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INDORE. भागीरथपुरा कांड को लेकर सरकार की हाई-लेवल कमेटी को खारिज करते हुए इंदौर हाईकोर्ट ने स्वतंत्र जांच कमीशन बना दिया है। हाईकोर्ट ने पूर्व जज सुशील कुमार गुप्ता का वन मैन जांच कमीशन गठित किया है।
आयोग चार सप्ताह में अंतरिम रिपोर्ट देगा। बता दें कि इस मामले में अभी तक 29 लोगों की मौत हो चुकी है। हाईकोर्ट में अब पांच मार्च को इसकी सुनवाई होगी।
जांच कमीशन इन सभी की करेगा जांच
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी ने आयोग के काम तय किए हैं। आयोग दूषित जल के कारणों की जांच करेगा। यह पता लगाया जाएगा कि सीवेज, इंडस्ट्रियल डिस्चार्ज, पाइपलाइन लीकेज या किस कारण से यह घटना हुई!
इसके अलावा असल मौतें कितनी हुई हैं और उनका कारण क्या रहा है। पानी की सप्लाई मामले में अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। यह भी तय किया जाएगा कि पीड़ितों को कितना मुआवजा मिलना चाहिए।
आयोग को अधिकार होंगे कि वह किसी को भी समन देकर बुला सकेगा। कोई भी रिकॉर्ड तलब कर सकेगा और इस मामले में सभी विभाग जांच कमीशन को पूरी मदद करेंगे।
मेडिकल रिपोर्ट और कमेटी पर उठाए सवाल
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में भले ही शासन ने हाई-लेवल कमेटी बनाई, लेकिन इसमें याचिकाकर्ताओं की आपत्ति है। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वतंत्र जांच कमीशन का गठन किया जाना जरूरी लगता है। वहीं डेथ कमेटी की रिपोर्ट पर भी हाईकोर्ट ने आपत्ति ली है।
इसमें वर्बल ऑटोप्सी जैसी बातें और 23 मौतों के ऑडिट में केवल 16 मौतों को ही डायरिया से माने जैसी बातों का सही कारण नहीं पाया गया। इसलिए मौतों की जांच को भी आयोग के दायरे में लाया गया है।
वहीं हाईकोर्ट ने शासन को दिए गए अंतरिम आदेशों का पालन करने के लिए कहा है। इसमें साफ पानी की सप्लाई और रेगुलर सैंपल की जांच आदि शामिल हैं।
इसके पहले दो कमेटी बनी थीं
इस स्वतंत्र जांच कमीशन के पहले भी दो कमेटियों के गठन की बात आई थी। सबसे पहले घटना होने के बाद सीएम डॉ. मोहन यादव ने ट्वीट कर इस मामले की जांच आईएएस अपर कलेक्टर पवार वजीवज विजय से कराने की बात कही थी। इसके बाद, मामले ने तूल पकड़ा और फिर इसमें आईएएस निगमायुक्त व अपर आयुक्त दोनों को हटा दिया गया।
इसके पहले एसीएस संजय दुबे भी एक दिन जांच के लिए आए और सीएम को रिपोर्ट दी थी। फिर शासन ने एसीएस सामान्य प्रशासन की अध्यक्षता में सीनियर आईएएस व संभागायुक्त इंदौर की चार सदस्यीय कमेटी गठित की थी। इस पर याचिकाकर्ताओं की आपत्ति थी।
यह सभी अधिक्ता विविध याचिकाओं में रहे
याचिकाकर्ताओं की ओर से इसमें वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया, अधिवक्ता शैली पुरंदरे, आदित्य प्रताप सिंह, मनीष यादव, एमएस चंदेल, रितेश इनानी आदि रहे तो वहीं शासन व विभाग की ओर से अधिवक्ता पियूष जैन, ऋषि तिवारी, कपिल दुग्गल, अनिल ओझा, नीरज सोनी, विभोर खंडेलवाल, ऋषि आनंद चौकसे, एएजी राहुल सेठी, एएजी आशीष यादव, सुदीप भार्गव, डीएजी आदि अधिवक्ता शामिल हुए।
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