप्लाई हो रहे दूषित पानी ने 16 लोगों की जान ले ली। इस हादसे के बाद न सिर्फ इंदौर, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश की पेयजल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर में शोक और आक्रोश का माहौल है, वहीं स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में है।

नर्मदा जल में मल-मूत्र, खतरनाक बैक्टीरिया मिले

भागीरथपुरा से लिए गए पानी के सैंपल की जांच में फीकल कॉलीफॉर्म, ई-कोलाई और क्लेबसिएला जैसे जानलेवा बैक्टीरिया पाए गए हैं। ये बैक्टीरिया उल्टी, दस्त, आंतों के संक्रमण और गंभीर डिहाइड्रेशन का कारण बनते हैं।

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केवल इंदौर नहीं, पूरा प्रदेश खतरे में

इंदौर ही नहीं, बल्कि भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, बालाघाट, शाजापुर, बड़वानी, झाबुआ, कटनी, दमोह और छिंदवाड़ा जैसे शहरों में भी लोग मल-मूत्र मिला दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। यह संकट अब स्थानीय नहीं, बल्कि प्रदेशव्यापी स्वास्थ्य आपदा का रूप ले चुका है।

राजधानी भोपाल में भी हालात चिंताजनक हैं

जोनल कार्यालय-2 के वाजपेयी नगर क्षेत्र में बीते 15 दिनों से नलों में सीवेज मिला पानी आ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पेयजल पाइपलाइन सीवेज लाइन के बीच से गुजर रही है। पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों में जगह-जगह लीकेज है, जिससे गटर का पानी सीधे घरों तक पहुंच रहा है।

भोपाल नगर निगम को हादसे का इंतजार?

चौंकाने वाली बात यह है कि पानी की सैंपलिंग और जांच का जिम्मा प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ की बजाय ड्राइवरों के भरोसे छोड़ दिया गया है। नगर निगम का ड्राइवर ही अलग-अलग इलाकों से सैंपल ले रहा है और खुद ही टेस्ट ट्यूब में क्लोरीन की जांच कर रहा है। यह व्यवस्था भविष्य में बड़े हादसे को न्योता देने जैसी है।

जबलपुर: 50 साल पुरानी पाइपलाइन

जबलपुर में करीब 80% पेयजल लाइनें नालों के नीचे से गुजर रही हैं। जबकि पानी की डिस्ट्रीब्यूशन लाइन की औसत उम्र 20 साल मानी जाती है, यहां कई लाइनें 40–50 साल पुरानी हैं। धनवंतरि नगर, शांतिनगर, अधारताल, कांचघर जैसे इलाकों में लीकेज आम बात है। बरसात में बदबूदार और गंदा पानी आने की शिकायतें पहले भी दर्ज हो चुकी हैं।

ग्वालियर: नाले के अंदर से गुजर रही पानी की लाइन

ग्वालियर में गोल पहाड़िया से तिघरा रोड तक मुख्य जल लाइन सीवर चेंबर के अंदर से गुजर रही है। पिछले साल अर्जुन नगर में 20 दिन तक गंदे पानी की सप्लाई से 50 घर प्रभावित हुए थे और 10 लोग अस्पताल पहुंचे थे। हरिजन बस्ती, मदनकुई, समर्थ नगर जैसे इलाकों में भी पाइपलाइन नालों में मिली है।

उज्जैन: निगम गहरी नींद में

उज्जैन के जयसिंहपुरा क्षेत्र में पिछले दो महीने से नलों में काला और बदबूदार पानी आ रहा है। करीब 265 परिवारों की सेहत खतरे में है, लेकिन नगर निगम और पीएचई विभाग अब तक मूकदर्शक बने हुए हैं। जर्जर पाइपलाइन से हजारों लीटर पानी सड़कों पर बह रहा है, वहीं लोग पीने के पानी को तरस रहे हैं।          

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सवाल सिस्टम पर, जवाबदेही किसकी?

इंदौर की त्रासदी ने यह साफ कर दिया है कि मध्य प्रदेश की पेयजल व्यवस्था गंभीर खतरे में है। अगर अब भी पाइपलाइन नहीं बदली गई नियमित और वैज्ञानिक जांच नहीं हुई जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई तो यह संकट किसी भी शहर में अगला बड़ा हादसा बन सकता है। अब सवाल यह नहीं कि गंदा पानी कहां मिल रहा है, सवाल यह है—अगली जान कहां जाएगी?

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