यूथ कांग्रेस इलेक्शन बना दिग्गजों का चुनाव, भूपेश और देवेंद्र में सीधी टक्कर
Raipur : छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद का चुनाव अब केवल संगठनात्मक प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन और भविष्य के नेतृत्व की दिशा तय करने वाली अहम राजनीतिक लड़ाई बन चुका है। इस पद के लिए भूपेश बघेल और देवेंद्र यादव खेमे में सीधी टक्कर है।
देवेंद्र खेमे से अध्यक्ष पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार के रूप में शैलेन्द्र बंजारे का नाम तेजी से उभरकर सामने आया है। वहीं भूपेश बघेल के समर्थक विनय शील भी बड़े दावेदार मने जा रहे हैं। संगठन के भीतर चर्चा है शैलेन्द्र को विधायक देवेंद्र यादव के साथ-साथ नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव का भी समर्थन प्राप्त है। इससे चुनावी मुकाबला और अधिक दिलचस्प हो गया है।
शैलेन्द्र और विनय में टक्कर
जानकारी के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए प्राप्त रेफरल के आधार पर शैलेन्द्र बंजारे आगे हैं। उन्हें 317 रेफरल मिले हैं, जबकि प्रशांत बोकड़े 224 रेफरल के साथ दूसरे स्थान पर बताए जा रहे हैं। विनय हेल को अब तक 192 रेफरल वोट मिले हैं। इसके अलावा सोनू शर्मा, लोकेश वशिष्ठ और हनी बग्गा भी दावेदारी में शामिल हैं।
दो धड़ों में प्रतिष्ठा की लड़ाई
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि युवा कांग्रेस का यह चुनाव सीधे तौर पर कांग्रेस के दो प्रभावशाली धड़ों के बीच प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। एक ओर विधायक देवेंद्र यादव का खेमा शैलेन्द्र बंजारे के समर्थन में पूरी ताकत झोंके हुए है, वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का गुट अभी तक पूरी तरह अपने पत्ते नहीं खोल रहा है। ऐसे में यह मुकाबला संगठन से अधिक कांग्रेस के अंदरूनी नेतृत्व की ताकत का परीक्षण माना जा रहा है।
सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश
शैलेन्द्र बंजारे के नाम को लेकर यह भी चर्चा है कि उनके चयन से कांग्रेस सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश कर रही है। माना जा रहा है कि पार्टी यादव समाज के साथ-साथ सतनामी समाज में भी अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
यही वजह है कि बंजारे के नाम को केवल संगठनात्मक नहीं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। बंजारे की पहचान उस समय भी चर्चा में आई थी जब वे बलौदाबाजार हिंसा प्रकरण में विधायक देवेंद्र यादव के साथ जेल में रहे थे। कांग्रेस के भीतर कुछ नेता इसे संघर्षशील छवि के रूप में देखते हैं, जबकि राजनीतिक गलियारों में इसे उनके पक्ष में एक महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है।
बीजेपी का तंज
इस बीच भारतीय जनता पार्टी ने भी युवा कांग्रेस के चुनाव को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। बीजेपी नेता कहते हैं कि कांग्रेस में गुरु-चेले की राजनीति चलती है और वहां संगठनात्मक चुनाव भी गुटबाजी से प्रभावित रहते हैं। इसके जवाब में कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि बीजेपी को कांग्रेस की लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया से सीख लेनी चाहिए, क्योंकि बीजेपी में फैसले लोकतांत्रिक तरीके से नहीं बल्कि ऊपर से तय किए जाते हैं।
युवा कांग्रेस के चुनाव को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में भी काफी उत्साह है। माना जा रहा है कि जो नेता इस चुनाव में मजबूत स्थिति हासिल करेगा, उसकी भूमिका आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति और संगठन विस्तार में भी प्रभावशाली होगी। इसलिए प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव केवल एक पद के लिए नहीं, बल्कि कांग्रेस के भविष्य के नेतृत्व और संगठनात्मक दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
कौन बनेगा अध्यक्ष
फिलहाल नामांकन और रेफरल की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब सभी की नजर अंतिम फैसले पर टिकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि युवा कांग्रेस के इस चुनाव के परिणाम से यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि प्रदेश कांग्रेस में किस खेमे का प्रभाव सबसे अधिक है और आने वाले समय में संगठन की कमान किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
FAQ
- छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव में मुख्य मुकाबला किनके बीच है?
छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव में शैलेन्द्र बंजारे और विनय शील के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है। - शैलेन्द्र बंजारे को कितने रेफरल मिले हैं?
जानकारी के अनुसार शैलेन्द्र बंजारे को 317 रेफरल मिले हैं और वे दावेदारों में आगे बताए जा रहे हैं। - युवा कांग्रेस चुनाव को महत्वपूर्ण क्यों माना जा रहा है?
यह चुनाव कांग्रेस के अंदरूनी शक्ति संतुलन और भविष्य के संगठनात्मक नेतृत्व की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।
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