अशोकनगर वाटर क्राइसिस: क्या फिर दिखेगा भागीरथपुरा जैसा कांड? बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग

मध्यप्रदेश के अशोकनगर में टीला टपरा मोहल्ले के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए जान जोखिम में डाल रहे हैं। लोग गहरे सूखे कुएं में उतरकर मटमैला पानी पीने को मजबूर हो गए हैं।

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Aman Vaishnav
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ashoknagar mungaoli tila tapra village water crisis

NEWS IN SHORT

  • टीला टपरा मोहल्ले के करीब 100 लोग  पानी के लिए तरस रहे हैं।
  • मोहल्ले में एक भी हैंडपंप नहीं है। इससे लोगों को परेशानी हो रही है।
  • ग्रामीण 20 फीट गहरे कुएं में सीढ़ी लगाकर उतरते हैं और कीचड़ वाला पानी निकालते हैं।
  • ग्रामीणों ने कई बार शिकायत की लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
  • वहीं इस मामले को लेकर प्रशासन का दावा कुछ और ही कहता है।

News In Detail

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि पीने के पानी के लिए किसी को अपनी जान दांव पर लगानी पड़े? मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले से एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां के लोग प्यास बुझाने के लिए मौत से लड़ रहे हैं। सरकारी फाइलों में भले ही हर घर जल पहुंच गया हो लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

आजादी के 75 साल बाद भी टीला गांव का यह मोहल्ला विकास से कोसों दूर है। गर्मी शुरू होने से पहले ही गांव के जल स्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं। ग्रामीण गंदा पानी पीने और जोखिम उठाने को मजबूर हैं। जिससे सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं।

टीला टपरा मोहल्ले की दास्तां

मुंगावली ब्लॉक के टीला टपरा मोहल्ले में करीब 10 परिवार और 100 लोग रहते हैं। यहां रहने वाले लोग आज भी एक हैंडपंप के लिए तरस रहे हैं। सालों से ग्रामीण पानी की समस्या को लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। इससे स्थिति अब बद से बदतर हो चुकी है।

जान जोखिम में डाल रहे ग्रामीण

गर्मी आने से पहले ही मोहल्ले के दो कुएं सूख गए हैं। प्यास बुझाने के लिए लोग सीढ़ी लगाकर कुएं में 20 फीट नीचे उतरते हैं। वहां छोटे-छोटे गड्ढे खोदकर जो गंदा पानी रिसता है, उसे इकट्ठा करते हैं। इसके बाद उसी गंदे पानी को बर्तनों में भरकर बाहर लेकर आते हैं

मटमैला पानी पीने को मजबूर

कुएं के नीचे जमा होने वाला पानी पूरी तरह गंदा और मटमैला होता है। ग्रामीणों के पास इसके अलावा पानी का कोई दूसरा रास्ता नहीं है। इसी पानी को घर से काम में इस्तेमाल किया जाचा है। लोग मजबूरी में यही पानी पी रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना- जानवर भी प्यासे

ग्रामवासियों का कहना है कि मोहल्ले में एक हैंडपंप लग जाए तो अच्छा रहेगा। इससे उन्हें कुएं से गंदा पानी पीने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कुआं सूखने से सिर्फ इंसानों के लिए नहीं, बल्कि जानवरों के लिए भी पानी की बड़ी मुश्किल हो गई है।

प्रशासन का दावा और ग्रामीणों का तर्क

इस मामले की खबर मिलते ही पीएचई विभाग के उपयंत्री रोहित त्यागी मौके पर मुआयना करने पहुंचे थे। उन्होंने तर्क दिया कि मोहल्ले से 350 मीटर की दूरी पर हैंडपंप मौजूद है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि वहां जाने का रास्ता एक किलोमीटर लंबा है। बुजुर्गों और महिलाओं के लिए इतनी दूर से पानी ढोकर लाना मुश्किल हो जाता है।

सरकारी योजनाओं के दावों पर सवाल

ये समस्या प्रशासन पर की बड़े सवाल उठाती है। आखिर हर घर नल से जल योजना का लाभ इस मोहल्ले तक क्यों नहीं पहुंचा? आज भी 100 लोग ऐसे हैं जिन्हें पानी की सुविधा नहीं मिल पा रही है। 

निष्कर्ष

मध्यप्रदेश अभी इंदौर के भागीरथपुरा कांड के जख्मों से उभरा भी नहीं है। वहीं प्रदेश के अशोकनगर से डरा देने वाली तस्वीर सामने आ रही है। इंदौर में दूषित पानी ने 34 से ज्यादा मौतें हुई हैं। शायद प्रशासन ने इस खौफनाक मंजर से कोई सबक नहीं लिया है। अशोकनगर के टीला गांव में भी लोग साफ पानी के लिए तरस रहे हैं।

बूंद-बूंद पानी के लिए लोग मटमैला पानी पीने के लिए मजबूर हो गए हैं। अब यह देखना होगा कि इन तस्वीरों के सामने आने के बाद प्रशासन कब तक कोई ठोस कदम उठाता है।

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