अशोकनगर कलेक्टर के पक्ष में सोशल मीडिया पर सक्रिय हुए लोग
News in Short
सोशल मीडिया पर कलेक्टर आदित्य सिंह के पक्ष में पोस्ट हो रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता ने कलेक्टर के खिलाफ आरोपों को नकारा।
कलेक्टर पर लगे आनंदपुर धाम ट्रस्ट के आरोपों को अफवाह मान रहे लोग।
फेसबुक पर अशोकनगर को अफवाहों की राजधानी कहा गया।
कलेक्टर हटाने के लिए पैनल निर्वाचन आयोग को भेजा गया।
News in Detail
मध्यप्रदेश के अशोकनगर में कलेक्टर आदित्य सिंह (ias aditya singh) इन दिनों विवादों के केंद्र में हैं। सोशल मीडिया यूजर्स स्टेटस पर खुलकर उनके समर्थन में खड़े हो गए हैं। फेसबुक और व्हाट्सऐप ग्रुप्स में कलेक्टर आदित्य सिंह के पक्ष में लगातार पोस्ट डाली जा रही हैं।
अशोकनगर के एक प्रमुख सोशल मीडिया ग्रुप “गणमान्य नागरिक” ने लिखा है कि अगर अशोकनगर से कलेक्टर को हटाया जाता है, तो मान लेना चाहिए कि ईमानदारी अब अभिशाप बन चुकी है।” यह टिप्पणी तेजी से वायरल हो रही है।
निष्पक्ष प्रशासनिक अधिकारी होने का दावा
एक अन्य ग्रुप में सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप रघुवंशी ने लिखा कि कलेक्टर आदित्य सिंह एक कर्तव्यनिष्ठ, निष्पक्ष और ईमानदार प्रशासनिक अधिकारी हैं। उन पर लगाए गए आरोप न केवल निराधार हैं, बल्कि भ्रम फैलाने की कोशिश भी हैं।
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आनंदपुर धाम से जुड़े आरोपों पर सवाल
कलेक्टर आदित्य सिंह पर आनंदपुर धाम से जुड़े कुछ लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर भी सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया है। कई यूजर्स का कहना है कि बिना ठोस सबूत के आरोप लगाना प्रशासनिक व्यवस्था को कमजोर करता है।
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‘अफवाहों की राजधानी’ बनता अशोकनगर?
फेसबुक पर चर्चा है कि अशोकनगर अब अफवाहों की सुपरलेटिव गिनती वाला शहर बनता जा रहा है, जहां रस्सी को सांप बनाने में लोग माहिर हैं। यह टिप्पणी पूरे विवाद का निचोड़ बताई जा रही है।
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तीन नामों का पैनल निर्वाचन आयोग को भेजा
विवाद गहराने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हुई थी। उसके बाद कलेक्टर आदित्य सिंह को अशोकनगर से हटाने के लिए 3 अधिकारियों का पैनल निर्वाचन आयोग को भेजा गया। पैनल में साकेत मालवीय, विदिशा मुखर्जी और सौरभ सोनवणे का नाम शामिल है।
चूंकि दिल्ली में निर्वाचन आयोग का भारत मंडपम कार्यक्रम चल रहा है। इस वजह से राज्यों के निर्वाचन से जुड़े अधिकारी भी उक्त कार्यक्रम में शामिल हैं। संभवत: इस वजह से अशोकनगर कलेक्टर के मामले में देरी हो रही है।
अब एक दो दिन में निर्वाचन आयोग का फैसला आ सकता है। राज्य सरकार भी इस फैसले के इंतजार में है। सोशल मीडिया पर लोग यह भी कह रहे हैं कि फैसला योग्यता और निष्पक्षता के आधार पर होना चाहिए, न कि अफवाहों पर।