दूसरे सांसद ने भी लगाया विशेषाधिकार हनन का आरोप, अफसरशाही पर उठे बड़े सवाल
VINAY VERMA | Aug 04, 2026, 19:47 IST
बृजमोहन के बाद सांसद विजय बघेल भी नाराज
दुर्ग सांसद विजय बघेल ने भिलाई निगम के दो अधिकारियों पर विशेषाधिकार हनन का आरोप लगाते हुए लोकसभा अध्यक्ष से शिकायत की है। इससे पहले रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल भी ऐसी शिकायत कर चुके हैं।
Raipur : छत्तीसगढ़ की अफसरशाही अब सीधे सांसदों के निशाने पर है। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल के बाद अब दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद विजय बघेल ने भी लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष विशेषाधिकार हनन की शिकायत दर्ज कर दी है। लगातार दूसरा मामला सामने आने के बाद सत्ता के गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या प्रदेश के अधिकारी अब जनप्रतिनिधियों की अनदेखी करने लगे हैं? दो-दो सांसदों की शिकायत ने सरकार, अफसरशाही और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दुर्ग सांसद विजय बघेल ने भिलाई नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त राजीव कुमार पांडेय और भिलाई-चरोदा नगर निगम के आयुक्त डीएस राजपूत के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की शिकायत लोकसभा अध्यक्ष को भेजी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दोनों अधिकारियों ने न केवल सांसद के फोन का जवाब देने में उदासीनता दिखाई, बल्कि जनहित से जुड़े मामलों में अपेक्षित जानकारी और सहयोग देने से भी परहेज किया। सांसद का कहना है कि यह केवल उनके अधिकारों का नहीं, बल्कि जनता के विश्वास का भी अपमान है।
सांसद विजय बघेल की शिकायत पर लोकसभा सचिवालय ने गंभीर रुख अपनाया है। सचिवालय ने राज्य शासन और संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है। इस कदम के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार इस पूरे मामले में क्या जवाब देती है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है या नहीं।
इससे पहले रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव आईएएस अमित कटारिया पर फोन पर आपत्तिजनक व्यवहार का आरोप लगाते हुए विशेषाधिकार हनन की शिकायत की थी। बताया जाता है कि लोकसभा सचिवालय उस मामले की भी जानकारी जुटा रहा है। अब विजय बघेल की शिकायत सामने आने के बाद यह विवाद किसी एक अधिकारी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरे प्रशासनिक रवैये पर सवाल उठने लगे हैं।
लगातार दो सांसदों द्वारा विशेषाधिकार हनन की शिकायत दर्ज होने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि कहीं अफसरशाही और जनप्रतिनिधियों के बीच संवादहीनता बढ़ तो नहीं रही। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यदि ऐसे मामलों पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो सरकार और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति गहरा सकती है। इससे जनता के कामकाज पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि बृजमोहन अग्रवाल से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन वे जनता द्वारा चुने गए लोकसभा सदस्य हैं। उनके साथ किसी प्रशासनिक अधिकारी का ऐसा व्यवहार केवल संसदीय परंपराओं का उल्लंघन नहीं, बल्कि उन लाखों मतदाताओं का भी अपमान है जिन्होंने उन्हें संसद भेजा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी जनता और जनप्रतिनिधियों की अपेक्षा दिल्ली और नागपुर को खुश रखने में अधिक रुचि दिखा रहे हैं।
लगातार दूसरी विशेषाधिकार हनन शिकायत ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि क्या यह महज दो अधिकारियों का मामला है या फिर प्रशासनिक व्यवस्था में गहराती संवेदनहीनता की तस्वीर? लोकसभा सचिवालय के जवाब तलब करने के बाद अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी अफसरशाही की कार्यशैली पर उठ रहे सवालों का जवाब देने और जनप्रतिनिधियों के भरोसे को कायम रखने की है।
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दूसरे सांसद की शिकायत
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अफसरशाही पर सवाल
जनादेश का अपमान
अब सरकार की अग्निपरीक्षा
FAQ
- विजय बघेल ने किस मामले में विशेषाधिकार हनन की शिकायत की है?
दुर्ग सांसद विजय बघेल ने भिलाई नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त राजीव कुमार पांडेय और भिलाई-चरोदा नगर निगम के आयुक्त डीएस राजपूत के खिलाफ शिकायत की है। उन्होंने अधिकारियों पर जनहित के मामलों में सहयोग नहीं करने और फोन पर उचित प्रतिक्रिया नहीं देने का आरोप लगाया है। - इससे पहले किस सांसद ने ऐसी शिकायत की थी?
रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव आईएएस अमित कटारिया के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की शिकायत लोकसभा अध्यक्ष को भेजी थी। - विशेषाधिकार हनन क्या होता है?
जब किसी सांसद या सदन के अधिकारों और गरिमा को प्रभावित करने वाला व्यवहार किया जाता है तो उसे विशेषाधिकार हनन माना जा सकता है। ऐसे मामलों की जांच संसद की प्रक्रिया के तहत की जाती है।
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