छत्तीसगढ़ की राजनीति का पारा हाई, राष्ट्रपति, भागवत, शाह और स्मृति ईरानी के दौरों से सियासी हलचल
Arun Tiwari | Oct 19, 2026, 12:58 IST
छत्तीसगढ़ में बड़े VIP दौरे
Raipur. छत्तीसगढ़ में अगले 10 दिनों के भीतर होने वाले चार प्रमुख वीआईपी दौरों से प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ.मोहन भागवत, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी की नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के प्रस्तावित दौरों से राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
इन दौरों के जरिए जहां सरकार और प्रशासन की सक्रियता बढ़ेगी, वहीं बीजेपी के संगठनात्मक कार्यक्रमों और आगामी चुनावों की तैयारियों को भी गति मिलेगी।
इन चारों दौरों का महत्व अलग-अलग है। राष्ट्रपति का प्रवास जनजातीय समाज, सामाजिक सम्मान और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा होगा। संघ प्रमुख का बिलासपुर दौरा संगठनात्मक गतिविधियों और सामाजिक संवाद के लिहाज से अहम माना जा रहा है। अमित शाह का रायपुर आगमन राज्योत्सव के कार्यक्रमों से जुड़ा है। दूसरी ओर स्मृति ईरानी अपने पहले छत्तीसगढ़ दौरे में बीजेपी संगठनात्मक ढांचे और आगामी राजनीतिक रणनीति पर चर्चा करेंगी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22 और 23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के दौरे पर रहेंगी। उनके प्रवास को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। राष्ट्रपति के कार्यक्रमों में सामाजिक, सांस्कृतिक और जनजातीय परंपराओं से जुड़े आयोजनों को प्रमुखता मिलेगी। 22 अक्टूबर को राष्ट्रपति रायपुर स्थित लोक भवन में पद्म पुरस्कार से सम्मानित हासी देवी के सम्मान में 200 रुपये का विशेष स्मारक सिक्का जारी करेंगी।
इस कार्यक्रम को सम्मान और स्मृति से जुड़े महत्वपूर्ण आयोजन के रूप में देखा जा रहा है। इसके बाद शाम को नवा रायपुर के इंडोर स्टेडियम में आयोजित नवाखाई पर्व, सेवा सम्मान पर्व और युवा प्रबोधन कार्यक्रम में राष्ट्रपति मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। इन आयोजनों के जरिए सामाजिक सहभागिता, सांस्कृतिक परंपराओं और युवा शक्ति से जुड़े विषयों पर जोर रहेगा।23 अक्टूबर को राष्ट्रपति जगदलपुर पहुंचेंगी। यहां मां दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना करने का कार्यक्रम है।
बस्तर की आराध्य देवी के दर्शन के साथ राष्ट्रपति क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ेंगी। इसके बाद वह बस्तर दशहरा के पारंपरिक मुरिया दरबार में शामिल होकर जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों से संवाद करेंगी। बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट परंपराओं और जनजातीय सहभागिता के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। राष्ट्रपति की मौजूदगी से इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्रपति के दौरे के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत 22 और 23 अक्टूबर को बिलासपुर के दो दिवसीय प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान वह कोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होंगे। प्रस्तावित कार्यक्रम के मुताबिक संघ प्रमुख विभिन्न संगठनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लेंगे। विभाग टोली और प्रांत कार्यकारिणी की बैठकें भी होंगी। इन बैठकों में छत्तीसगढ़ में संघ की गतिविधियों, सामाजिक सहभागिता और संगठन के विस्तार से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी।
संघ की रणनीति के लिहाज से छत्तीसगढ़ महत्वपूर्ण राज्य है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों के विस्तार के साथ युवाओं को जोड़ने पर भी जोर दिया जाता रहा है।बताया जा रहा है कि बैठक में छत्तीसगढ़ के दो हिस्सों में संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने के प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। एक हिस्से में बिलासपुर-सूरजपुर और दूसरे में रायपुर-दुर्ग-बस्तर संभाग शामिल होंगे। इसके साथ ही बस्तर जैसे क्षेत्रों में शाखाओं का विस्तार करने और 40 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों से जोड़ने की रणनीति पर भी ध्यान दिया जाएगा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एक नवंबर को रायपुर पहुंचेंगे। वह छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित राज्योत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के आमंत्रण पर शाह इस कार्यक्रम में शामिल होने आ रहे हैं। यह कार्यक्रम राज्य स्थापना दिवस के लिहाज से महत्वपूर्ण है। राज्योत्सव के मंच से राज्य की विकास यात्रा, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को सामने रखने का अवसर मिलेगा।
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही कार्रवाई और प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गतिविधियां भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के प्रमुख विषय हैं। ऐसे में अमित शाह के दौरे को केवल राज्योत्सव तक सीमित नहीं माना जा रहा है। उनके प्रवास के दौरान राज्य सरकार की प्राथमिकताओं और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर भी राजनीतिक नजर रहेगी।
बीजेपी की नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी 25 और 26 अक्टूबर को रायपुर में रहेंगी। छत्तीसगढ़ में प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी संभालने के बाद उनका यह दौरा संगठनात्मक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। इस दौरान वह पूर्व सांसदों और विधायकों के साथ वन-टू-वन चर्चा करेंगी। संगठन के कामकाज की समीक्षा करने के साथ आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी रणनीति पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है।
उनकी बैठकों में संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाने और पार्टी की गतिविधियों को जमीनी स्तर तक प्रभावी बनाने पर जोर रह सकता है। बीजेपी के लिए प्रदेश में सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा। स्मृति ईरानी की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब पार्टी को अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयारी करने की जरूरत है।
अक्टूबर के अंतिम पखवाड़े और नवंबर की शुरुआत में होने वाले ये चारों दौरे अलग-अलग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रभाव छोड़ सकते हैं। राष्ट्रपति का प्रवास जनजातीय संस्कृति और सामाजिक सम्मान को केंद्र में रखेगा, संघ प्रमुख का दौरा संगठनात्मक गतिविधियों पर केंद्रित रहेगा, जबकि अमित शाह का आगमन राज्योत्सव के जरिए सरकार की उपलब्धियों और विकास के एजेंडे को सामने रखने का अवसर होगा।
वहीं स्मृति ईरानी की बैठकों से बीजेपी के संगठनात्मक कामकाज और राजनीतिक रणनीति को नई दिशा मिलने की संभावना है। लगातार होने वाले इन दौरों के कारण प्रशासनिक तैयारियों के साथ राजनीतिक गतिविधियां भी तेज रहेंगी।
इन चारों दौरों का महत्व अलग-अलग है। राष्ट्रपति का प्रवास जनजातीय समाज, सामाजिक सम्मान और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा होगा। संघ प्रमुख का बिलासपुर दौरा संगठनात्मक गतिविधियों और सामाजिक संवाद के लिहाज से अहम माना जा रहा है। अमित शाह का रायपुर आगमन राज्योत्सव के कार्यक्रमों से जुड़ा है। दूसरी ओर स्मृति ईरानी अपने पहले छत्तीसगढ़ दौरे में बीजेपी संगठनात्मक ढांचे और आगामी राजनीतिक रणनीति पर चर्चा करेंगी।
राष्ट्रपति के दौरे से होगी शुरुआत
इस कार्यक्रम को सम्मान और स्मृति से जुड़े महत्वपूर्ण आयोजन के रूप में देखा जा रहा है। इसके बाद शाम को नवा रायपुर के इंडोर स्टेडियम में आयोजित नवाखाई पर्व, सेवा सम्मान पर्व और युवा प्रबोधन कार्यक्रम में राष्ट्रपति मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। इन आयोजनों के जरिए सामाजिक सहभागिता, सांस्कृतिक परंपराओं और युवा शक्ति से जुड़े विषयों पर जोर रहेगा।23 अक्टूबर को राष्ट्रपति जगदलपुर पहुंचेंगी। यहां मां दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना करने का कार्यक्रम है।
बस्तर की आराध्य देवी के दर्शन के साथ राष्ट्रपति क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ेंगी। इसके बाद वह बस्तर दशहरा के पारंपरिक मुरिया दरबार में शामिल होकर जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों से संवाद करेंगी। बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट परंपराओं और जनजातीय सहभागिता के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। राष्ट्रपति की मौजूदगी से इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिलने की उम्मीद है।
बिलासपुर में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत का मंथन
संघ की रणनीति के लिहाज से छत्तीसगढ़ महत्वपूर्ण राज्य है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों के विस्तार के साथ युवाओं को जोड़ने पर भी जोर दिया जाता रहा है।बताया जा रहा है कि बैठक में छत्तीसगढ़ के दो हिस्सों में संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने के प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। एक हिस्से में बिलासपुर-सूरजपुर और दूसरे में रायपुर-दुर्ग-बस्तर संभाग शामिल होंगे। इसके साथ ही बस्तर जैसे क्षेत्रों में शाखाओं का विस्तार करने और 40 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों से जोड़ने की रणनीति पर भी ध्यान दिया जाएगा।
राज्योत्सव में मुख्य अतिथि होंगे अमित शाह
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही कार्रवाई और प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गतिविधियां भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के प्रमुख विषय हैं। ऐसे में अमित शाह के दौरे को केवल राज्योत्सव तक सीमित नहीं माना जा रहा है। उनके प्रवास के दौरान राज्य सरकार की प्राथमिकताओं और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर भी राजनीतिक नजर रहेगी।
स्मृति ईरानी संभालेंगी संगठन की कमान
उनकी बैठकों में संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाने और पार्टी की गतिविधियों को जमीनी स्तर तक प्रभावी बनाने पर जोर रह सकता है। बीजेपी के लिए प्रदेश में सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा। स्मृति ईरानी की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब पार्टी को अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयारी करने की जरूरत है।
राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से अहम पखवाड़ा
वहीं स्मृति ईरानी की बैठकों से बीजेपी के संगठनात्मक कामकाज और राजनीतिक रणनीति को नई दिशा मिलने की संभावना है। लगातार होने वाले इन दौरों के कारण प्रशासनिक तैयारियों के साथ राजनीतिक गतिविधियां भी तेज रहेंगी।
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