सीएम हेल्पलाइन की हकीकत: कहीं बेहतर काम, कहीं अफसरों की लापरवाही उजागर

मध्य प्रदेश की सीएम हेल्पलाइन की हालिया ग्रेडिंग रिपोर्ट में कुछ विभागों ने शानदार प्रदर्शन किया। अन्य विभागों में अफसरों की लापरवाही उजागर हुई।

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Ramanand Tiwari
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Reality of CM Helpline Better work at some places, negligence of officers at other places exposed

Photograph: (the sootr)

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NEWS IN SHORT

  • सीएम हेल्पलाइन का उद्देश्य शिकायतों का समय पर और संतोषजनक समाधान करना है।
  • कुछ विभागों ने शानदार प्रदर्शन किया, जबकि कई ने अफसरों की लापरवाही दिखाई।
  • टॉप 5 विभागों में योजना, ऊर्जा, खाद्य, नगरीय विकास और वित्त विभाग शामिल हैं।
  • कुछ विभागों ने बी-रेटिंग प्राप्त की, सुधार की दिशा में काम कर रहे हैं।
  • सबसे खराब प्रदर्शन विमानन और जनसंपर्क विभाग का रहा, लापरवाही दिखी।

NEWS IN DETAIL

BHOPAL. मध्य प्रदेश की सीएम हेल्पलाइन हर महीने सरकारी विभागों के कामकाज का आईना दिखाती है। 1 दिसंबर से 20 जनवरी की ग्रेडिंग रिपोर्ट में कुछ विभागों ने शानदार प्रदर्शन किया, तो कई विभाग जनता की शिकायतों में बुरी तरह फिसड्डी साबित हुए। यह रिपोर्ट न सिर्फ अफसरों की जवाबदेही तय करती है, बल्कि यह भी बताती है कि सरकार की मुस्तैदी के बावजूद ज़मीनी स्तर पर कहां पेंच फंसा है।

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जनता की उम्मीद बनाम सिस्टम की सुस्ती

सीएम हेल्पलाइन का मकसद है-शिकायतों का समय पर और संतोषजनक समाधान। लेकिन हकीकत यह है कि कई जगह शिकायतकर्ता आज भी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। कहीं शिकायत जबरन बंद कर दी जाती है, तो कहीं शिकायतकर्ता को पता ही नहीं चलता कि उसकी शिकायत कब और कैसे खत्म हो गई।

बैठकें लगातार, फिर भी विरोधाभास क्यों?

मंत्रालय से लेकर जिला स्तर तक सीएम हेल्पलाइन के मामलों को निपटाने के लिए लगातार बैठकें हो रही हैं। इसके बावजूद शिकायतों के निराकरण में विरोधाभास सामने आना यह बताता है कि कुछ विभाग सिस्टम को गंभीरता से नहीं ले रहे। यहीं से सवाल उठता है-क्या सिर्फ बैठकें काफी हैं, या अफसरों की जवाबदेही तय करना ज्यादा जरूरी है?

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सीएम हेल्पलाइन ग्रेडिंग: कौन टॉप पर, कौन फेल?

एक दिसंबर से 20 जनवरी की स्थिति में जारी ग्रेडिंग रिपोर्ट में ए-रेटिंग पाने वाले टॉप 5 विभाग सामने आए हैं।

सीएम हेल्पलाइन ग्रेडिंग: ए-रेटिंग वाले टॉप 5 विभाग

विभाग का नामकुल शिकायतेंवेटेज स्कोर (Performance)रेटिंग
योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग2,27093.38A
ऊर्जा विभाग40,67089.85A
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण16,67988.07A
नगरीय विकास एवं आवास विभाग43,20287.44A
वित्त विभाग6,06187.44A


इन विभागों ने यह साबित किया कि इच्छाशक्ति हो, तो शिकायतों का समाधान संभव है।

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मध्यम प्रदर्शन वाले विभाग: न अच्छे, न बेहद खराब

ग्रेडिंग में 6 से 10वें स्थान पर रहने वाले विभागों को बी-रेटिंग के करीब माना गया।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे—

  • पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग
  • गृह विभाग
  • सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग
  • लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग
  • महिला एवं बाल विकास विभाग

यह विभाग सुधार की राह पर हैं, लेकिन अभी मंज़िल दूर है।

सबसे पिछड़े विभाग: जहां सिस्टम ने साथ नहीं दिया

ग्रेडिंग रिपोर्ट में कुछ विभाग ऐसे भी रहे, जिन्होंने जनता की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले विभाग

  • जनसम्पर्क विभाग
  • विधि एवं विधायी कार्य विभाग
  • संसदीय कार्य विभाग
  • विमानन विभाग (सबसे अंतिम स्थान पर)

खास तौर पर विमानन विभाग का सबसे नीचे रहना यह दिखाता है कि शिकायतों के निराकरण में गंभीर लापरवाही बरती गई।

ग्रेडिंग का फॉर्मूला: कैसे बनता है स्कोर?

सीएम हेल्पलाइन ग्रेडिंग रिपोर्ट सिर्फ शिकायतों की संख्या पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता पर आधारित होती है।
वेटेज का पूरा गणित

  • संतुष्टि के साथ बंद शिकायतें – 60%
  • 50 दिन से अधिक लंबित शिकायतें – 10%
  • निम्न गुणवत्ता से बंद शिकायतें – 10%
  • नोट अटेंडेंट शिकायतें – 10%
  • मान्य व अमान्य शिकायतों का अनुपात – 10%

इसी आधार पर विभागों को A से D रेटिंग में बांटा जाता है।

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सीएम हेल्पलाइन का दोहरा सच

सीएम हेल्पलाइन ने कई विभागों को सुधार की राह दिखाई है, यह इसका सकारात्मक पक्ष है। लेकिन अफसरों की लापरवाही, जबरन शिकायत बंद करना और संवाद की कमी-ये इसके नकारात्मक पहलू हैं। अब सवाल यह है कि क्या अगली ग्रेडिंग में पिछड़े विभाग सबक लेंगे, या जनता की शिकायतें यूं ही फाइलों में दबी रहेंगी?

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