छत्तीसगढ़ में तंबाकू का बढ़ता संकट, महिलाएं पुरुषों से आगे निकलीं

Aishwarya Dwivedi | May 03, 2026, 17:06 IST
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छत्तीसगढ़ में तंबाकू सेवन राष्ट्रीय औसत से अधिक, महिलाओं में दोगुना। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और आसान उपलब्धता से लत बढ़ रही, स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है।

NEWS IN SHORT

  • छत्तीसगढ़ी महिलाएं राष्ट्रीय औसत से दोगुना तंबाकू सेवन कर रही हैं।
  • प्रदेश के 43.1% पुरुष गंभीर रूप से तंबाकू के आदी हैं।
  • तंबाकू प्रसार में छत्तीसगढ़ ने कई पड़ोसी राज्यों को पीछे छोड़ा।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी से नशा घर-घर पहुँचा।
  • बीड़ी, गुटखा और खैनी की आसान उपलब्धता बड़ी चुनौती बनी।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ में तंबाकू अब केवल एक शौक या परंपरा नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) के हालिया आंकड़े छत्तीसगढ़ के लिए एक चेतावनी की तरह सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में पुरुषों और महिलाओं, दोनों में तंबाकू सेवन की दर राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है। विशेष रूप से महिलाओं के आंकड़े चौंकाने वाले हैं, जहां वे देश के औसत से लगभग दोगुना तंबाकू का सेवन कर रही हैं।



चिंताजनक आंकड़े: राष्ट्रीय औसत से कोसों दूर

आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि भारत में औसतन 38% पुरुष तंबाकू का सेवन करते हैं, जबकि छत्तीसगढ़ में यह ग्राफ 43.1% तक पहुंच चुका है। लेकिन असली चिंता महिलाओं को लेकर है। पूरे देश में जहां औसतन 8.9% महिलाएं तंबाकू का सेवन करती हैं, वहीं छत्तीसगढ़ में यह आंकड़ा 17.3% है। यह स्थिति दर्शाती है कि प्रदेश की महिलाएं न केवल अपने पड़ोसी राज्यों बल्कि पूरे देश की महिलाओं की तुलना में इस नशे की अधिक शिकार हैं।



पड़ोसी राज्यों से तुलना

Far Removed from the National Average


छत्तीसगढ़ ने तंबाकू के प्रसार के मामले में देश के कई बड़े और प्रगतिशील राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।



मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश: पुरुषों के मामले में मध्य प्रदेश (46.4%) और उत्तर प्रदेश (44%) छत्तीसगढ़ के करीब हैं, लेकिन महिलाओं के मामले में छत्तीसगढ़ (17.3%) इन दोनों राज्यों (क्रमशः 10.3% और 8.5%) से काफी आगे निकल चुका है।



दक्षिण भारत बनाम छत्तीसगढ़: दक्षिण भारतीय राज्यों जैसे तमिलनाडु (20%), आंध्र प्रदेश (22.6%) और कर्नाटक (27.3%) की तुलना में छत्तीसगढ़ के पुरुषों में तंबाकू की लत लगभग दोगुनी है।



दिल्ली और पंजाब: विकसित राज्यों और कम सेवन वाले राज्यों जैसे दिल्ली (2.2% महिलाएं) और पंजाब (12.8% पुरुष) की तुलना में छत्तीसगढ़ की स्थिति भयावह नजर आती है।



प्रमुख राज्यों का तुलनात्मक डेटा

Comparative Data for Major States


क्यों बढ़ रहा है नशे का ग्राफ?

विशेषज्ञों और समाजशास्त्रियों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में तंबाकू की इस पैठ के पीछे कई सामाजिक और भौगोलिक कारण हैं। ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में बीड़ी, गुटखा, खैनी और गुडखू (दांतों में घिसने वाला तंबाकू) बहुत आसानी से और कम कीमत पर उपलब्ध हैं। विशेष रूप से ग्रामीण अंचलों में तंबाकू के कैंसरकारी प्रभावों को लेकर जानकारी की भारी कमी है। कई क्षेत्रों में इसे परंपरा या थकान मिटाने के साधन के रूप में देखा जाता है। छत्तीसगढ़ के कुछ समुदायों में महिलाओं द्वारा तंबाकू या गुडखू का उपयोग सामाजिक रूप से स्वीकार्य है, जो धीरे-धीरे लत में बदल जाता है।



निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में तंबाकू सेवन की यह बढ़ती प्रवृत्ति भविष्य में कैंसर, श्वसन रोगों और हृदय संबंधी बीमारियों के बड़े संकट की ओर इशारा कर रही है। यदि समय रहते जागरूकता अभियान और कड़े नियंत्रण नहीं लगाए गए, तो यह "साइलेंट किलर" प्रदेश की अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य को पूरी तरह खोखला कर देगा। सरकार और नागरिक समाज को मिलकर इस "धुआं रहित जहर" के खिलाफ मोर्चा खोलने की तत्काल आवश्यकता है।



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