OMG! 400 बच्चों के आधार कार्ड से खुले 500 फर्जी बैंक खाते

Siddhi Tamrakar | Nov 18, 2024, 08:36 IST
fake account making gang
आधार कार्ड का दुरुपयोग कर 500 से अधिक फर्जी खाते खोलने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है। इसमें 400 बच्चों के आधार का उपयोग हुआ है। जानें क्या है पूरा मामला

भोपाल में आधार कार्ड चोरी कर बैंक खाते खुलवाने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इस गिरोह ने बच्चों के आधार कार्डों का भी इस्तेमाल किया। पुलिस जांच में सामने आया है कि 400 से अधिक बच्चों के आधार कार्ड से 500 से ज्यादा फर्जी खाते खोले गए। इन खातों का उपयोग साइबर धोखाधड़ी और सट्टा एप्स के लिए किया गया। गिरोह के सात सदस्यों को भोपाल के हनुमानगंज पुलिस ने गिरफ्तार किया है।



केवल 7 चेहरों से खुले 500 खाते

थाना प्रभारी अवधेश भदौरिया के अनुसार, गिरोह का सरगना शशिकांत कुमार है। उसके अनुसार, गिरोह के सात सदस्यों के चेहरे का इस्तेमाल कर 500 से अधिक फर्जी खाते खोले गए। हालांकि, सभी खातों में आधार कार्ड अलग-अलग थे। आरोपी बैंक की शाखाओं और कियोस्क पर जाकर खाते खोलते थे ताकि पकड़ में न आ सकें। दरअसल दोनों ही जगहों पर खाते खोलने के लिए डिजिटल KYC की जरूरत नहीं पड़ती।



अब आधार देने वाले डाकिए की तलाश

पुलिस ने गिरोह से सात डायरियां भी जब्त की हैं, जिनमें खाताधारकों के नाम दर्ज हैं। शशिकांत ने खुलासा किया कि झारखंड का एक डाकिया गलत पते पर आधार पहुंचाने के बजाय इस गिरोह को सौंप देता था। अब पुलिस डाकिए की तलाश में जुट गई है।



दस हजार रुपए में बेचते थे खाते

शशिकांत ने पुलिस को बताया कि वह एक खाता 10 हजार में बेचता था। खाता खुलवाने में 2-3 दिन लगते थे और 15 दिन बाद एटीएम कार्ड मिलने पर खाते को तुरंत बेच दिया जाता था। गिरोह के पास से 200 और खातों के लिए तैयार दस्तावेज भी मिले हैं।



गिरोह की गतिविधियां और जांच

गिरोह ने कई राज्यों में अपना नेटवर्क फैला रखा था। शुरुआती जांच में पता चला है कि फर्जी खातों के जरिए करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है। पुलिस ने गिरोह के बैकग्राउंड की गहन जांच शुरू कर दी है।



भोपाल में आधार कार्ड चोरी कर बैंक खाते खुलवाने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इस गिरोह ने बच्चों के आधार कार्डों का भी इस्तेमाल किया। पुलिस जांच में सामने आया है कि 400 से अधिक बच्चों के आधार कार्ड से 500 से ज्यादा फर्जी खाते खोले गए। इन खातों का उपयोग साइबर धोखाधड़ी और सट्टा एप्स के लिए किया गया। गिरोह के सात सदस्यों को भोपाल के हनुमानगंज पुलिस ने गिरफ्तार किया है।



केवल 7 चेहरों से खुले 500 खाते

अब आधार देने वाले डाकिए की तलाश

पुलिस ने गिरोह से सात डायरियां भी जब्त की हैं, जिनमें खाताधारकों के नाम दर्ज हैं। शशिकांत ने खुलासा किया कि झारखंड का एक डाकिया गलत पते पर आधार पहुंचाने के बजाय इस गिरोह को सौंप देता था। अब पुलिस डाकिए की तलाश में जुट गई है।



दस हजार रुपए में बेचते थे खाते

शशिकांत ने पुलिस को बताया कि वह एक खाता 10 हजार में बेचता था। खाता खुलवाने में 2-3 दिन लगते थे और 15 दिन बाद एटीएम कार्ड मिलने पर खाते को तुरंत बेच दिया जाता था। गिरोह के पास से 200 और खातों के लिए तैयार दस्तावेज भी मिले हैं।



गिरोह की गतिविधियां और जांच

गिरोह ने कई राज्यों में अपना नेटवर्क फैला रखा था। शुरुआती जांच में पता चला है कि फर्जी खातों के जरिए करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है। पुलिस ने गिरोह के बैकग्राउंड की गहन जांच शुरू कर दी है।



FAQ

  1. आधार कार्ड फर्जीवाड़ा कैसे होता है?
    आधार कार्ड चोरी कर गलत जानकारी के साथ फर्जी दस्तावेज बनाकर इसका दुरुपयोग किया जाता है।
  2. गिरोह ने कितने बैंक खाते खोले?
    गिरोह ने 500 से अधिक फर्जी बैंक खाते खोले और 400 बच्चों के आधार कार्ड का उपयोग किया।
  3. इन खातों का उपयोग कहां किया गया?
    इन खातों का उपयोग साइबर अपराध और सट्टा एप्स में लेन-देन के लिए किया गया।
  4. पुलिस ने गिरोह के खिलाफ क्या कार्रवाई की?
    पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से सात डायरियां और फर्जी दस्तावेज जब्त किए।
  5. गिरोह का मुख्य सरगना कौन है?
    गिरोह का मुख्य सरगना शशिकांत कुमार है, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

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