3 साल में 7 तबादले... ऐसा रहा MP पुलिस के नए DGP कैलाश मकवाना का सफर
Ravi Kant Dixit | Dec 02, 2024, 21:29 IST
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मध्यप्रदेश पुलिस के नए मुखिया यानी डीजीपी कैलाश मकवाना अपनी वर्किंग स्टाइल की वजह से नौकरी के बीच संघर्ष झेलना पड़ा। कमलनाथ और शिवराज सरकार में तीन साल के भीतर उनके सात बार तबादले किए गए...
BHOPAL. मध्यप्रदेश पुलिस के नए मुखिया यानी डीजीपी कैलाश मकवाना ने सोमवार, 2 दिसंबर को कार्यभार ग्रहण कर लिया। उन्हें पीएचक्यू में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी प्राथमिकताएं बताईं। मकवाना इससे पहले पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन के चेयरमैन थे। वे लोकायुक्त संगठन में डीजी रह चुके हैं। स्पेशल डीजी सीआईडी और इंटेलिजेंस का काम भी देख चुके हैं।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश से सीनियर आईपीएस का पैनल भेजा गया था, इसमें मकवाना के अलावा सीनियर आईपीएस अरविंद कुमार और आईपीएस अजय शर्मा का नाम था। अब तक सीनियर मोस्ट ऑफिसर को ही डीजीपी बनाए जाने की परम्परा रही है। सूबे में पहली बार डीजीपी की नियुक्ति में ये परम्परा टूटी है। अब मकवाना ने 30 नवम्बर को रिटायर हुए सुधीर कुमार सक्सेना की जगह ली है।
मकवाना के डीजीपी बनने के बाद वर्ष 1990 बैच तक के अफसरों का डीजीपी यानी पुलिस महानिदेशक बनना संभव नहीं होगा। जब तक मकवाना का कार्यकाल पूरा होगा, तब तक इस बैच के ज्यादातर अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके होंगे। सेवा नियमों के हिसाब से मकवाना का कार्यकाल 30 नवम्बर 2026 तक रहेगा। यानी वे सीधे तौर पर दो साल मध्यप्रदेश पुलिस के मुखिया बने रहेंगे।
आईपीएस कैलाश मकवाना उज्जैन की घट्टिया तहसील के ढाबला हर्दू गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता बलवंत सिंह नायब तहसीलदार थे। बाद में पदोन्नत हुए और डिप्टी कलेक्टर बने। फिर इसी पद से वे रिटायर्ड हो गए। कैलाश मकवाना को पिता से मिली ईमानदारी की सीख ने उन्हें बेदाग पुलिस अधिकारी बनाया। अब मकवाना के डीजीपी बनने के बाद से उज्जैन सहित पुश्तैनी गांव ढाबला हर्दू में जश्न का माहौल है।
अपनी वर्किंग स्टाइल की वजह से कैलाश मकवाना को नौकरी के बीच संघर्ष झेलना पड़ा। कमलनाथ और शिवराज सरकार में तीन साल के भीतर उनके सात तबादले हुए। शिवराज सरकार ने मई 2022 में लोकायुक्त महानिदेशक पदस्थ किया था। तब उन्होंने छह महीने के भीतर भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ मुहिम छेड़ दी थी। हालांकि यहां से छह महीने के भीतर उनका फिर तबादला हो गया। बाद में कमलनाथ सरकार के डेढ़ साल के कार्यकाल में उनके तीन बार ट्रांसफर हुए।
एमपी में इस तरह टूटी परंपरा
1990 बैच के अफसर नहीं बन पाएंगे डीजीपी!
पिता से मिली ईमानदारी की सीख
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