बीजेपी विधायक चिंतामणि मालवीय पर महिला उत्पीड़न के गंभीर आरोप, राज्यपाल से शिकायत

Sourabh Bhatnagar | May 01, 2026, 09:26 IST
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मध्यप्रदेश में भाजपा के आलोट विधायक चिंतामणि मालवीय पर महिला उत्पीड़न और संपत्ति कब्जे के आरोप लगे हैं। महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बोरासी राज्यपाल से मिलीं और सख्त कार्रवाई की मांग की। विधायक ने सभी आरोप नकारे हैं।

News In Short

  • भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय पर महिला उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे हैं।
  • एक पूर्व प्रोफेसर ने विधायक पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है।
  • एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला की दुकान और जमीन पर कब्जे का भी आरोप है।
  • महिला कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष रीना बोरासी राज्यपाल से मिलकर सख्त कार्रवाई मांग चुकी हैं।
  • विधायक मालवीय ने सभी आरोपों को राजनीति प्रेरित बताकर खारिज किया है।

News In Detail

मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। बीजेपी विधायक चिंतामणि मालवीय पर महिलाओं के उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे हैं। महिला कांग्रेस (Mahila Congress) की प्रदेश अध्यक्ष रीना बोरासी ने गुरुवार को राज्यपाल से मुलाकात की। उन्होंने विधायक के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग रखी।



रीना बोरासी का आरोप है कि विधायक के रसूख के कारण पीड़ित महिलाओं की कहीं सुनवाई नहीं हो रही। उनका कहना है कि प्रशासन मौन बना हुआ है और पीड़ित महिलाएं न्याय के लिए दर-दर भटक रही हैं।



प्रोफेसर का मामला: 10 साल से इंसाफ का इंतजार

रीना बोरासी ने बताया कि उनके पास कई पीड़ित महिलाएं पहुंची हैं। इनमें विक्रम विश्वविद्यालय की एक पूर्व प्रोफेसर का मामला सबसे गंभीर बताया जा रहा है। प्रोफेसर ने विधायक पर चरित्र हनन और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है।



आरोप है कि विधायक की प्रताड़ना इतनी बढ़ गई कि महिला प्रोफेसर को अपने पद से इस्तीफा तक देना पड़ा। यह पीड़िता पिछले 10 साल से न्याय मांग रही है। लेकिन सत्ता और रसूख के दबाव में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।



बुजुर्ग महिला की जमीन पर कब्जे का आरोप

मामला सिर्फ मानसिक प्रताड़ना तक नहीं रुका। रीना बोरासी ने एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला का पक्ष भी राज्यपाल के सामने रखा। आरोप है कि विधायक ने करीब 25 से 30 लोगों के साथ मिलकर बुजुर्ग महिला की दुकान के शटर तोड़ दिए। उनकी जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया गया।



यह महिला पिछले 5 सालों से थाने और दफ्तरों के चक्कर काट रही है। आरोप है कि विधायक खुद को रसूखदार बताकर प्रशासन पर दबाव बनाते रहे। इसीलिए मामला अब तक ठंडे बस्ते में पड़ा है। इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आम नागरिक को किसी जनप्रतिनिधि के खिलाफ न्याय मिल सकता है?



भाजपा पर सीधा निशाना

रीना बोरासी ने भाजपा सरकार को सीधे घेरा। उनका कहना है कि जब भी महिलाओं की गरिमा के खिलाफ घटनाएं होती हैं, तो किसी न किसी रूप में भाजपा का नाम सामने आ जाता है। उन्होंने प्रदेश सरकार पर पीड़ित महिलाओं के साथ न्याय न करने का भी आरोप लगाया।



विधायक का जवाब: सब राजनीतिक षड्यंत्र

महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीना बोरासी (एमपी कांग्रेस) के आरोपों के बाद आलोट विधायक चिंतामणि मालवीय ने अपना जवाब दिया है। उन्होंने एक वीडियो जारी कर सभी आरोपों को झूठा बताया और कहा कि वह इस मामले में कोर्ट में आपराधिक और मानहानि का केस करेंगे। विधायक ने यह भी कहा कि मैं उन्हें (रीना बोरासी) पवन खेड़ा बना कर छोड़ूंगा।



चिंतामणि मालवीय ने कहा, "रीना बोरासी ने मेरे ऊपर जो आरोप लगाए हैं, वह पूरी तरह से गलत, बिना तथ्यों के और बिना किसी सबूत के हैं। मेरे ऊपर कोई आरोप नहीं है, ना ही कोई जांच या मामला लंबित है। ना ही मैंने किसी की ज़मीन हड़पी है। इस तरह के घटिया और झूठे आरोप लगाना साफ तौर पर अपराध है। मैं उनके खिलाफ एक क्रिमिनल केस और मानहानि का केस करने जा रहा हूं।"



उन्होंने यह भी कहा कि रीना बोरासी 68 हजार 800 वोटों से चुनाव हार चुकी हैं। अब अपने गिरते हुए अस्तित्व को बचाने के लिए उन्हें इस तरह के झूठे आरोप नहीं लगाने चाहिए। अगर उनके पास कोई प्रमाण है, तो वो उसे सामने लाएं। मैं उन्हें पवन खेड़ा बना कर छोड़ूंगा।"



महिला आरक्षण की भी उठी मांग

राज्यपाल से मुलाकात के दौरान महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बोरासी ने सिर्फ विधायक (एमपी बीजेपी) पर कार्रवाई की मांग नहीं की। उन्होंने मध्यप्रदेश की 230 विधानसभा सीटों पर 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने की भी मांग रखी। उनका कहना है कि यह आरक्षण 2028 के विधानसभा चुनाव से ही प्रभावी हो, ताकि विधानसभा में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।



राज्यपाल ने सभी शिकायतें सुनने के बाद उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या कदम उठाता है।



अपनी सरकार से भी उलझ चुके हैं मालवीय

विधायक चिंतामणि मालवीय पहले भी विवादों में रह चुके हैं। हाल ही में उन्होंने विधानसभा में सिंहस्थ लैंड पुलिंग (Sinhastha Land Pooling) योजना को लेकर मुख्यमंत्री पर तीखे सवाल दागे थे।



इससे सरकार असहज स्थिति में आ गई थी। इसके अलावा उन्होंने प्रशासन के खिलाफ तेवर दिखाते हुए रतलाम कलेक्टर कार्यालय का घेराव भी किया था। यानी मालवीय न सिर्फ विपक्ष से, बल्कि अपनी ही पार्टी और सरकार से भी कई बार टकरा चुके हैं।



अब महिला कांग्रेस ने इन विवादों के बीच व्यक्तिगत और आपराधिक प्रताड़ना के आरोप लगाकर मालवीय के लिए मुसीबत और बढ़ा दी है।



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